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अल्मोडे़ बजार बिमला ना मारा लटैका
Bageshwar
Updated Sun, 19 Jan 2014 05:56 AM IST
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बागेश्वर। उत्तरायणी मेले का समापन रंगारंग कार्यक्रमों के साथ हुआ। पप्पू कार्की और उनकी पार्टी के कलाकारों ने पहाड़ के प्रचलित लोक प्रिय गीतों के साथ ही यहां की नैसर्गिक छटा को भी स्वर दिए। आखिरी वक्त तक दर्शक वहां जमे रहे।
मंच पर समापन समारोह संपन्न होने के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सिलसिला चला। पप्पू कार्की की टीम ने दर्शकों को बांधे रखा। पप्पू ने मुनस्यारी के प्राकृतिक सौंदर्य और वहां के जनजीवन पर आधारित गीत ऐ जारे चैत बैसाखा मेरो मुनस्यारी गीत प्रस्तुत किया। मंगल चौहान ने अल्मोडे़ बजार बिमला ना मारा लटैका गीत पेश किया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की अंतिम बेला में नीतू जौहरी, मोहन जोशी, प्रहलाद मेहरा आदि के गीत भी हुए। डीडीहाट की जमुना छोरी, सिलगड़ी का पाल छाला, पहाडे़ की चेली छों मैं नाम छू म्यर मोहनी आदि गीत भी सराहे गए। मंगल चौहान ने मंदबुद्धि बालक पर हास्य नाटिका पेश की। मोहन जोशी ने बांसुरी की धुन सुनाई।
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मंच पर समापन समारोह संपन्न होने के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सिलसिला चला। पप्पू कार्की की टीम ने दर्शकों को बांधे रखा। पप्पू ने मुनस्यारी के प्राकृतिक सौंदर्य और वहां के जनजीवन पर आधारित गीत ऐ जारे चैत बैसाखा मेरो मुनस्यारी गीत प्रस्तुत किया। मंगल चौहान ने अल्मोडे़ बजार बिमला ना मारा लटैका गीत पेश किया। सांस्कृतिक कार्यक्रमों की अंतिम बेला में नीतू जौहरी, मोहन जोशी, प्रहलाद मेहरा आदि के गीत भी हुए। डीडीहाट की जमुना छोरी, सिलगड़ी का पाल छाला, पहाडे़ की चेली छों मैं नाम छू म्यर मोहनी आदि गीत भी सराहे गए। मंगल चौहान ने मंदबुद्धि बालक पर हास्य नाटिका पेश की। मोहन जोशी ने बांसुरी की धुन सुनाई।
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