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स्वार्थ और अज्ञानता की उपज है सांप्रदायिकता
Bageshwar
Updated Fri, 20 Dec 2013 05:50 AM IST
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बागेश्वर। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में इतिहास विभाग की ओर से सांप्रदायिकता के सवाल पर सेमीनार को संबांधित करते हुए शिक्षकों और अतिथियों ने कहा कि यह समस्या अज्ञान, संकीर्णता और स्वार्थों की उपज है। किसी भी लोकतांत्रिक देश में सांप्रदायिकता का स्थान नहीं है। इसके खिलाफ जागरूक समाज को पहल करनी करनी होगी।
सेमीनार का उद्घाटन करते हुए पीयूसीएल के प्रदेश उपाध्यक्ष नंदाबल्लभ भट्ट ने कहा कि सांप्रदायिकता को स्वार्थी तत्व समय-समय पर अपनी सुविधा के मुताबिक प्रयोग करते हैं। इतिहास विभाग के डा. शरद भट्ट ने कहा कि मानवता सबसे मौलिक, तर्कसंगत और सबसे बड़ा धर्म है। इतिहास के छात्र सूरज टम्टा ने राजनीति में सांप्रदायिकता की समस्या पर विचार रखे। भुवन जोशी ने कहा कि वोटों के लिए राजनीतिक दल लोगों की धार्मिक भावनाएं भड़काने का प्रयास करते हैं। भारत स्वाभिमान के नंदन सिंह नेगी ने कहा भारतीय संस्कृति बसुधैव कुटंबकम के सूत्र पर केंद्रित रही है, लेकिन आज यहां के लोग पश्चिमी सभ्यता को अपना रहे हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता गोविंद सिंह भंडारी ने कहा कि मूल रूप से संपूर्ण मानव समाज एक है, इसके बावजूद उसे पंथ और मजहब के नाम से बांटा जाता है ,यह सोचनीय विषय है। डा. महिपाल सिंह ने कविता के माध्यम से मानव प्रेम का आह्वान किया। डा. सीपी वर्मा ने भी विचारर रखे। डा. नरेश कुमार गंगवार, डा. हेमचंद्र दुबे, मोहन जोशी, डा. शिव प्रकाश आदि ने सांप्रदायिकता की समस्या पर कविता प्रस्तुत की।
सेमीनार का उद्घाटन करते हुए पीयूसीएल के प्रदेश उपाध्यक्ष नंदाबल्लभ भट्ट ने कहा कि सांप्रदायिकता को स्वार्थी तत्व समय-समय पर अपनी सुविधा के मुताबिक प्रयोग करते हैं। इतिहास विभाग के डा. शरद भट्ट ने कहा कि मानवता सबसे मौलिक, तर्कसंगत और सबसे बड़ा धर्म है। इतिहास के छात्र सूरज टम्टा ने राजनीति में सांप्रदायिकता की समस्या पर विचार रखे। भुवन जोशी ने कहा कि वोटों के लिए राजनीतिक दल लोगों की धार्मिक भावनाएं भड़काने का प्रयास करते हैं। भारत स्वाभिमान के नंदन सिंह नेगी ने कहा भारतीय संस्कृति बसुधैव कुटंबकम के सूत्र पर केंद्रित रही है, लेकिन आज यहां के लोग पश्चिमी सभ्यता को अपना रहे हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता गोविंद सिंह भंडारी ने कहा कि मूल रूप से संपूर्ण मानव समाज एक है, इसके बावजूद उसे पंथ और मजहब के नाम से बांटा जाता है ,यह सोचनीय विषय है। डा. महिपाल सिंह ने कविता के माध्यम से मानव प्रेम का आह्वान किया। डा. सीपी वर्मा ने भी विचारर रखे। डा. नरेश कुमार गंगवार, डा. हेमचंद्र दुबे, मोहन जोशी, डा. शिव प्रकाश आदि ने सांप्रदायिकता की समस्या पर कविता प्रस्तुत की।
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