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जंगल की आग से झुलसा दंपती हायर सेंटर रेफर

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Thu, 04 Feb 2021 11:17 PM IST
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Couples scorched by forest fire refer higher center
प्रतीकात्मक फोटो।
बागेश्वर। जंगल की आग से झुलसे दोबाड़ गांव के बुजुर्ग दंपती को जिला अस्पताल से हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है। दंपती को कपकोट अस्पताल से गंभीर अवस्था में रेफर कर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
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कपकोट के दोबाड़ गांव में बुधवार को जंगल की आग घरों तक पहुंच गई थी। आग ने गांव के 60 वर्षीय धरम सिंह के घास के ढेर को चपेट में ले लिया। वह और उनकी 56 साल की पत्नी देवकी देवी ने आग बुझाने की कोशिश की। इस दौरान आग ने दंपती को चपेट में ले लिया। आग से बुजुर्गों के हाथ, पैर सहित शरीर के अन्य अंग बुरी तरह से झुलस गए। आसपास के ग्रामीणों ने उन्हें आग के चंगुल से बाहर निकाला। इसके बाद पहले उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कपकोट और बाद में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। बृहस्पतिवार को उन्हें जिला अस्पताल से भी हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है। चिकित्साधिकारी डॉ. एलएस बृजवाल ने बताया कि दंपती 60 प्रतिशत से अधिक झुलस चुके थे।
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वनाग्नि रोकने की रोकथाम के लिए 29 क्रू स्टेशन बनाए
बागेश्वर। वन विभाग ने आगामी अग्निकाल की तैयारियां शुरू कर दी हैं। जंगल की आग की रोकथाम के लिए जिले के वन रेंजों में 29 क्रू स्टेशन बनाए गए हैं। प्रत्येक क्रू स्टेशन में चार कर्मचारी तैनात रहेंगे। बागेश्वर वन रेंज में रैखोली, झिरौली, छतीना, बचीगांव, कठायतबाड़ा व जौलकांडे, गढ़खेत रेंज में वज्यूला, जखेड़ा, गढ़खेत, सलानी व जिंतोली, कपकोट रेंज में जखेड़ी, जगथाना, कपकोट व पुंगर, धरमघर रेंज में कांडा, सानिउडियार, हल्द्वानी/नामतीचेटाबगड़, दोफाड़ व धरमघर, बैजनाथ रेंज में पुरुड़ा, गरुड़, कौसानी, द्यौनाई, रौल्याना, हरद्वारछीना व सिरकोट और ग्लेशियर रेंज में लीती, धाकुड़ी में क्रू स्टेशन बनाए गए हैं। वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार क्रू स्टेशनों की संख्या आवश्यकतानुसार घटाई बढ़ाई जा सकती है।
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वन महकमे में कार्मिकों की कमी बनेगी वनाग्नि नियंत्रण में बाधा
बागेश्वर। वन विभाग में अधिकारी, कर्मचारियों की भारी कमी है। 203 पदों के सापेक्ष 127 ही कार्यरत हैं। 79 पद रिक्त हैं।
प्रभागीय वनाधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार उप वन संरक्षक के स्वीकृत पद पर तैनाती है। सहायक वन संरक्षक के दोनों पद रिक्त हैं। वन क्षेत्राधिकारी के सभी पांच पदों पर तैनाती है। उपराजिक के आठ पदों में से तीन रिक्त हैं। वन दरोगा के 62 पदों में से 18 पद रिक्त हैं। वन रक्षकों के 68 पदों में से 43 पद रिक्त हैं। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी का पद रिक्त है। प्रधान सहायक, वरिष्ठ सहायक, कनिष्ठ सहायक का एक-एक पद खाली चल रहा है। लेखाकार, सहायक लेखाकार, सहायक संख्याधिकारी का पद रिक्त है। चालक के चार पदों में से दो ही पर नियुक्ति है। चौकीदार का एक और अर्दली के 5 पदों से दो पद रिक्त हैं। प्रभागीय वनाधिकारी बीएस शाही के अनुसार प्रत्येक माह रिक्त पदों की जानकारी वन संरक्षक को भेजी जाती है।
इस बार शीतकाल में वनाग्नि की 28 घटनाएं
बागेश्वर। पिछले अग्निकाल में बागेश्वर जिले में जंगल में आग लगने की मात्र चार घटनाएं हुई। इन चार घटनाओं में 5.25 हेक्टेयर क्षेत्रफल में जंगल जले। वहीं शीतकाल में अक्तूबर से अब तक जंगलों में आग लगने की 28 घटनाएं हो चुकी हैं। 47.77 हेक्टेयर क्षेत्रफल प्रभावित हुआ है। वहीं पिछले पांच साल में शीतकाल में जंगलों में आग लगने की घटना सामने नहीं आई। वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2016 में अग्निकाल में वनाग्नि की 55 घटनाओं में 219.35 हेक्टेयर, वर्ष 2017 में 44 घटनाओं में 88.30 हेक्टेयर, 2018 में 130 घटनाओं में 297.25 हेक्टेयर, वर्ष 2019 में 120 आग की घटनाओं में 184.17 हेक्टेयर क्षेत्रफल प्रभावित हुआ।

सरपंचों को आग से बचाने के तरीके बताए
कपकोट (बागेश्वर)। कपकोट रेंज कार्यालय परिसर में वनाग्नि सुरक्षा सप्ताह मनाया गया। इसमें सरपंचों को वनों को आग से बचाने के तरीके बताए गए। साथ ही असामाजिक तत्वों की निगरानी करने को कहा गया। इस दौरान हुई बैठक में वन विभाग के अधिकारियों ने सरपंचों को वनों में लगने वाली आग पर नियंत्रण करने की जानकारी दी। वन क्षेत्राधिकारी एसडी कांडपाल ने कहा कि सर्दियों में भी वनों में आग लगना चिंता का विषय है। कहा कि यदि कोई वनों में आग डालते हुए पकड़ा जाता है, तो इसकी सुचना तत्काल रेंज कार्यालय को दें। अधिकारियों ने सरपंचों को वनों की देखरेख करने के निर्देश दिए हैं। ताकि वनों को आग से बचाया जा सके। बैठक में वन क्षेत्राधिकारी ग्लेशियर विजय मेलकानी, वन दरोगा चंदन सिंह टंगड़िया, वन रक्षक प्रताप कांडपाल, सरपंच जगन्नाथ पांडे, तनुजा कोरंगा, कमला देवी आदि मौजूद थे।
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