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बागेश्वर जिले के 48 गांवों पर मंडरा रहा आपदा का खतरा
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर।
Updated Sat, 18 Jun 2016 01:05 AM IST
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बागेश्वर। आपदा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील बागेश्वर जिले के 48 गांवों पर खतरा मंडरा रहा है। इनमें से सर्वाधिक 28 गांव कपकोट तहसील में शामिल हैं। शासन स्तर पर इन गांवों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। हालात यह हैं कि साल दर साल टूटती पहाड़ियां, जमीन को लीलती नदियां और जमींदोज होते मकानों का मंजर देखने वाली आंखों में बरसात की आहट से ही खौफ तैरने लगता है।
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बागेश्वर जिला भूकंप के जोन फाइव में आता है। पिछले एक दशक के भीतर हुई भूस्खलन की घटनाओं ने इस जिले की संवेदनशीलता को और अधिक बढ़ा दिया है। 2013 में आई आपदा के बाद जिले की बागेश्वर तहसील में सात, कपकोट में 28, गरुड़ में नौ, कांडा तहसील में तीन गांव खतरे की जद में हैं। सबसे अधिक खतरे में कपकोट तहसील है। यहां पर कुल 28 गांवों पर आपदा का खतरा मंडरा रहा है। आपदा से पूरी तरह खतरे में आए कुंवारी गांव को सुरक्षित स्थान पर विस्थापित कर दिया गया है।
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अति संवेदनशील में शामिल दो अन्य गांवों दोबाड़ के 13 परिवार, बड़ेत के 11 परिवारों को विस्थापित करने संबंधी फाइलें शासन में लंबित हैं लेकिन तीन साल बाद भी इन गांवों का विस्थापन नहीं हो सका है। जब अतिसंवेदनशील गांवों की इतने लंबे समय से सुध नहीं ली तो संवेदनशील की श्रेणी में आने वाले 25 गांवों की चिंता कौन करे। इनको प्रशासन हर साल बरसात के मौसम में स्कूल, पंचायत घर या फिर टेंटों में शिफ्ट कर देता है।
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जैसे ही बरसात समाप्त हुई यह परिवार फिर से खतरे की जद में आए भवनों में वापस लौट आते हैं। खेतों, मवेशियों को लीलती नदी और जमीन दरकने से धीरे-धीरे जमींदोज होते पुश्तैनी मकानों के मंजर देखने के सिवाय इनके पास कुछ नहीं होता है। आलम यह है कि शासन स्तर पर विस्थापन के मामले में कोई ठोस कार्रवाई न होने से जिले की पांच हजार की आबादी का जीवन खानाबदोशों सा हो गया है। बरसात सिर पर है ऐसे में खतरे की जद में आए लोगों की आंखों में अभी से खौफ तैरने लगा है।
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तहसील गांव परिवार जनसंख्या
बागेश्वर 07 45 230
कपकोट 28 412 2779
गरुड़ 09 214 1327
कांडा 03 10 53
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