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Bageshwar News: घर की बगिया में उगाया जंगल का बुरांश और पाषाणभेद
Tue, 26 Mar 2024 11:12 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Tue, 26 Mar 2024 11:12 PM IST
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बागेश्वर। कहते हैं मेहनत कभी बेकार नही जाती। यदि इंसान लगन के साथ मेहनत करे तो उसे सफलता अवश्य मिलती है। बागेश्वर जिले के जारती के बागवान ने यही कर दिखाया है।
जारती के बागवान भूपेंद्र सिंह मेहता ने जंगल की शोभा बुरांश को घर की बगिया में लगाने की सोची। तीन साल पहले मेहता ने घर के पास जंगल से लाकर बुरांश का पौधा लगाया। अब बुरांश के पेड़ पर खूबसूरत फूल लगने लगे हैं। इस सीजन में पैदा होने वाला बुरांश अपनी खूबसूरती से मन तो मोहता ही है, बुरांश का जूस दिल की बीमारी में बेहद कारगर माना जाता है।
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पत्थरचट्टा, शिलफोड़ नाम से भी जाने जाने वाले पाषाणभेद को भूपेंद्र ने घर के गमले में उगा डाला है। पाषाणभेद को पथरी की बीमारी की अचूक दवा माना जाता है। पहाड़ में वन सुपारी के नाम से विख्यात यह जड़ी जंगलों में पाई जाती है। पत्थरों के बीच पैदा होने के कारण ही इस जड़ी का नाम पाषाणभेद, पत्थरचट्टा पड़ा। जड़ी का सुपारी की तरह स्वाद होता है। पथरी की बीमारी में कारगर होने के कारण ही इसे सिलफोड़ नाम से जाना जाता है। भूपेंद्र मेहता का कहना है कि उनकी बुरांश और पाषाणभेद को बड़े स्तर पर पैदा करने की योजना है, ताकि लोग इससे प्रेरित हो सकें। संवाद
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औषधीय गुणों से भरपूर है पाषाणभेद
बागेश्वर। वरिष्ठ आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉ. नवीन चंद्र जोशी बताते हैं कि आयुर्वेद के अनुसार पत्थरचट्टा में कई औषधीय गुण पाए जाते हैं। इसका प्रयोग कई बीमारियों की दवा बनाने में किया जाता है। पथरी की समस्या में पत्थरचट्टा रामबाण औषधि है। पत्थरचट्टा के पत्तों का गुनगुने पानी के साथ सेवन करने और जड़ी चबाने से पथरी की समस्या से राहत मिलती है। अच्छे परिणाम के लिए इसके 2 पत्तों का खाली पेट सेवन करना चाहिए। पत्थरचट्टा के रस में सौंठ का चूर्ण मिलाकर सेवन करने से पेट दर्द से भी राहत मिलती है। यह पेट से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने के लिए भी प्रयोग में लाया जाता है। संवाद