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बागेेश्वर के हस्तशिल्प बचाने की पहल
Bageshwar
Updated Sun, 22 Dec 2013 05:49 AM IST
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बागेश्वर। लुप्त हो रहे परंपरागत हस्तशिल्प के संरक्षण की पहल राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत हो रही है। मलसूना स्थित राजकीय हाईस्कूल में 31 बच्चों को दन और कालीन बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
बागेश्वर के हिमालयी क्षेत्र में भेड़ें पालकर ऊन का उत्पादन करने और इससे विभिन्न प्रकार के वस्त्र आदि बनाने का व्यवसाय सदियों से चला आ रहा है। यहां के दन कालीनों की एक जमाने में काफी मांग हुआ करती थी। वर्तमान में आधुनिकता के प्रभाव से यहां का शिल्प भी अछूता नहीं है। भेड़ पालन, ऊन उत्पादन और हस्तशिल्प कम भले ही हो रहा है, लेकिन इसके माध्यम से रोजगार और विकास की संभावनाएं खत्म नहीं हुई हैं। आज भी उत्तरायणी के मेले में इन वस्तुओं की काफी मांग होती है। माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत विद्यालयों में कला और शिल्प विषय का प्रशिक्षण दिया जाता है। मलसूना स्थित राजकीय हाईस्कूल में परंपरागत दन और कालीन बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वहां कुल 31 छात्र-छात्राओं को यह प्रशिक्षण मिल रहा है। उन्हें ऊन से तागा तैयार करने से लेकर बुनाई, डिजाइन आदि के गुर सिखाए जा रहे हैं। प्रशिक्षण के लिए ठाला गांव निवासी हस्त शिल्पी आनंदी देवी को बुलाया गया है। प्रधानाध्यापक जगत सिंह धपौला और प्रबंध समिति के अध्यक्ष नरेंद्र राठौर ने कहा कि इसके माध्यम से युवाओं को रोजगार मिल सकता है।
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बागेश्वर के हिमालयी क्षेत्र में भेड़ें पालकर ऊन का उत्पादन करने और इससे विभिन्न प्रकार के वस्त्र आदि बनाने का व्यवसाय सदियों से चला आ रहा है। यहां के दन कालीनों की एक जमाने में काफी मांग हुआ करती थी। वर्तमान में आधुनिकता के प्रभाव से यहां का शिल्प भी अछूता नहीं है। भेड़ पालन, ऊन उत्पादन और हस्तशिल्प कम भले ही हो रहा है, लेकिन इसके माध्यम से रोजगार और विकास की संभावनाएं खत्म नहीं हुई हैं। आज भी उत्तरायणी के मेले में इन वस्तुओं की काफी मांग होती है। माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत विद्यालयों में कला और शिल्प विषय का प्रशिक्षण दिया जाता है। मलसूना स्थित राजकीय हाईस्कूल में परंपरागत दन और कालीन बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। वहां कुल 31 छात्र-छात्राओं को यह प्रशिक्षण मिल रहा है। उन्हें ऊन से तागा तैयार करने से लेकर बुनाई, डिजाइन आदि के गुर सिखाए जा रहे हैं। प्रशिक्षण के लिए ठाला गांव निवासी हस्त शिल्पी आनंदी देवी को बुलाया गया है। प्रधानाध्यापक जगत सिंह धपौला और प्रबंध समिति के अध्यक्ष नरेंद्र राठौर ने कहा कि इसके माध्यम से युवाओं को रोजगार मिल सकता है।
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