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Bageshwar News: पुलिस कर्मियों को जान से मारने की धमकी देने वाला दोषमुक्त
Tue, 29 Aug 2023 12:31 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Tue, 29 Aug 2023 12:31 AM IST
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बागेश्वर। सिविल जज/न्यायिक मजिस्ट्रेट पुनीत कुमार की अदालत ने पुलिस कर्मियों से गालीगलौज करने और उन्हें जान से मारने की धमकी देने के आरोपी को दोषमुक्त कर दिया है। आरोपी को विवेचना में तथ्यों की कमी का लाभ मिला।
कथानक के अनुसार एसआई जगदीश चंद्र कांडपाल और आरक्षी राजेंद्र सिंह बिष्ट ने एसपी को तहरीर देकर बताया कि झिरौली पुलिस ने सात सितंबर 2018 को गैरीगाड़ से सात पेटी अवैध शराब के साथ दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों ने पुलिस को बताया कि पकड़ी गई शराब कटारमल, अल्मोड़ा निवासी अनिल बिष्ट की है। उसी दिन उक्त पुलिस कर्मी जब आरोपियों को रिमांड के लिए न्यायालय में पेश करने लाए तो पकड़ी गई शराब के मालिक ने पुलिस टीम के साथ गालीगलौज की और जान से मारने की धमकी देने लगा। उसी शाम उसने वादी एसआई के सरकारी मोबाइल नंबर पर फोन किया और फिर से धमकी दी। आठ सितंबर की सुबह फिर से आरोपी ने सरकारी नंबर पर फोन कर धमकी दी और आरक्षी राजेंद्र बिष्ट के नंबर पर भी फोन कर गाली गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी। जिसके बाद कर्मचारियों ने एसपी को तहरीर दी थी।
तहरीर के आधार पर एक जनवरी 2019 को आरोपी के खिलाफ धारा 504, 506 के तहत केस दर्ज किया गया। विवेचना के दौरान धारा 353 और 186 बढ़ोतरी की गई। तीन मई 2019 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से आठ गवाह पेश कराए गए। आरोपी की ओर से अधिवक्ता हरीश चंद्र जोशी, दिग्विजय सिंह जनौटी, हरीश चंद्र आर्या और त्रिलोक चंद्र जोशी ने मामले की पैरवी की। न्यायालय ने पत्रावली में आए साक्ष्यों का परिसीलन करने के बाद पाया कि पुलिस टीम के साथ न्यायालय में रिमांड के समय गालीगलौज, जान से मारने की धमकी और राजकीय कार्य में बाधा डालने की घटना हुई थी। बावजूद इसके कोतवाली समीप होते हुए भी उस दिन एफआईआर नहीं की गई। जिस मोबाइल नंबर से धमकी दी गई थी, वह नंबर आरोपी का ही है, उसकी कैफ प्रस्तुत नहीं की गई। जिससे यह नहीं कहा जा सकता है कि धमकी देने वाला मोबाइल नंबर आरोपी का ही था। संवाद
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कथानक के अनुसार एसआई जगदीश चंद्र कांडपाल और आरक्षी राजेंद्र सिंह बिष्ट ने एसपी को तहरीर देकर बताया कि झिरौली पुलिस ने सात सितंबर 2018 को गैरीगाड़ से सात पेटी अवैध शराब के साथ दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोपियों ने पुलिस को बताया कि पकड़ी गई शराब कटारमल, अल्मोड़ा निवासी अनिल बिष्ट की है। उसी दिन उक्त पुलिस कर्मी जब आरोपियों को रिमांड के लिए न्यायालय में पेश करने लाए तो पकड़ी गई शराब के मालिक ने पुलिस टीम के साथ गालीगलौज की और जान से मारने की धमकी देने लगा। उसी शाम उसने वादी एसआई के सरकारी मोबाइल नंबर पर फोन किया और फिर से धमकी दी। आठ सितंबर की सुबह फिर से आरोपी ने सरकारी नंबर पर फोन कर धमकी दी और आरक्षी राजेंद्र बिष्ट के नंबर पर भी फोन कर गाली गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी। जिसके बाद कर्मचारियों ने एसपी को तहरीर दी थी।
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तहरीर के आधार पर एक जनवरी 2019 को आरोपी के खिलाफ धारा 504, 506 के तहत केस दर्ज किया गया। विवेचना के दौरान धारा 353 और 186 बढ़ोतरी की गई। तीन मई 2019 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से आठ गवाह पेश कराए गए। आरोपी की ओर से अधिवक्ता हरीश चंद्र जोशी, दिग्विजय सिंह जनौटी, हरीश चंद्र आर्या और त्रिलोक चंद्र जोशी ने मामले की पैरवी की। न्यायालय ने पत्रावली में आए साक्ष्यों का परिसीलन करने के बाद पाया कि पुलिस टीम के साथ न्यायालय में रिमांड के समय गालीगलौज, जान से मारने की धमकी और राजकीय कार्य में बाधा डालने की घटना हुई थी। बावजूद इसके कोतवाली समीप होते हुए भी उस दिन एफआईआर नहीं की गई। जिस मोबाइल नंबर से धमकी दी गई थी, वह नंबर आरोपी का ही है, उसकी कैफ प्रस्तुत नहीं की गई। जिससे यह नहीं कहा जा सकता है कि धमकी देने वाला मोबाइल नंबर आरोपी का ही था। संवाद
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