{"_id":"114-70705","slug":"Bageshwar-70705-114","type":"story","status":"publish","title_hn":"तेरो मछोई गाड़ बगीगे ले खाले अब का माछा ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तेरो मछोई गाड़ बगीगे ले खाले अब का माछा
Bageshwar
Updated Sat, 18 Jan 2014 05:53 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बागेश्वर। मंगलवार रात उत्तरायणी के सांस्कृतिक मंच पर प्रख्यात लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी के सशक्त लोक गीतों की धूम रही। उन्होंने गढ़वाली लोक जीवन को गीतों के माध्यम से व्यक्त किया।
नरेंद्र नेगी के कार्यक्रमों की शुरुआत देवी वंदना के साथ हुई। नंदा राजजात पर उनके गीत, नंदा राज राजेश्वरी ने लोगों की आस्था को झकझोर दिया। नरेंद्र नेगी ने ठंडो रे ठंडो मेरो पहाड़े की हवा ठंडी, पाणी ठंडो गीत में पहाड़ की महिमा का बखान किया तो उनके चर्चित गीत तेरो मछोई गाड़ बगीगो, ले खाले अब का मछा में एक गरीब पहाड़ी परिवार की विडंबना उजागर हुई। नेगी के अलावा उनकी पत्नी, टीम के सहयोगी नरेंद्र बिष्ट आदि ने भी गढ़वाल के विभिन्न अंचलों के गीत प्रस्तुत किए। इससे पहले मंच पर स्थानीय विद्यालयों के कार्यक्रम हुए।
विज्ञापन
नरेंद्र नेगी के कार्यक्रमों की शुरुआत देवी वंदना के साथ हुई। नंदा राजजात पर उनके गीत, नंदा राज राजेश्वरी ने लोगों की आस्था को झकझोर दिया। नरेंद्र नेगी ने ठंडो रे ठंडो मेरो पहाड़े की हवा ठंडी, पाणी ठंडो गीत में पहाड़ की महिमा का बखान किया तो उनके चर्चित गीत तेरो मछोई गाड़ बगीगो, ले खाले अब का मछा में एक गरीब पहाड़ी परिवार की विडंबना उजागर हुई। नेगी के अलावा उनकी पत्नी, टीम के सहयोगी नरेंद्र बिष्ट आदि ने भी गढ़वाल के विभिन्न अंचलों के गीत प्रस्तुत किए। इससे पहले मंच पर स्थानीय विद्यालयों के कार्यक्रम हुए।
विज्ञापन