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बरसात आते ही उड़ जाती है नींद
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर
Updated Tue, 23 Jun 2015 12:06 AM IST
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आपदा प्रभावित क्षेत्र में बाढ़ सुुरक्षा के कोई उपाय नहीं किए गए। खड़िया खदान स्थलों पर बने गड्ढों से भी खतरा बढ़ गया है। बरसात शुरू होते ही आपदा प्रभावित क्षेत्र के लोगों की रात की नींद और दिन का चैन छिन गया है।
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यह जिला बाढ़, भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील है, वहीं भूकंप की दृष्टि से यह जोन पांच में आता है। बाढ़, भूस्खलन की दृष्टि से कपकोट ब्लाक के सरयू, पिंडर, रेवती, रामगंगा, कनलगढ़, महरगाड़, पुंगर घाटी, बागेश्वर ब्लाक के कुलूर, जैगनगाड़, लाहुर घाटी के गांव सर्वाधिक संवेदनशील हैं।
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इन गांवों में हर साल प्रकृति अपना कहर ढाती है। सरयूू, गोमती, गरुड़, पुंगर, कनगलगढ़ नदी के किनारे बसे गांवों की सैकड़ों नाली जमीन बाढ़ में बह जाती है। सरयू, खीरगंगा, रेवती के किनारे बाढ़ सुरक्षा कार्यक्रम के तहत 20 करोड़ के काम चल रहे हैं, लेकिन इन नदियों के किनारे बसे गोलना, दुलम आदि गांवों में बाढ़ से सुरक्षा नहीं हो सकी है।
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चिरपतकोट की पहाड़ी से दो साल पहले हुए भूस्खलन के कारण परमटी गांव में भारी तबाही मची थी। वहां निकास नाली के अलावा कुछ नहीं किया गया। इस गांव को सरयू, गांसू नदी भी काट रही है।
दुलम गांव के भगवाखेत में बेतरीब ढंग से भूस्खलन हो रहा है, वहां अनुसूचित जाति के 10 परिवार खतरे की जद में हैं। उधर खड़िया खदान इलाकों में खान मालिकों ने गड्ढोें का भरान नहीं किया है। जिससे आसपास के गांवों में खतरा बना है।
जिले में सोराग, कालो, किलपारा, कुंवारी, कर्मी, बघर डाना, पोथिंग, गोगिना, रिखाड़ी, चौड़ा, रिखाड़ी, चचई, लाथी, चुचेर, गोगिना, रमाड़ी आदि 48 से भी अधिक गांव बाढ़, भूस्खलन की दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील हैं।
आपदा से इन गांवों में हर साल नुकसान होता आ रहा है। इनमें कुंवारी गांव के करीब 81 परिवार और चेवाबगड़ के तीन परिवारों का इसी गांव के सुरक्षित स्थान पर विस्थापन हो चुका है, लेकिन अन्य परिवारों का विस्थापन नहीं हो सका है।
विधायक ललित फर्स्वाण ने बताया कि सरयू, पिंडर, रेवती, खीरगंगा के किनारे बसे गांवों में हुई क्षति की भरपाई के लिए दैवी आपदा प्रबंधन मद से करोड़ों रुपये के काम चल रहे हैं। शासन दैवी आपदा से हुई भरपाई करने के लिए सक्रियता से काम कर रहा है।
डीएम भूपाल सिंह मनराल ने बताया कि विस्थापन वाले गांवों की सूची शासन को भेजी गई है। शासन के निर्देश पर ही विस्थापन की कार्रवाई होगी।