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दिन-रात जलता रहा जिला मुख्यालय के नदीगांव का जंगल
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बागेश्वर के नदीगांव के जंगल में आग बुझाते लोग। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : BAGESHWAR
बागेश्वर। जंगलों में आग लगने का सिलसिला रुक नहीं रहा है। बृहस्पतिवार की रात को जिला मुख्यालय के नदीगांव के जंगल में आग लग गई।
शुक्रवार को भी दिनभर जंगल आग से धधकता रहा। स्थानीय लोगों और वन विभाग की टीम ने बमुश्किल आग पर काबू पाया। उधर, दुगनाकुरी के जंगलों में भी आग से वन संपत्ति को खासा नुकसान पहुंचा है।
जिला मुख्यालय के नदीगांव के जंगल में बृहस्पतिवार की रात अचानक आग लग गई। नदीगांव की सीमा से वन पंचायत और आरक्षित वन क्षेत्र में रातभर आग धधकती रही।
शुक्रवार की सुबह वन पंचायत सरपंच संगठन के जिलाध्यक्ष पूरन रावल समेत तमाम लोग जंगल की आग को बुझाने पहुंचे। काफी बड़े हिस्से में आग लगने के कारण आग पर काबू पाने में दिक्कत आई। दोपहर तक पहुंचे वन कर्मियों ने ग्रामीणों के साथ मिलकर शाम को आग पर काबू पाया।
इस फायर सीजन में 50 हेक्टेयर जंगल जलकर राख
बागेश्वर। फायर सीजन में डेढ़ महीने के भीतर जंगलों में आग लगने की 35 से अधिक घटनाएं हो चुकी हैं। जिला मुख्यालय के जंगल भी आग से अछूते नहीं है। पिछले वर्ष अग्निकाल में जंगलों में आग लगने की मात्र चार घटना हुई थीं।
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इस बार डेढ़ महीने में ही आठ गुना अधिक घटनाएं हो गई हैं। जिला मुख्यालय के जंगल तक आग से धधक रहे हैं। पिछले अग्निकाल में जंगल में आग लगने की केवल चार घटनाएं हुईं। मात्र 5.25 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ। इस शीतकाल में जंगलों में जमकर आग लगी।
शीतकाल में जंगलों में आग लगने की 51 घटनाएं हुईं। 73.94 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ। वनों को आग से बचाने के लिए जिले में 29 क्रू स्टेशन बनाए गए हैं। प्रत्येक क्रू स्टेशन में चार कर्मचारियों की तैनाती वन विभाग ने की है।
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शुक्रवार को भी दिनभर जंगल आग से धधकता रहा। स्थानीय लोगों और वन विभाग की टीम ने बमुश्किल आग पर काबू पाया। उधर, दुगनाकुरी के जंगलों में भी आग से वन संपत्ति को खासा नुकसान पहुंचा है।
जिला मुख्यालय के नदीगांव के जंगल में बृहस्पतिवार की रात अचानक आग लग गई। नदीगांव की सीमा से वन पंचायत और आरक्षित वन क्षेत्र में रातभर आग धधकती रही।
शुक्रवार की सुबह वन पंचायत सरपंच संगठन के जिलाध्यक्ष पूरन रावल समेत तमाम लोग जंगल की आग को बुझाने पहुंचे। काफी बड़े हिस्से में आग लगने के कारण आग पर काबू पाने में दिक्कत आई। दोपहर तक पहुंचे वन कर्मियों ने ग्रामीणों के साथ मिलकर शाम को आग पर काबू पाया।
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इस फायर सीजन में 50 हेक्टेयर जंगल जलकर राख
बागेश्वर। फायर सीजन में डेढ़ महीने के भीतर जंगलों में आग लगने की 35 से अधिक घटनाएं हो चुकी हैं। जिला मुख्यालय के जंगल भी आग से अछूते नहीं है। पिछले वर्ष अग्निकाल में जंगलों में आग लगने की मात्र चार घटना हुई थीं।
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इस बार डेढ़ महीने में ही आठ गुना अधिक घटनाएं हो गई हैं। जिला मुख्यालय के जंगल तक आग से धधक रहे हैं। पिछले अग्निकाल में जंगल में आग लगने की केवल चार घटनाएं हुईं। मात्र 5.25 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ। इस शीतकाल में जंगलों में जमकर आग लगी।
शीतकाल में जंगलों में आग लगने की 51 घटनाएं हुईं। 73.94 हेक्टेयर जंगल प्रभावित हुआ। वनों को आग से बचाने के लिए जिले में 29 क्रू स्टेशन बनाए गए हैं। प्रत्येक क्रू स्टेशन में चार कर्मचारियों की तैनाती वन विभाग ने की है।