{"_id":"5f7377058ebc3e9b8817508b","slug":"biscuts-of-munar-kapkot-bageshwar-news-hld3987143159","type":"story","status":"publish","title_hn":"मुनार के मडवे के बिस्कुट, चौलाई के लड्डुओं की दिल्ली, देहरादून में फिर धमक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मुनार के मडवे के बिस्कुट, चौलाई के लड्डुओं की दिल्ली, देहरादून में फिर धमक
विज्ञापन
बागेश्वर। मां चिल्ठा आजीविका स्वायत्त सहकारिता मुनार (कपकोट) के मडुवा, चौलाई और मक्के के बिस्कुट दिल्ली, देहरादून और देश के अन्य शहरों में लोगों तक पहुंचने लगे हैं। लॉकडाउन के दौरान इन उत्पादों की आपूर्ति प्रभावित हो गई थी।
आजीविका परियोजना के तहत वर्ष 2017 में मुनार में स्वायत्त सहकारिता का गठन किया गया। सहकारिता में मडुवे के बिस्कुटों के साथ ही नमकीन तैयार होते हैं। मडुवा के क्रीमरोल, चौलाई के लड्डू खासे पसंद किए जाते हैं। महिलाओं द्वारा तैयार बिस्कुटों की ट्राइफेड देहरादून के माध्यम से देश के विभिन्न राज्यों में आपूर्ति की जाती है। लॉकडाउन के दौरान बाजार बंद रहने से बिस्कुटों की आपूर्ति नहीं हो पाई लेकिन महिलाओं ने इसका भी तोड़ निकाल लिया। सहकारिता से जुड़े आजीविका के हरीश पंडा बताते हैं कि उस दौर में महिलाओं ने मडुवे से बने क्रीमरोल और बंद बिस्कुट स्थानीय बाजारों में बेचकर आजीविका को प्रभावित नहीं होने दिया। स्वायत्त सहकारिता से कपकोट के 20 गांवों के 84 महिला स्वयं सहायता समूहों की 924 महिलाएं जुड़ीं हैं।
महिला समूहों से खरीदे जाते हैं मडुवा और चौलाई
बागेश्वर। स्वायत्त सहकारिता में बने बिस्कुटों से जहां महिलाएं रोजगार चला रही हैं, वहीं खेतों में मडुवा और चौलाई का उत्पादन कर आर्थिक समृद्धि की ओर बढ़ रही हैं। परियोजना प्रबंधक आजीविका धर्मेंद्र पांडेय बताते हैं कि सहकारिता से जुड़े महिला समूह मडुवा, चौलाई का उत्पादन करते हैं। सहकारिता महिला समूहों से 22 रुपये किलो मडुवा और 40 रुपया किलो चौलाई खरीदती है। इससे मोटा अनाज माने जाने वाले मडुवा और चौलाई की खेती को भी प्रोत्साहन मिल रहा है।
विज्ञापन
बिस्कुट की कीमत
मडुवा, मक्का और चौलाई के बिस्कुट 180 रुपये किलो बेचे जाते हैं। बिस्कुट 250 ग्राम के पैक में उपलब्ध हैं।
विज्ञापन
आजीविका परियोजना के तहत वर्ष 2017 में मुनार में स्वायत्त सहकारिता का गठन किया गया। सहकारिता में मडुवे के बिस्कुटों के साथ ही नमकीन तैयार होते हैं। मडुवा के क्रीमरोल, चौलाई के लड्डू खासे पसंद किए जाते हैं। महिलाओं द्वारा तैयार बिस्कुटों की ट्राइफेड देहरादून के माध्यम से देश के विभिन्न राज्यों में आपूर्ति की जाती है। लॉकडाउन के दौरान बाजार बंद रहने से बिस्कुटों की आपूर्ति नहीं हो पाई लेकिन महिलाओं ने इसका भी तोड़ निकाल लिया। सहकारिता से जुड़े आजीविका के हरीश पंडा बताते हैं कि उस दौर में महिलाओं ने मडुवे से बने क्रीमरोल और बंद बिस्कुट स्थानीय बाजारों में बेचकर आजीविका को प्रभावित नहीं होने दिया। स्वायत्त सहकारिता से कपकोट के 20 गांवों के 84 महिला स्वयं सहायता समूहों की 924 महिलाएं जुड़ीं हैं।
विज्ञापन
महिला समूहों से खरीदे जाते हैं मडुवा और चौलाई
बागेश्वर। स्वायत्त सहकारिता में बने बिस्कुटों से जहां महिलाएं रोजगार चला रही हैं, वहीं खेतों में मडुवा और चौलाई का उत्पादन कर आर्थिक समृद्धि की ओर बढ़ रही हैं। परियोजना प्रबंधक आजीविका धर्मेंद्र पांडेय बताते हैं कि सहकारिता से जुड़े महिला समूह मडुवा, चौलाई का उत्पादन करते हैं। सहकारिता महिला समूहों से 22 रुपये किलो मडुवा और 40 रुपया किलो चौलाई खरीदती है। इससे मोटा अनाज माने जाने वाले मडुवा और चौलाई की खेती को भी प्रोत्साहन मिल रहा है।
विज्ञापन
बिस्कुट की कीमत
मडुवा, मक्का और चौलाई के बिस्कुट 180 रुपये किलो बेचे जाते हैं। बिस्कुट 250 ग्राम के पैक में उपलब्ध हैं।