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भद्रतुंगा से सरयू का जल लाकर किया बाबा बागनाथ का जलाभिषेक

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 17 Aug 2021 12:36 AM IST
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Baba Bagnath's Jalabhishek was done by bringing water of Saryu from Bhadratunga.
बागेश्वर। श्रावण के अंतिम सोमवार को सरमूल, सौधारा, भद्रतुंगा विकास समिति ने भद्रतुंगा से सरयू का पावन लाकर बाबा बागनाथ का जलाभिषेक किया। दल में शामिल 16 सदस्यों ने मार्ग में पड़ने वाले सभी पांच शिवालयों में भी जल अर्पित किया।
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सरमूल, सौधारा, भद्रतुंगा विकास समिति 2017 से हर वर्ष श्रावण के अंतिम सोमवार को सरमूल से पावन जल लाकर बागनाथ मंदिर में अर्पित करती है। दल का नेतृत्व कर रहे समिति के सलाहकार दयाल कुमल्टा ने बताया कि रविवार शाम को दल में शामिल सभी लोग भद्रतुंगा पहुंच गए थे। सोमवार सुबह सरयू का पावन जल भरा। श्रद्धालुओं ने सबसे पहले भद्रतुंगा स्थित शिवालय में जलाभिषेक किया। इसके बाद तप्तकुंड, कपकोट और हरसीला के शिवालयों में जलाभिषेक करने के बाद दल बागनाथ मंदिर पहुंचा। यहां मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष नंदन सिंह रावल और अन्य सदस्यों ने दल का स्वागत किया। जिसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भक्तों ने भगवान शिव का जलाभिषेेक कर विधिवत पूजा अर्चना की। कुमल्टा ने बताया कि इस वर्ष श्रद्धालुओं ने सरयू के साथ नंदाकुंड का जल भी भगवान शिव को अर्पित किया है। नंदाकुंड से भद्रतुंगा के महंत देवानंद दास पावन जल और ब्रह्कमल लेकर आए थे। जिन्हें उन्होंने दल में शामिल श्रद्धालुओं को शिव को अर्पित करने के लिए दिया। दल में बाहरी राज्यों से आए संत बलराम दास, संत तुलसीदास, आचार्य रामशंकर शरण दास, बिहार से आए श्रद्धालु सत्यनारायण शर्मा, अमित शर्मा, स्थानीय ग्रामीण गुड्डू पाठक, मोहन फर्त्याल, धरम सिंह आदि मौजूद थे।
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अंतिम सोमवार को भी पूजा को उमड़े भक्त
बागेश्वर। श्रावण के अंतिम सोमवार को भी बागनाथ मंदिर में पूजा अर्चना को भक्तों की भीड़ उमड़ी। सुबह से भक्तों ने भारी संख्या में आकर सरयू जल से भगवान शिव का अभिषेक किया। रुद्री पाठ, शिवार्चन आदि पूजा कर भगवान से सुख और सौभाग्य का आशीर्वाद लिया। मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष नंदन रावल ने बताया कि पिछले वर्ष कोरोना महामारी के कारण मंदिर बंद था। इस वर्ष भक्तों ने भारी संख्या में आकर निर्विवाद रूप से पूजा संपन्न कराई। भक्तों की आवाजाही से मंदिर परिसर में पूजा पाठ कराने वाले पंडितों और पुरोहितों का रोजगार भी चलता रहा। उन्होंने भक्तों की भीड़ को नियंत्रित करने और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा कर्मियों की भी सराहना की। इधर, गरुड़ के बैजनाथ मंदिर, कपकोट के शिवालय, कांडा, काफलीगैर और दुग नाकुरी तहसीलों के शिव मंदिरों में भी श्रावण के अंतिम सोमवार को भक्तों ने पूजा अर्चना की।
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