{"_id":"600096238ebc3e2ecf239bfe","slug":"corona-could-not-stop-believers-in-uttarayani-bageshwar-news-hld411184021","type":"story","status":"publish","title_hn":"उत्तरायणी में आस्थावानों को नहीं रोक पाया कोरोना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उत्तरायणी में आस्थावानों को नहीं रोक पाया कोरोना
विज्ञापन
बागेश्वर के सरयू बगड़ में मकर संक्रांति पर सूरजकुंड में यज्ञोपवीत संस्कार कराने को उमड़ी भीड़। ?
- फोटो : BAGESHWAR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बागेश्वर। मकर संक्राति पर लगने वाले उत्तरायणी मेले में आस्थावानों को कोरोना भी नहीं रोक पाया। सरयू स्नान को जिले के बाहर से भी श्रद्धालु पहुंचे। बागनाथ मंदिर में सुबह चार बजे से ही पूजा को कतार लगनी शुरू हो गई। सूरजकुंड में यज्ञोपवीत संस्कार कराने को भी भारी भीड़ उमड़ी।
कोरोना संक्रमण के बढ़ने का अंदेशा देखते हुए प्रशासन ने उत्तरायणी मेले का स्वरूप घटाते हुए केवल धार्मिक अनुष्ठान कराने की छूट प्रदान की थी, हालांकि मेले में उमड़ी भीड़ पर इसका असर होता नहीं दिखा। सरयू स्नान, त्रिमाघी पूजा करने वाले श्रद्धालु महामारी से भयभीत नहीं दिखे। रात को ही दूर दराज के गांवों से स्नानार्थी पहुंचने शुरु हो गए थे। सुबह उजाला होने से पहले ही सरयू नदी तट पर स्नान करने वाले एकत्र होने लगे। श्रद्धालुओं ने बाबा बागनाथ की विधिवत पूजा अर्चना की। मंदिर में चावल, खिचड़ी, तिल का दान किया। कोरोना काल से मंदिर में पूजा अर्चना कम होने से परेेशान पुरोहितों को भी इससे राहत मिली। पूजा-पाठ को आए लोगों की भारी संख्या को देखकर पंडितों के चेहरों पर भी रौनक रही। बागनाथ मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष नंदन सिंह रावल ने बताया कि उत्तरायणी में हर साल की तरह भक्तों ने बाबा के दर पर आकर पूजा अर्चना की। माघ के पावन महीने के शुभारंभ पर स्नान, दान कर पुण्य अर्जन किया।
त्रिमाघी पूजा का है विशेष महत्व
बागेश्वर। मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश करते हैं। इस दिन से धार्मिक कार्यों की शुरूआत मानी जाती है। माघ के पहले तीन दिनों में सरयू स्नान, शिव पूजा और उपवास का विशेष महत्व माना गया है। तीन दिनों के इस अनुष्ठान को त्रिमाघी के नाम से जाना जाता है। (संवाद)
विज्ञापन
सूरजकुंड में हुए यज्ञोपवीत संस्कार
बागेश्वर। मकर संक्राति को सूरजकुंड में यज्ञोपवीत संस्कार कराने के लिए भी विभिन्न गांवों व जिलों के लोग पहुंचे। सरयू नदी के तट पर बटुकों का मुंडन संस्कार कराया गया। उन्हें अनुशासित और आदर्श जीवन के मंत्र दिए गए। हर साल की तरह इस साल भी कोरोना के बावजूद अच्छी संख्या में बटुकों का जनेऊ संस्कार कराया गया। पंडित गणेश दत्त तिवारी ने बताया कि सरयू नदी को पापमोचनी माना गया है। सरयू तट पर यज्ञोपवीत संस्कार कराना बेहद शुभ माना जाता है। सालों से मकर संक्रांति पर लोग अपने पुत्रों की जनेऊ कराने यहां आते रहे हैं। इस स्थल की महत्ता जिले के बाहर भी है। इस साल भी अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, चमोली जिलों से लोग बटुकों का यज्ञोपवीत संस्कार कराने को यहां पहुंचे थे। (संवाद)
हिंदू जागरण ने बांटी चुड़कन चाय
बागेश्वर। सरयू स्नान को आने वाले स्नानार्थियों को ठंड से बचाने के लिए हिंदू जागरण मंच ने चुड़कन (गरम) चाय का प्रबंध किया। मंच के जिलाध्यक्ष मनीष पांडेय ने बताया कि हर साल जागरण की रात से स्नान चलने तक संगठन लोगों को चाय पिलाता आया है। इस साल भी यह परंपरा बरकरार रही। स्नान करने आए लोगों ने भी जमकर चाय की चुस्कियां ली और आयोजकों की सराहना की। (संवाद)
माघी खिचड़ी का भी हुआ वितरण
बागेश्वर। हिजामं की ओर से दिन के समय माघी खिचड़ी का आयोजन भी किया गया। मेलार्थियों ने धार्मिक अनुष्ठानों के बाद खिचड़ी का स्वाद लिया। मंच के प्रदेश उपाध्यक्ष हरीश सोनी ने बताया कि माघ मास में खिचड़ी खाने का भी महत्व बताया गया है। मेले के दौरान खिचड़ी कार्यक्रम से दूरदराज के गांवों से आए मेलार्थियों को राहत मिलती है। (संवाद)
उम्मीद से अधिक रही भीड़
बागेश्वर। मकर संक्रांति पर धार्मिक अनुष्ठान कराने को भारी संख्या में लोगों के उमड़ने से बाजार, सरयू तट और बागनाथ मंदिर में उम्मीद से अधिक भीड़ देखने को मिली। नदी में स्नान, मंदिर में पूजा और सूरजकुंड में जनेऊ कराने वालों की काफी भीड़ थी। मंदिर में पूजा करने के लिए लोगों को लंबा इंतजार तक करना पड़ा। (संवाद)
फोटो 14 बीजीएस 15 और 17 पी
जलेबी, मिठाई की जमकर हुई बिक्री
बागेश्वर। उत्तरायणी मेले के पहले दिन मेलार्थियों के उमड़ने से व्यापारियों के चेहरों पर रौनक रही। मिठाई, जलेबी, फलों की अच्छी बिक्री हुई। पूजा सामग्री के कारोबार में भी तेजी देखने को मिली। (संवाद)
अलाव सेककर काटी रात
बागेश्वर। सरयू स्नान के लिए दूर के गांवों से आए लोगों ने अलाव के सहारे रात काटी। अन्य सालों में नुमाइशखेत मैदान के मुख्य मंच से सुबह चार बजे तक जागराता कार्यक्रम होता था। लोग रात भर भजन कलाकारों की प्रस्तुति का आनंद लेते थे। इस साल उन्हें अलाव के सहारे रात काटनी पड़ी। प्रशासन की ओर से सरयू बगड़ सहित नगर के विभिन्न स्थानों पर अलाव का प्रबंध किया गया है।(संवाद)
विज्ञापन
कोरोना संक्रमण के बढ़ने का अंदेशा देखते हुए प्रशासन ने उत्तरायणी मेले का स्वरूप घटाते हुए केवल धार्मिक अनुष्ठान कराने की छूट प्रदान की थी, हालांकि मेले में उमड़ी भीड़ पर इसका असर होता नहीं दिखा। सरयू स्नान, त्रिमाघी पूजा करने वाले श्रद्धालु महामारी से भयभीत नहीं दिखे। रात को ही दूर दराज के गांवों से स्नानार्थी पहुंचने शुरु हो गए थे। सुबह उजाला होने से पहले ही सरयू नदी तट पर स्नान करने वाले एकत्र होने लगे। श्रद्धालुओं ने बाबा बागनाथ की विधिवत पूजा अर्चना की। मंदिर में चावल, खिचड़ी, तिल का दान किया। कोरोना काल से मंदिर में पूजा अर्चना कम होने से परेेशान पुरोहितों को भी इससे राहत मिली। पूजा-पाठ को आए लोगों की भारी संख्या को देखकर पंडितों के चेहरों पर भी रौनक रही। बागनाथ मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष नंदन सिंह रावल ने बताया कि उत्तरायणी में हर साल की तरह भक्तों ने बाबा के दर पर आकर पूजा अर्चना की। माघ के पावन महीने के शुभारंभ पर स्नान, दान कर पुण्य अर्जन किया।
विज्ञापन
त्रिमाघी पूजा का है विशेष महत्व
बागेश्वर। मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश करते हैं। इस दिन से धार्मिक कार्यों की शुरूआत मानी जाती है। माघ के पहले तीन दिनों में सरयू स्नान, शिव पूजा और उपवास का विशेष महत्व माना गया है। तीन दिनों के इस अनुष्ठान को त्रिमाघी के नाम से जाना जाता है। (संवाद)
विज्ञापन
सूरजकुंड में हुए यज्ञोपवीत संस्कार
बागेश्वर। मकर संक्राति को सूरजकुंड में यज्ञोपवीत संस्कार कराने के लिए भी विभिन्न गांवों व जिलों के लोग पहुंचे। सरयू नदी के तट पर बटुकों का मुंडन संस्कार कराया गया। उन्हें अनुशासित और आदर्श जीवन के मंत्र दिए गए। हर साल की तरह इस साल भी कोरोना के बावजूद अच्छी संख्या में बटुकों का जनेऊ संस्कार कराया गया। पंडित गणेश दत्त तिवारी ने बताया कि सरयू नदी को पापमोचनी माना गया है। सरयू तट पर यज्ञोपवीत संस्कार कराना बेहद शुभ माना जाता है। सालों से मकर संक्रांति पर लोग अपने पुत्रों की जनेऊ कराने यहां आते रहे हैं। इस स्थल की महत्ता जिले के बाहर भी है। इस साल भी अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, चमोली जिलों से लोग बटुकों का यज्ञोपवीत संस्कार कराने को यहां पहुंचे थे। (संवाद)
हिंदू जागरण ने बांटी चुड़कन चाय
बागेश्वर। सरयू स्नान को आने वाले स्नानार्थियों को ठंड से बचाने के लिए हिंदू जागरण मंच ने चुड़कन (गरम) चाय का प्रबंध किया। मंच के जिलाध्यक्ष मनीष पांडेय ने बताया कि हर साल जागरण की रात से स्नान चलने तक संगठन लोगों को चाय पिलाता आया है। इस साल भी यह परंपरा बरकरार रही। स्नान करने आए लोगों ने भी जमकर चाय की चुस्कियां ली और आयोजकों की सराहना की। (संवाद)
माघी खिचड़ी का भी हुआ वितरण
बागेश्वर। हिजामं की ओर से दिन के समय माघी खिचड़ी का आयोजन भी किया गया। मेलार्थियों ने धार्मिक अनुष्ठानों के बाद खिचड़ी का स्वाद लिया। मंच के प्रदेश उपाध्यक्ष हरीश सोनी ने बताया कि माघ मास में खिचड़ी खाने का भी महत्व बताया गया है। मेले के दौरान खिचड़ी कार्यक्रम से दूरदराज के गांवों से आए मेलार्थियों को राहत मिलती है। (संवाद)
उम्मीद से अधिक रही भीड़
बागेश्वर। मकर संक्रांति पर धार्मिक अनुष्ठान कराने को भारी संख्या में लोगों के उमड़ने से बाजार, सरयू तट और बागनाथ मंदिर में उम्मीद से अधिक भीड़ देखने को मिली। नदी में स्नान, मंदिर में पूजा और सूरजकुंड में जनेऊ कराने वालों की काफी भीड़ थी। मंदिर में पूजा करने के लिए लोगों को लंबा इंतजार तक करना पड़ा। (संवाद)
फोटो 14 बीजीएस 15 और 17 पी
जलेबी, मिठाई की जमकर हुई बिक्री
बागेश्वर। उत्तरायणी मेले के पहले दिन मेलार्थियों के उमड़ने से व्यापारियों के चेहरों पर रौनक रही। मिठाई, जलेबी, फलों की अच्छी बिक्री हुई। पूजा सामग्री के कारोबार में भी तेजी देखने को मिली। (संवाद)
अलाव सेककर काटी रात
बागेश्वर। सरयू स्नान के लिए दूर के गांवों से आए लोगों ने अलाव के सहारे रात काटी। अन्य सालों में नुमाइशखेत मैदान के मुख्य मंच से सुबह चार बजे तक जागराता कार्यक्रम होता था। लोग रात भर भजन कलाकारों की प्रस्तुति का आनंद लेते थे। इस साल उन्हें अलाव के सहारे रात काटनी पड़ी। प्रशासन की ओर से सरयू बगड़ सहित नगर के विभिन्न स्थानों पर अलाव का प्रबंध किया गया है।(संवाद)

बागेश्वर के सूरजकुंड में मकर संक्रांति पर जनेऊ संस्कार के दौरान मुंडन कराता बटुक। संवाद न्यूज ए?- फोटो : BAGESHWAR

बागेश्वर के सरयू बगड़ में मेलार्थियों को माघी खिचड़ी खिलाते हिजामं कार्यकर्ता। संवाद न्यूज एजे?- फोटो : BAGESHWAR