{"_id":"5fa15c1b8ebc3e9c0031e088","slug":"accused-of-misdemeanor-acquittal-bageshwar-news-hld402781742","type":"story","status":"publish","title_hn":"दुष्कर्म का आरोपी दोषमुक्त करार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दुष्कर्म का आरोपी दोषमुक्त करार
विज्ञापन
Accused of misdemeanor acquittal
बागेश्वर। विशेष सत्र न्यायाधीश धनंजय चतुर्वेदी की अदालत ने दुष्कर्म के आरोपी को दोषमुक्त करार दिया है। न्यायालय ने जेल में बंद युवक को तत्काल रिहा करने के आदेश भी जारी किए हैं।
बागेश्वर जिले की एक नाबालिग ने 23 जनवरी 2020 को बेड़ीनाग निवासी पवन कुमार पुत्र गोपाल राम पर डरा-धमकाकर सितंबर 2018 से दिसंबर 2019 तक दुष्कर्म करने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज किया था। युवक पर गर्भवती होने पर दवा खिलाकर गर्भपात करवाने का आरोप भी लगाया था। मामले में एसआई मीना रावत ने विवेचना कर कोर्ट में आरोपपत्र प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान युवक ने खुद को निर्दोष बताते हुए पीड़िता को एक लाख रुपये कर्ज देने की बात कही। उसका कहना है कि रुपये मांगने पर यह मुकदमा उसके खिलाफ किया गया है।
अदालत में पेश कराए गए गवाह पीड़िता के पक्ष में ठोस गवाही नहीं दे पाए। डॉक्टरी जांच में पीड़िता से जोर जबरदस्ती और गर्भपात या गर्भनिरोधक का सेवन कराने की पुष्टि नहीं हुई। युवक की ओर से एडवोकेट चंद्रशेखर मिश्रा और नंदकिशोर भट्ट ने पैरवी की। सोमवार को दोनों पक्षों के सुनने के बाद विशेष सत्र न्यायाधीश धनंजय चतुर्वेदी ने आरोपित को धारा 363, 376, 312, 506 और लैंगिक अपराध से बालकों का संरक्षण अधिनियम के आरोपों से दोषमुक्त करते हुए उसे जेल से रिहा करने का आदेश दिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
बागेश्वर जिले की एक नाबालिग ने 23 जनवरी 2020 को बेड़ीनाग निवासी पवन कुमार पुत्र गोपाल राम पर डरा-धमकाकर सितंबर 2018 से दिसंबर 2019 तक दुष्कर्म करने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज किया था। युवक पर गर्भवती होने पर दवा खिलाकर गर्भपात करवाने का आरोप भी लगाया था। मामले में एसआई मीना रावत ने विवेचना कर कोर्ट में आरोपपत्र प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान युवक ने खुद को निर्दोष बताते हुए पीड़िता को एक लाख रुपये कर्ज देने की बात कही। उसका कहना है कि रुपये मांगने पर यह मुकदमा उसके खिलाफ किया गया है।
विज्ञापन
अदालत में पेश कराए गए गवाह पीड़िता के पक्ष में ठोस गवाही नहीं दे पाए। डॉक्टरी जांच में पीड़िता से जोर जबरदस्ती और गर्भपात या गर्भनिरोधक का सेवन कराने की पुष्टि नहीं हुई। युवक की ओर से एडवोकेट चंद्रशेखर मिश्रा और नंदकिशोर भट्ट ने पैरवी की। सोमवार को दोनों पक्षों के सुनने के बाद विशेष सत्र न्यायाधीश धनंजय चतुर्वेदी ने आरोपित को धारा 363, 376, 312, 506 और लैंगिक अपराध से बालकों का संरक्षण अधिनियम के आरोपों से दोषमुक्त करते हुए उसे जेल से रिहा करने का आदेश दिए।
विज्ञापन