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मेले में सजी जड़ी-बूटियों की दुकानें
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर।
Updated Mon, 18 Jan 2016 12:15 AM IST
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आधुनिकता और तमाम तरह के खतरों के बावजूद उच्च हिमालयी इलाकों की जंबू, गंदरायण आदि वस्तुओं का क्रेज खत्म नहीं हुआ है। हिमालय की यह धरोहरें आज भी उत्तरायणी मेले में बिकने के लिए आती हैं। यह ऐसी दवाइयां हैं जो रोजमर्रा के उपयोग के साथ ही बीमारियों में दवा का भी काम करती हैं।
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हिमालयी इलाकों में पैदा होने वाली कीमती जड़ी-बूटियां सदियों से परंपरागत मेलों के जरिए विभिन्न इलाकों तक जाती रही हैं। पिथौरागढ़ के धारचूला, मुनस्यारी आदि क्षेत्रों के व्यापारी हर साल उत्तरायणी के मेले में यह वस्तुएं बेचने के लिए आते हैं।
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धारचूला के बोन गांव निवासी किसन बोनाल ने बताया कि जंबू की तासीर गर्म होती है। इसे दाल में डाला जाता है। गंदरायण भी बेहतरीन दाल मसाला है। यह पेट, पाचन तंत्र के लिए उपयोगी है। कुटकी बुखार, पीलिया, मधुमेह, न्यूमोनिया में, डोलू गुम चोट में, मलेठी खांसी में, अतीस पेट दर्द में, सालम पंजा दुर्बलता में लाभ दायक होता है।
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उत्तरायणी मेले में जंबू 20 रुपये तोला, गंदरायण, डोलू, मलेठी आदि दस ग्राम 20 रुपये में, कुटकी 30 रुपये तोला के हिसाब से बिक रहा है। भोज पत्र, रतन जोत सहित कई प्रकार की धूप गंध वाली जड़ी बूटियां शामिल हैं।
व्यवसायियों का कहना है कि अनियंत्रित दोहन के कारण जड़ी-बूटियों का उत्पादन प्रभावित हुआ है। वह खेतों में उत्पादन करके बेचते हैं। इसके बावजूद इन्हें लाने ले जाने में पुलिस और वन महकमा परेशान करता है।
उत्तरायणी मेले में मुनस्यारी की राजमा भी बिक रही है। यह खाने में स्वादिष्ट होती है और जल्दी पक जाती है। राजमा 120 रुपये किलो से ऊपर बिक रही है। हिमालयी क्षेत्र में 10 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर पैदा होने वाली मूली के चिप्स भी वहां आए हैं। व्यवसाइयों ने बताया कि मूली के यह चिप्स बर्फ की हवा में सुखाए जाते हैं। इनकी सब्जी स्वादिष्ट, स्वास्थ्य वर्धक होती है। पेट की कब्ज, म्यूकस दूर करती है।
उत्तरायणी मेले में उच्च हिमालयी क्षेत्र के भोटिया कुत्तों की भी जमकर खरीददारी हो रही है। एक से डेढ़ माह तक के असली भोटिया कुत्तों के पिल्ले 12 हजार रुपये तक में बिक रहे हैं। मिश्रित प्रजातियों के पिल्लों की कीमत पांच हजार तक लग रही है। कुत्तों की नस्ल के साथ ही उनके रंग रूप, वजन, उम्र को लेकर भी कीमतें तय हो रही हैं। कुमाऊं, गढ़वाल के विभिन्न इलाकों के साथ ही दिल्ली आदि महानगरों से भी लोग भोटिया कुत्ते खरीदने को आ रहे हैं।
17बीजीएस 09पी/ उत्तरायणी मेला बागेश्वर में लाए गए कुत्ते के पिल्ले।