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Bageshwar News: एनडीपीएस अधिनियम के आरोपी दोषमुक्त
Sat, 22 Jul 2023 12:20 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Sat, 22 Jul 2023 12:20 AM IST
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बागेश्वर। विशेष सत्र न्यायाधीश आरके खुल्बे की अदालत ने एनडीपीएस अधिनियम के दो आरोपियों को दोषमुक्त किया है। न्यायालय ने मामले में एनडीपीएस अधिनियम के प्रावधानों का अनुपालन नहीं होने और चक्षुदर्शी गवाह नहीं होने के चलते आरोपियों को दोषमुक्त करने का निर्णय लिया।
मामला 14 अगस्त 2021 का है। कौसानी पुलिस ने चेकिंग अभियान के दौरान मुखबिर की सूचना पर छतरी बैंड के पास से राशिद और मोहिद निवासी मौना, थाना बहेड़ी, जिला बरेली को स्मैक के साथ गिरफ्तार किया। राशिद के पास से नौ और मोहिद के पास से 17 ग्राम स्मैक बरामद की गई। कौसानी थाने में आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया। विवेचना के बाद पुलिस ने न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया। अभियोजन पक्ष ने न्यायालय में 10 गवाह पेश किए। आरोपियों की ओर से अधिवक्ता नरेंद्र सिंह कोरंगा और हेम चंद्र सिंह राणा ने मामले की पैरवी की। न्यायालय ने पत्रावली का अवलोकन और साक्ष्यों का परिसीलन करने के बाद पाया कि मामले में एनडीपीएस अधिनियम के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया है। दोनों आरोपियों की जामा तलाशी राजपत्रित अधिकारी से कराने का सहमति पत्र एक ही बना है जबकि अलग-अलग सहमति पत्र का प्रावधान है। सार्वजनिक स्थल पर बरामदगी की गई लेकिन एक भी चश्मदीद गवाह नहीं बनाया गया है। संवाद
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मामला 14 अगस्त 2021 का है। कौसानी पुलिस ने चेकिंग अभियान के दौरान मुखबिर की सूचना पर छतरी बैंड के पास से राशिद और मोहिद निवासी मौना, थाना बहेड़ी, जिला बरेली को स्मैक के साथ गिरफ्तार किया। राशिद के पास से नौ और मोहिद के पास से 17 ग्राम स्मैक बरामद की गई। कौसानी थाने में आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया। विवेचना के बाद पुलिस ने न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया। अभियोजन पक्ष ने न्यायालय में 10 गवाह पेश किए। आरोपियों की ओर से अधिवक्ता नरेंद्र सिंह कोरंगा और हेम चंद्र सिंह राणा ने मामले की पैरवी की। न्यायालय ने पत्रावली का अवलोकन और साक्ष्यों का परिसीलन करने के बाद पाया कि मामले में एनडीपीएस अधिनियम के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया है। दोनों आरोपियों की जामा तलाशी राजपत्रित अधिकारी से कराने का सहमति पत्र एक ही बना है जबकि अलग-अलग सहमति पत्र का प्रावधान है। सार्वजनिक स्थल पर बरामदगी की गई लेकिन एक भी चश्मदीद गवाह नहीं बनाया गया है। संवाद
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