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नीलेश्वर और मनकोट के जंगलों में आग लगने से वनसंपदा को नुकसान पहुंचा
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मनकोट के जंगल में लगी आग। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : BAGESHWAR
बागेश्वर। जिला मुख्यालय के पास नीलेश्वर की पहाड़ी और मनकोट के जंगलों में लगी आग से वन संपदा को काफी नुकसान हुआ है। वन विभाग ने लोगों की मदद से आग पर काबू पा लिया है।
बुधवार को रात करीब नौ बजे नीलेश्वर की पहाड़ी पर आग धधक उठी। आग देखकर स्थानीय लोग रात में ही मौके पर आग बुझाने पहुंचे। लोगों ने संबंधित विभाग के मौके पर जल्द नहीं पहुंचने पर नाराजगी जताई। वन विभाग की टीम ने कुछ समय बाद स्थानीय लोगों की मदद से आग पर काबू पा लिया। हालांकि आग आवासीय क्षेत्र तक पहुंचने से बच गई। इधर बुधवार को मनकोट के जंगलों में आग लग गई। जानकारी मिलने पर वन विभाग की टीम ने बमुश्किल आग पर काबू पाया। फायर सीजन बीतने के बाद भी जंगलों में आए दिन आग की घटनाएं सामने आने से वनसंपदा को भारी नुकसान पहुंच रहा है। प्रभागीय वनाधिकारी बीएस शाही ने बताया कि दोनों जंगलों में लगी आग पर काबू पा लिया गया है। वन में आग लगने के पीछे गर्मियों में पिरूल का नष्ट न होना है। लोग घास के लिए वन में आग लगा रहे हैं। शराबी और अराजक तत्व भी जंगल की आग का कारण बन रहे हैं। उन्होंने बताया कि जंगल में आग लगाते पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फायर सीजन में आग की चार और अब हो चुकी 10 घटनाएं
बागेश्वर। 15 फरवरी से 15 जून तक का समय फायर सीजन का होता है। इसके लिए जिला प्रशासन और वन विभाग पूरी तैयारी रखता है। इस बार फायर सीजन में आग न के बराबर लगी। इस बार केवल चार घटनाएं हुई। जिसमें 5.25 हेक्टेयर जंगल को आग से नुकसान पहुंचा। जबकि अक्तूबर और नवंबर में जंगल में आग लगने की दस घटनाएं सामने आ चुकी हैं। नवंबर महीने में भुरचुनिया धार, नीलेश्वर पहाड़ी और मनकोट के जंगल आग से धधक चुके हैं। आग से करीब दस हेक्टेयर जंगल को नुकसान पहुंचा है। फायर सीजन बीतने के बाद भी लगातार आग की घटनाएं सामने आना चिंताजनक है।
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बुधवार को रात करीब नौ बजे नीलेश्वर की पहाड़ी पर आग धधक उठी। आग देखकर स्थानीय लोग रात में ही मौके पर आग बुझाने पहुंचे। लोगों ने संबंधित विभाग के मौके पर जल्द नहीं पहुंचने पर नाराजगी जताई। वन विभाग की टीम ने कुछ समय बाद स्थानीय लोगों की मदद से आग पर काबू पा लिया। हालांकि आग आवासीय क्षेत्र तक पहुंचने से बच गई। इधर बुधवार को मनकोट के जंगलों में आग लग गई। जानकारी मिलने पर वन विभाग की टीम ने बमुश्किल आग पर काबू पाया। फायर सीजन बीतने के बाद भी जंगलों में आए दिन आग की घटनाएं सामने आने से वनसंपदा को भारी नुकसान पहुंच रहा है। प्रभागीय वनाधिकारी बीएस शाही ने बताया कि दोनों जंगलों में लगी आग पर काबू पा लिया गया है। वन में आग लगने के पीछे गर्मियों में पिरूल का नष्ट न होना है। लोग घास के लिए वन में आग लगा रहे हैं। शराबी और अराजक तत्व भी जंगल की आग का कारण बन रहे हैं। उन्होंने बताया कि जंगल में आग लगाते पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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फायर सीजन में आग की चार और अब हो चुकी 10 घटनाएं
बागेश्वर। 15 फरवरी से 15 जून तक का समय फायर सीजन का होता है। इसके लिए जिला प्रशासन और वन विभाग पूरी तैयारी रखता है। इस बार फायर सीजन में आग न के बराबर लगी। इस बार केवल चार घटनाएं हुई। जिसमें 5.25 हेक्टेयर जंगल को आग से नुकसान पहुंचा। जबकि अक्तूबर और नवंबर में जंगल में आग लगने की दस घटनाएं सामने आ चुकी हैं। नवंबर महीने में भुरचुनिया धार, नीलेश्वर पहाड़ी और मनकोट के जंगल आग से धधक चुके हैं। आग से करीब दस हेक्टेयर जंगल को नुकसान पहुंचा है। फायर सीजन बीतने के बाद भी लगातार आग की घटनाएं सामने आना चिंताजनक है।
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