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न्यायालय ने खारिज की गबन के आरोपी डाकपाल की याचिका
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर
Updated Wed, 19 Oct 2016 11:47 PM IST
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गबन के एक मामले में जिला सत्र न्यायाधीश ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के फैसले को यथावत रखते हुए गबन के आरोपी डाकपाल की अपील खारिज कर दी है। इस मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा आरोपी को दो अलग-अलग धाराओं में एक-एक वर्ष के सश्रम कारावास और 15 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई थी।
मामले के अनुसार पोस्ट ऑफिस बौड़ी में तैनात शाखा डाकपाल विनोद कुमार ने दो खाताधारकों के खातों से 10 हजार व पांच हजार रुपए निकाल लिए थे। खाता धारक बसंती देवी और किशन सिंह को जब इसका पता चला तो उन्होंने विभाग को लिखित शिकायत की। जांच में विनोद कुमार द्वारा गबन करने की पुष्टि हुई। विभागीय जांच में डाकपाल ने खातों से रुपए निकालने की बात स्वीकारी। अल्मोड़ा के डाक अधीक्षक ने विनोद कुमार के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराने के निर्देश दिए। आरोप पत्र दाखिल होने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में मामला चला।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने धारा 409 आईपीसी में दोष सिद्ध करते हुए अभियुक्त विनोद कुमार को एक वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपए के अर्थदंड, धारा 420 आईपीसी के तहत एक वर्ष का सश्रम कारावास और पांच हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई। इस आदेश के विरुद्घ अभियुक्त की ओर से जिला सत्र न्यायालय में अपील की। मामले में पैरवी करते हुए शासकीय अधिवक्ता फौजदारी डीके जोशी ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश को विधि संगत बताया। सत्र न्यायाधीश एचएस बोनाल ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के फैसले को यथावत रखते हुए अपील खारिज कर दी। इसके बाद जमानत पर चल रहे अभियुक्त को हिरासत में ले लिया गया।
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मामले के अनुसार पोस्ट ऑफिस बौड़ी में तैनात शाखा डाकपाल विनोद कुमार ने दो खाताधारकों के खातों से 10 हजार व पांच हजार रुपए निकाल लिए थे। खाता धारक बसंती देवी और किशन सिंह को जब इसका पता चला तो उन्होंने विभाग को लिखित शिकायत की। जांच में विनोद कुमार द्वारा गबन करने की पुष्टि हुई। विभागीय जांच में डाकपाल ने खातों से रुपए निकालने की बात स्वीकारी। अल्मोड़ा के डाक अधीक्षक ने विनोद कुमार के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराने के निर्देश दिए। आरोप पत्र दाखिल होने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में मामला चला।
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मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने धारा 409 आईपीसी में दोष सिद्ध करते हुए अभियुक्त विनोद कुमार को एक वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपए के अर्थदंड, धारा 420 आईपीसी के तहत एक वर्ष का सश्रम कारावास और पांच हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई। इस आदेश के विरुद्घ अभियुक्त की ओर से जिला सत्र न्यायालय में अपील की। मामले में पैरवी करते हुए शासकीय अधिवक्ता फौजदारी डीके जोशी ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश को विधि संगत बताया। सत्र न्यायाधीश एचएस बोनाल ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के फैसले को यथावत रखते हुए अपील खारिज कर दी। इसके बाद जमानत पर चल रहे अभियुक्त को हिरासत में ले लिया गया।
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