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एक जिला दो उत्पाद से लगेंगे ताम्र उद्योग और मडुवा को पंख
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बागेश्वर में ताम्र उत्पाद बेचते खरही पट्टी के प्रमुख ताम्र उत्पादक सुंदर लाल। संवाद न्यूज एजेंस
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। राज्य सरकार ने इस बार एक जिला दो उत्पाद में मडुवा के बिस्कुट और ताम्र उद्योग का चयन किया है। जिले के खरही क्षेत्र में तांबे का कारोबार किया जाता है। जो सिमटते जा रहा है।
कपकोट के लोहारखेत में मंडुवे के बिस्कुट बनाए जाते हैं। बिस्कुट दिल्ली, राजस्थान, लखनऊ, देहरादून आदि महानगरों में बेचे जाते थे। लॉकडाउन के बाद से मडुवे के बिस्कुट का कारोबार भी चौपट है। एक जिला एक उत्पाद में चयनित होने के बाद मडुवा और तांबे के कारोबार को पंख लगने की उम्मीद है।
जिले का खरही क्षेत्र ताम्र उद्योग के लिए प्रसिद्ध था। उचित प्रोत्साहन न मिलने से पिछले दो दशक से ताम्र उद्योग को जबरदस्त झटका लगा है। अब चौगांवछीना गांव के साथ ही आसपास के गांवों के मात्र 5-6 लोग ताम्र उद्योग के धंधे से जुड़े हुए हैं। सरकार ने ताम्र उद्योग को एक जिला दो उत्पाद में शामिल किया है, इससे ताम्र उद्यमियों को कुछ राहत मिल सकती है।
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कपकोट के लोहारखेत में मां चिल्ठा स्वायत्त सहकारिता वर्ष 2014-15 से मडुवे के बिस्कुट बना रही है। सहकारिता की सचिव बसंती देवी बतातीं हैं कि लाकडाउन से पहले मडुवे के बिस्कुट दिल्ली, जयपुर, गुजरात, लखनऊ के साथ देहरादून में बिकते थे।
आंगनबाड़ी में भी उत्पादों की आपूर्ति होती थी। लॉॅकडाउन के बाद धंधा चौपट है। स्थानीय स्तर पर काफी कम बिस्कुट बिक पाते हैं। सरकार बिस्कुट बिकवाने में मदद करेगी तो सहकारिता से जुड़ी महिलाओं को निश्चित रूप से लाभ होगा।
ताम्र उद्योग को प्रोत्साहन देने के लिए चौगांवछीना में ग्रोथ सेंटर को मंजूरी मिल गई है। जल्द ही इसकी स्थापना की जाएगी। जिला उद्योग केंद्र में सामान्य सुविधा केंद्र खोला गया है। वहां तांबे की प्रोसेसिंग मशीन लगाई गई हैं। इसका लाभ ताम्र उद्यमियों को मिल रहा है। एक जिला दो उत्पाद में ताम्र उद्योग शामिल होने से निश्चित रूप से तांबे के कारोबारियों को लाभ होगा।
जीपी दुर्गापाल महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र बागेश्वर।
ताम्र उत्पाद लेकर बागेश्वर पहुंचे सुंदर लाल
बागेश्वर। खरही क्षेत्र के प्रमुख ताम्र शिल्पी सुंदर लाल ने दिवाली में बागेश्वर नगर में ताम्र उत्पाद बेच रहे हैं। सुंदर लाल का कहना है कि एक जिला दो उत्पाद में ताम्र उद्योग को शामिल करना अच्छा है, लेकिन ताम्र उद्योग को बढ़ावा देने के लिए धरातल पर कार्य करना होगा। ताम्र शिल्पियों की मदद के लिए सरकार को आगे आना होगा।
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कपकोट के लोहारखेत में मंडुवे के बिस्कुट बनाए जाते हैं। बिस्कुट दिल्ली, राजस्थान, लखनऊ, देहरादून आदि महानगरों में बेचे जाते थे। लॉकडाउन के बाद से मडुवे के बिस्कुट का कारोबार भी चौपट है। एक जिला एक उत्पाद में चयनित होने के बाद मडुवा और तांबे के कारोबार को पंख लगने की उम्मीद है।
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जिले का खरही क्षेत्र ताम्र उद्योग के लिए प्रसिद्ध था। उचित प्रोत्साहन न मिलने से पिछले दो दशक से ताम्र उद्योग को जबरदस्त झटका लगा है। अब चौगांवछीना गांव के साथ ही आसपास के गांवों के मात्र 5-6 लोग ताम्र उद्योग के धंधे से जुड़े हुए हैं। सरकार ने ताम्र उद्योग को एक जिला दो उत्पाद में शामिल किया है, इससे ताम्र उद्यमियों को कुछ राहत मिल सकती है।
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कपकोट के लोहारखेत में मां चिल्ठा स्वायत्त सहकारिता वर्ष 2014-15 से मडुवे के बिस्कुट बना रही है। सहकारिता की सचिव बसंती देवी बतातीं हैं कि लाकडाउन से पहले मडुवे के बिस्कुट दिल्ली, जयपुर, गुजरात, लखनऊ के साथ देहरादून में बिकते थे।
आंगनबाड़ी में भी उत्पादों की आपूर्ति होती थी। लॉॅकडाउन के बाद धंधा चौपट है। स्थानीय स्तर पर काफी कम बिस्कुट बिक पाते हैं। सरकार बिस्कुट बिकवाने में मदद करेगी तो सहकारिता से जुड़ी महिलाओं को निश्चित रूप से लाभ होगा।
ताम्र उद्योग को प्रोत्साहन देने के लिए चौगांवछीना में ग्रोथ सेंटर को मंजूरी मिल गई है। जल्द ही इसकी स्थापना की जाएगी। जिला उद्योग केंद्र में सामान्य सुविधा केंद्र खोला गया है। वहां तांबे की प्रोसेसिंग मशीन लगाई गई हैं। इसका लाभ ताम्र उद्यमियों को मिल रहा है। एक जिला दो उत्पाद में ताम्र उद्योग शामिल होने से निश्चित रूप से तांबे के कारोबारियों को लाभ होगा।
जीपी दुर्गापाल महाप्रबंधक जिला उद्योग केंद्र बागेश्वर।
ताम्र उत्पाद लेकर बागेश्वर पहुंचे सुंदर लाल
बागेश्वर। खरही क्षेत्र के प्रमुख ताम्र शिल्पी सुंदर लाल ने दिवाली में बागेश्वर नगर में ताम्र उत्पाद बेच रहे हैं। सुंदर लाल का कहना है कि एक जिला दो उत्पाद में ताम्र उद्योग को शामिल करना अच्छा है, लेकिन ताम्र उद्योग को बढ़ावा देने के लिए धरातल पर कार्य करना होगा। ताम्र शिल्पियों की मदद के लिए सरकार को आगे आना होगा।