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फाइलों में खाद्य सुरक्षा विभाग
Bageshwar
Updated Mon, 20 Oct 2014 05:34 AM IST
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अल्मोड़ा। मिलावटी, नकली और गुणवत्ताहीन माल के साथ एक्सपायरी सामान की बिक्री रोकने को शासन ने खाद्य सुरक्षा विभाग बनाया है। सरकारी उदासीनता के चलते यह विभाग मात्र कागजों में चल रहा है। नियमानुसार हर जिले में जिला अभिहीत अधिकारी और प्रत्येक तहसील में खाद्य सुरक्षा अधिकारी तैनात होना चाहिए। व्यवस्था की खामी के चलते नैनीताल के अभिहीत अधिकारी पर अल्मोड़ा और बागेश्वर जिलों का अतिरिक्त चार्ज है। अल्मोड़ा में तैनात एक मात्र खाद्य सुरक्षा अधिकारी पर अल्मोड़ा और बागेश्वर की 15 तहसीलों की जिम्मेदारी है। बाजार में मिलावटखोरी रोकने को प्रदेश के हर जिले में खाद्य सुरक्षा विभाग स्थापित है। जिला स्तर पर अभिहीत अधिकारी और तहसीलों में खाद्य सुरक्षा अधिकारी के पद शासन से स्वीकृत हैं। अल्मोड़ा और बागेश्वर में जिला अभिहीत अधिकारी का पद लंबे समय से खाली चल रहा है। नैनीताल के अभिहीत अधिकारी पर इन दोनों जिलों का अतिरिक्त प्रभार है। दोनों ही जिलों में करीब 15 तहसीलें हैं। नियमानुसार हर तहसील में अभिहीत अधिकारी तैनात होना चाहिए, लेकिन दोनों ही जिलों की जिम्मेदारी अल्मोड़ा में तैनात अभिहीत अधिकारी कैलाश चंद्र टम्टा पर है। इसके अलावा कार्यालयों में भी स्टाफ का टोटा बना है। कार्मिकों और अधिकारियों के बगैर सरकारी तंत्र बाजार में पहुंच रही मिलावटी खाद्य सामग्री पर अंकुश कैसे लगाएगा यह सोचनीय है। समान तैनाती से व्यवस्था बदहाल अल्मोड़ा। अलग राज्य गठन के डेढ़ दशक बाद भी कर्मचारी पहाड़ चढ़ना नहीं चाहते। शासन स्तर से कार्मिकों की असमान तैनाती से व्यवस्था बदहाल है। अल्मोड़ा और बागेश्वर में जहां मात्र एक खाद्य सुरक्षा अधिकारी है, वहीं नैनीताल में छह, उधमसिंह नगर, हरिद्वार और देहरादून में पांच-पांच खाद्य सुरक्षा अधिकारी काम कर रहे हैं। विभाग में कार्मिकों और अधिकारियों की कमी को लेकर समय-समय पर शासन को रिपोर्ट भेजी जाती है। कार्मिकों की कमी के चलते दोनों जिलों में में निरंतर निरीक्षण और पर्याप्त सैंपल भरने में दिक्कत आ रही है। फील्ड के साथ ही कार्यालय काम और न्यायालय में चल रहे वादों में स्वयं ही हाजिर होना पड़ रहा है। कैलाश टम्टा, खाद्य सुरक्षा अधिकारी
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