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खुद बीमार है बागेश्वर का जिला अस्पताल
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बागेश्वर जिला अस्पताल।
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। जिला मुख्यालय समेत कई गांवों की सेहत का जिम्मा संभाले बागेश्वर का जिला अस्पताल इन दिनों खुद बीमार पड़ा हुआ है। यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों के आठ पद लंबे समय से खाली पड़े हुए हैं। डॉक्टरों की कमी के चलते छोटी मोटी बीमारी के उपचार के लिए बाहर जाना लोगों की मजबूरी बना हुआ है।
बागेश्वर के जिला अस्पताल में जिला मुख्यालय के अलावा बदियाकोट, कर्मी, वाछम, पिंडारी, खातीगांव, थराली, देवायल, ग्वालदम, सानीउडियार, धरमधर, रीमा पचार, काफलीगैर, बोहाला, पालड़ीछीना, चौगांवछीना, कठपुडिय़ाछीना, खरही, कौसानी, गागरीगोल, डंगोली, धारी, डोबा, लेटी आदि गांवों के लोग उपचार के लिए आते हैं। लेकिन इस अस्पताल में डाक्टरों के स्वीकृत 21 पदों में से यूरोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट, कार्डियोलॉजिस्ट, चर्म रोग विशेषज्ञ, ईएनटी सर्जन, साइकियाटिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट, डेंटल सर्जन के पद लंबे समय से खाली हैं। जिसके चलते लोगों को बेहतर उपचार नहीं मिल पा रहा है। उन्हें छोटी मोटी बीमारियों के उपचार के लिए भी बाहर जाना पड़ रहा है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के चलते गंभीर रोगियों को हायर सेंटर रेफर करना अस्पताल प्रशासन की मजबूरी बना हुआ है। हायर सेंटर दूर होने के कारण मरीज और तीमारदार को काफी दिक्कतें उठानी पड़ती हैं।
सफेद हाथी बना ट्रामा सेंटर
बागेश्वर। यहां स्थित ट्रामा सेंटर भी मरीजों के लिए सफेद हाथी बनकर रह गया है। ट्रामा सेंटर में सर्जन, रेडियॉलिस्ट, निश्चेतक, ईएमओ के एक-एक, ऑर्थोपैडिक सर्जन के दो पद खाली हैं। यहां निश्चेतक न होने से बड़े ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। बड़े ऑपरेशन कराने के लिए रोगी को बाहर जाना पड़ रहा है। इसमें उनका काफी धन और समय बर्बाद हो रहा है। ऐसी स्थिति में मरीजों और तीमारदारों को भारी दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं।
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कोट
जिला अस्पताल में डॉक्टरों के खाली पदों की सूचना उच्चाधिकारियों को दी गई है। फिलहाल रिक्त पद भरे नहीं गए हैं। अस्पताल में निश्चेतक न होने से सिर्फ छोटे ऑपरेशन ही कर रहे हैं। बड़े ऑपरेशन करना संभव नहीं हो पा रहा है। - डॉ. एसपी त्रिपाठी, प्रभारी सीएमएस जिला अस्पताल बागेश्वर।
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बागेश्वर के जिला अस्पताल में जिला मुख्यालय के अलावा बदियाकोट, कर्मी, वाछम, पिंडारी, खातीगांव, थराली, देवायल, ग्वालदम, सानीउडियार, धरमधर, रीमा पचार, काफलीगैर, बोहाला, पालड़ीछीना, चौगांवछीना, कठपुडिय़ाछीना, खरही, कौसानी, गागरीगोल, डंगोली, धारी, डोबा, लेटी आदि गांवों के लोग उपचार के लिए आते हैं। लेकिन इस अस्पताल में डाक्टरों के स्वीकृत 21 पदों में से यूरोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट, कार्डियोलॉजिस्ट, चर्म रोग विशेषज्ञ, ईएनटी सर्जन, साइकियाटिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट, डेंटल सर्जन के पद लंबे समय से खाली हैं। जिसके चलते लोगों को बेहतर उपचार नहीं मिल पा रहा है। उन्हें छोटी मोटी बीमारियों के उपचार के लिए भी बाहर जाना पड़ रहा है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के चलते गंभीर रोगियों को हायर सेंटर रेफर करना अस्पताल प्रशासन की मजबूरी बना हुआ है। हायर सेंटर दूर होने के कारण मरीज और तीमारदार को काफी दिक्कतें उठानी पड़ती हैं।
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सफेद हाथी बना ट्रामा सेंटर
बागेश्वर। यहां स्थित ट्रामा सेंटर भी मरीजों के लिए सफेद हाथी बनकर रह गया है। ट्रामा सेंटर में सर्जन, रेडियॉलिस्ट, निश्चेतक, ईएमओ के एक-एक, ऑर्थोपैडिक सर्जन के दो पद खाली हैं। यहां निश्चेतक न होने से बड़े ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। बड़े ऑपरेशन कराने के लिए रोगी को बाहर जाना पड़ रहा है। इसमें उनका काफी धन और समय बर्बाद हो रहा है। ऐसी स्थिति में मरीजों और तीमारदारों को भारी दिक्कतें झेलनी पड़ती हैं।
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कोट
जिला अस्पताल में डॉक्टरों के खाली पदों की सूचना उच्चाधिकारियों को दी गई है। फिलहाल रिक्त पद भरे नहीं गए हैं। अस्पताल में निश्चेतक न होने से सिर्फ छोटे ऑपरेशन ही कर रहे हैं। बड़े ऑपरेशन करना संभव नहीं हो पा रहा है। - डॉ. एसपी त्रिपाठी, प्रभारी सीएमएस जिला अस्पताल बागेश्वर।