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उत्तराखंड की संस्कृति के संरक्षण के लिए आगे आएं : नेगी
अमर उजाला ब्यूरो बागेश्वर
Updated Wed, 07 Dec 2016 09:50 PM IST
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लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी
- फोटो : amar ujala
उत्तराखंड के प्रसिद्ध लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी को उत्तराखंड पत्रकार एवं साहित्यकार समिति ने शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। इस मौके पर गायक नेगी ने कहा है कि उत्तराखंड की संस्कृति को बचाने के लिए सभी को आगे आना होगा।
गरुड़ में आयोजित एक कार्यक्रम में लोक गायक नेगी ने उत्तराखंड की विलुप्त हो रही बोली पर बेहद चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज बहुत सारे लोकगीत कुमाऊंनी और गढ़वाली भाषा में लिखे जा रहे हैं और गाये जा रहे हैं, लेकिन उनमें आम आदमी की पीड़ा और मार्मिकत का आभाव दिखाई दे रहा है। उन्होंने लिखने और गाने वाले लोक कलाकारों से अपील करते हुए कहा कि वे पहाड़ के आम जनमानस से जुड़ी समस्याओं को अपने लोक गीतों का माध्यम बनाएं। साथ ही यहां के रीति-रिवाज, खानपान, पहनावा, धर्म आध्यात्म और प्रकृति प्रदत्त सुंदरता को उकेरने की जरूरत है। लोक गायक नेगी ने कहा कि पहाड़ की विरह वेदना और यहां के डांडी-काठी में छिपे लोक जीवन के दर्द को लेखकों और गायकों ने महसूस करना चाहिए। इस मौके पर उत्तराखंड पत्रकार एवं साहित्यकार समिति के अध्यक्ष मोहन जोशी, महासचिव चंद्रशेखर बड़सीला, डा.हेम चंद्र दुबे, सिविल सोसायटी के अध्यक्ष डीके जोशी, मनोज खोलिया, संतोष तिवारी आदि मौजूद थे।
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गरुड़ में आयोजित एक कार्यक्रम में लोक गायक नेगी ने उत्तराखंड की विलुप्त हो रही बोली पर बेहद चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज बहुत सारे लोकगीत कुमाऊंनी और गढ़वाली भाषा में लिखे जा रहे हैं और गाये जा रहे हैं, लेकिन उनमें आम आदमी की पीड़ा और मार्मिकत का आभाव दिखाई दे रहा है। उन्होंने लिखने और गाने वाले लोक कलाकारों से अपील करते हुए कहा कि वे पहाड़ के आम जनमानस से जुड़ी समस्याओं को अपने लोक गीतों का माध्यम बनाएं। साथ ही यहां के रीति-रिवाज, खानपान, पहनावा, धर्म आध्यात्म और प्रकृति प्रदत्त सुंदरता को उकेरने की जरूरत है। लोक गायक नेगी ने कहा कि पहाड़ की विरह वेदना और यहां के डांडी-काठी में छिपे लोक जीवन के दर्द को लेखकों और गायकों ने महसूस करना चाहिए। इस मौके पर उत्तराखंड पत्रकार एवं साहित्यकार समिति के अध्यक्ष मोहन जोशी, महासचिव चंद्रशेखर बड़सीला, डा.हेम चंद्र दुबे, सिविल सोसायटी के अध्यक्ष डीके जोशी, मनोज खोलिया, संतोष तिवारी आदि मौजूद थे।
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