{"_id":"604266e28ebc3e8c911c78d9","slug":"electrification-completed-for-lift-drinking-water-scheme-bageshwar-news-hld4170772139","type":"story","status":"publish","title_hn":"लिफ्ट पेयजल योजना के लिए विद्युतीकरण का काम पूरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लिफ्ट पेयजल योजना के लिए विद्युतीकरण का काम पूरा
विज्ञापन
कपकोट की पेयजल योजना के लिए ट्रांसफार्मर लगाते बिजली कर्मी। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : BAGESHWAR
बागेश्वर। कपकोट की बहुप्रतीक्षित लिफ्ट पेयजल योजना के विद्युतीकरण का काम आखिरकार पूरा हो गया है। विद्युतीकरण का काम पिछले वर्ष अप्रैल तक पूरा हो जाना था लेकिन कोरोना महामारी के चलते अधर में लटक गया। बिजली जुड़ने के बाद पेयजल योजना के जल्द संचालन की उम्मीद बढ़ गई है।
कपकोट तहसील क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों के लिए पोथिंग से जल निगम लिफ्ट पेयजल योजना का निर्माण करा रहा है। पांच साल से योजना पर कार्य चल रहा है। लाइन बिछाने और टैंक बनाने का काम पूरा कर लिया गया था, लेकिन बिजलीकरण न होने से योजना का संचालन ठप था। ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता भाष्कर पांडेय ने बताया कि दो किमी लंबी योजना के लिए 11 केवी की बिजली लाइन का निर्माण किया जाना था। योजना में 100 किलोवाट क्षमता के दो ट्रांसफार्मर लगने थे। जिस स्थान पर ट्रांसफार्मर लगने थे, वहां पहुंचने के लिए उबड़-खाबड़ रास्ते पर खड़ी चढ़ाई पार करनी थी।
ऐसे रास्ते में खाली हाथ जाना भी संभव नहीं था, ऐसे में 8.7 क्विंटल के ट्रांसफार्मर को ले जाना चुनौती थी। पिछले वर्ष कोरोना के कारण नेपाली मूल के मजदूर भी घरों को लौट गए थे। जिसके कारण कार्य प्रभावित हो गया। अनलॉक के बाद सितंबर में जिलाधिकारी ने परियोजना में विद्युतीकरण का कार्य न होने पर नाराजगी जताई। विभाग से कारण जानने के बाद लोनिवि से समन्वय बनाकर कार्य करने के निर्देश दिए। लोनिवि के 20 नेपाली मजदूरों ने रस्सियों की मदद से ट्रांसफार्मर, ट्रिपर, चैनल आदि को पहाड़ी पर चढ़ाया शुक्रवार को बिजलीकरण का काम पूरा कर लिया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन
कपकोट तहसील क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों के लिए पोथिंग से जल निगम लिफ्ट पेयजल योजना का निर्माण करा रहा है। पांच साल से योजना पर कार्य चल रहा है। लाइन बिछाने और टैंक बनाने का काम पूरा कर लिया गया था, लेकिन बिजलीकरण न होने से योजना का संचालन ठप था। ऊर्जा निगम के अधिशासी अभियंता भाष्कर पांडेय ने बताया कि दो किमी लंबी योजना के लिए 11 केवी की बिजली लाइन का निर्माण किया जाना था। योजना में 100 किलोवाट क्षमता के दो ट्रांसफार्मर लगने थे। जिस स्थान पर ट्रांसफार्मर लगने थे, वहां पहुंचने के लिए उबड़-खाबड़ रास्ते पर खड़ी चढ़ाई पार करनी थी।
विज्ञापन
ऐसे रास्ते में खाली हाथ जाना भी संभव नहीं था, ऐसे में 8.7 क्विंटल के ट्रांसफार्मर को ले जाना चुनौती थी। पिछले वर्ष कोरोना के कारण नेपाली मूल के मजदूर भी घरों को लौट गए थे। जिसके कारण कार्य प्रभावित हो गया। अनलॉक के बाद सितंबर में जिलाधिकारी ने परियोजना में विद्युतीकरण का कार्य न होने पर नाराजगी जताई। विभाग से कारण जानने के बाद लोनिवि से समन्वय बनाकर कार्य करने के निर्देश दिए। लोनिवि के 20 नेपाली मजदूरों ने रस्सियों की मदद से ट्रांसफार्मर, ट्रिपर, चैनल आदि को पहाड़ी पर चढ़ाया शुक्रवार को बिजलीकरण का काम पूरा कर लिया गया।
विज्ञापन