{"_id":"63ea7ef1938673e8b20cca66","slug":"civic-aminities-bageshwar-news-hld490729474-2023-02-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"बागेश्वर: वंचित स्वयंसेवकों का सत्यापन कराने की मांग के लिए कलक्ट्रेट में गरजे गुरिल्ले","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बागेश्वर: वंचित स्वयंसेवकों का सत्यापन कराने की मांग के लिए कलक्ट्रेट में गरजे गुरिल्ले
विज्ञापन
बागेश्वर के डीएम कार्यालय परिसर में प्रदर्शन करते गुरिल्ला संगठन के सदस्य। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : BAGESHWAR
बागेेश्वर। बागेश्वर जिले के करीब तीन सौ गुरिल्लों के सत्यापन से वंचित होने के विरोध में गुरिल्लों ने सोमवार को कलक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। डीएम को दिए ज्ञापन में वंचित गुरिल्लों का सत्यापन कराने की मांग की गई।
सोमवार के एसएसबी स्वयंसेवक कल्याण समिति के जिला संयोजक विशन दत्त भट्ट के नेतृत्व में कलेक्टर पहुंचे स्वयंसेवकों ने वंचित गुरिल्लों का सत्यापन कराने के लिए नारेबाजी की। प्रधानमंत्री, गृह मंत्रालय, एसएसबी मुख्यालय दिल्ली, मुख्यमंत्री को डीएम के माध्यम से भेजे ज्ञापन में कहा कि वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद उपजी परिस्थितियों के बाद एसएसबी का गठन किया गया। शुरूआत से स्वयंसेवक बल के साथ जुड़े रहे। गुरिल्लों को समय.समय पर युद्धाभ्यास कराया जाता था। एक निश्चित मानदेय दिया जाता था।
वर्ष 2001 में एसएसबी को पैरा मिलिट्री फोर्स का दर्जा देने के साथ गुरिल्लों की भूमिका को समाप्त कर दिया गया। हाईकोर्ट के समायोजन के आदेश के बाद गुरिल्लों का सत्यापन किया जा रहा है लेकिन जिले के तीन सौ गुरिल्लों का सत्यापन सूची में नाम नहीं है। इन लोगों ने वंचित स्वयंसेवकों का सत्यापन कराने की मांग की है। वहां जिला सचिव ममता कांडपाल, उमेद सिंह नेगी, रमेश प्रसाद, चंद्र राम, कमला देवी आदि थे।
विज्ञापन
डीएम अनुराधा पाल ने बताया कि एसएसबी के स्वयंसेवकों के सत्यापन से वंचित रहने का मामला सामने आया है। इस मामले में एसएसबी महानिदेशालय से पत्राचार किया जाएगा।
विज्ञापन
सोमवार के एसएसबी स्वयंसेवक कल्याण समिति के जिला संयोजक विशन दत्त भट्ट के नेतृत्व में कलेक्टर पहुंचे स्वयंसेवकों ने वंचित गुरिल्लों का सत्यापन कराने के लिए नारेबाजी की। प्रधानमंत्री, गृह मंत्रालय, एसएसबी मुख्यालय दिल्ली, मुख्यमंत्री को डीएम के माध्यम से भेजे ज्ञापन में कहा कि वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद उपजी परिस्थितियों के बाद एसएसबी का गठन किया गया। शुरूआत से स्वयंसेवक बल के साथ जुड़े रहे। गुरिल्लों को समय.समय पर युद्धाभ्यास कराया जाता था। एक निश्चित मानदेय दिया जाता था।
विज्ञापन
वर्ष 2001 में एसएसबी को पैरा मिलिट्री फोर्स का दर्जा देने के साथ गुरिल्लों की भूमिका को समाप्त कर दिया गया। हाईकोर्ट के समायोजन के आदेश के बाद गुरिल्लों का सत्यापन किया जा रहा है लेकिन जिले के तीन सौ गुरिल्लों का सत्यापन सूची में नाम नहीं है। इन लोगों ने वंचित स्वयंसेवकों का सत्यापन कराने की मांग की है। वहां जिला सचिव ममता कांडपाल, उमेद सिंह नेगी, रमेश प्रसाद, चंद्र राम, कमला देवी आदि थे।
विज्ञापन
डीएम अनुराधा पाल ने बताया कि एसएसबी के स्वयंसेवकों के सत्यापन से वंचित रहने का मामला सामने आया है। इस मामले में एसएसबी महानिदेशालय से पत्राचार किया जाएगा।