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Bageshwar News: पपेट के बाद कोलाज और कागज शिल्प से पढ़ाई को बनाया जा रहा मजेदार और रचनात्मक
Fri, 09 Oct 2026 12:04 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Fri, 09 Oct 2026 12:04 AM IST
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बागेश्वर। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में एकीकृत शिक्षण के लिए बाल-केंद्रित शिक्षण-अधिगम सामग्री निर्माण और कला, शिल्प और खिलौना आधारित शिक्षणशास्त्र का प्रयोग विषय पर पांच दिवसीय कार्यशाला का आयोजन तीसरे दिन भी जारी रहा। इसमें प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के शिक्षक-प्रतिभागी हिस्सा लेकर शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, रोचक और बाल-केंद्रित बनाने का व्यावहारिक अभ्यास कर रहे हैं।
कार्यशाला के पहले दिन शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, बाल-केंद्रित शिक्षा, अनुभवात्मक शिक्षण और कला-एकीकृत शिक्षा की अवधारणाओं के बारे में बताया गया। इसके साथ ही राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद की कक्षा छह से आठ की पाठ्यपुस्तकों के आधार पर विभिन्न विषयों को कला से जोड़ने का अभ्यास कराया गया। दूसरे दिन कठपुतली कला को शिक्षण-अधिगम साधन के रूप में प्रयोग करने पर जोर दिया गया। विषय विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में शिक्षकों ने खुद कठपुतलियां बनाईं और इनके जरिए कहानी सुनाने व कठिन विषयों को आसान बनाने का अभ्यास किया। शिक्षकों ने समझा कि कठपुतली केवल मनोरंजन नहीं बल्कि बच्चों की भागीदारी और अभिव्यक्ति बढ़ाने का सशक्त माध्यम है।
चित्र-संयोजन और कागज शिल्प से सीखने की गतिविधियां
तीसरे दिन चित्र-संयोजन और सीखने के लिए कागज शिल्प पर गतिविधियां आयोजित की गईं। शिक्षकों को स्थानीय और कबाड़/कम लागत वाली सामग्री से एनसीईआरटी पाठ्यक्रम पर आधारित शैक्षणिक कोलाज बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। समूह गतिविधियों के जरिए शिक्षकों ने सीखा कि कला-कौशल को पढ़ाई से कैसे जोड़ा जाए। चौथे दिन पेपर माशे और खिलौना आधारित शिक्षणशास्त्र पर काम होगा। इसमें शिक्षक 3-डी शिक्षण सामग्री, शैक्षणिक खिलौने और मॉडल बनाना सीखेंगे। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को ऐसे रचनात्मक साधन बनाने में सक्षम बनाना है, जिससे बच्चे पढ़ाई में सक्रिय रूप से भाग ले सकें।
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कार्यशाला के पहले दिन शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, बाल-केंद्रित शिक्षा, अनुभवात्मक शिक्षण और कला-एकीकृत शिक्षा की अवधारणाओं के बारे में बताया गया। इसके साथ ही राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद की कक्षा छह से आठ की पाठ्यपुस्तकों के आधार पर विभिन्न विषयों को कला से जोड़ने का अभ्यास कराया गया। दूसरे दिन कठपुतली कला को शिक्षण-अधिगम साधन के रूप में प्रयोग करने पर जोर दिया गया। विषय विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में शिक्षकों ने खुद कठपुतलियां बनाईं और इनके जरिए कहानी सुनाने व कठिन विषयों को आसान बनाने का अभ्यास किया। शिक्षकों ने समझा कि कठपुतली केवल मनोरंजन नहीं बल्कि बच्चों की भागीदारी और अभिव्यक्ति बढ़ाने का सशक्त माध्यम है।
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चित्र-संयोजन और कागज शिल्प से सीखने की गतिविधियां
तीसरे दिन चित्र-संयोजन और सीखने के लिए कागज शिल्प पर गतिविधियां आयोजित की गईं। शिक्षकों को स्थानीय और कबाड़/कम लागत वाली सामग्री से एनसीईआरटी पाठ्यक्रम पर आधारित शैक्षणिक कोलाज बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। समूह गतिविधियों के जरिए शिक्षकों ने सीखा कि कला-कौशल को पढ़ाई से कैसे जोड़ा जाए। चौथे दिन पेपर माशे और खिलौना आधारित शिक्षणशास्त्र पर काम होगा। इसमें शिक्षक 3-डी शिक्षण सामग्री, शैक्षणिक खिलौने और मॉडल बनाना सीखेंगे। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों को ऐसे रचनात्मक साधन बनाने में सक्षम बनाना है, जिससे बच्चे पढ़ाई में सक्रिय रूप से भाग ले सकें।
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