निर्माण के कारण खतरे में आया रिंगाल कारोबार

Bageshwar Updated Thu, 15 Nov 2012 12:00 PM IST
बागेश्वर। उच्च हिमालयी क्षेत्र में चल रहे भारी निर्माण के चलते विभिन्न वस्तुआें के निर्माण में आने वाली रेशेदार रिंगाल उजड़ने के कगार पर पहुंच गया है। रिंगाल के पौध उखड़ने से इस कारोबार से जुड़े करीब 250 लोगों का कारोबार प्रभावित हो रहा है।
उच्च हिमालयी क्षेत्र के विभिन्न गांवों में सूपी, तरसाल, तीली, रातिरकेठी, मल्खाडुगर्चा, गोगिना, कीमू, रिखाड़ी, हरकोट, धुरकोट, चौड़ा, कर्मी, तीख, उगिया, बाछम, किलपारा आदि गांवों में रेशेदार रिंगाल प्रचुर मात्रा में होता है। रिंगाल से चटाई, डलिया, टोकरी, डोके, कलमदान तथा डस्टबिन बनाए जाते हैं। इस कारोबार से करीब 250 परिवार जुड़े हैं। उद्यमी रिंगाल से बनी वस्तुओं की उत्तरायणी मेला, दशहरा और नंदादेवी मेले के अलावा सुदूरवर्ती क्षेत्रों में आयोजित होने वाले मेलोें में बेचने को जाते हैं। रिंगाल का कारोबार ही इस क्षेत्र के लोगों की रोजी रोटी का मुख्य स्रोत है। उच्च हिमालयी क्षेत्र के लोगों को यातायात से जोड़ने के लिए रिखाड़ी, बदियाकोट, मुनार, बैछम तथा लीती गोगिना मार्गों के निर्माण से रिंगाल के पेड़ों को भारी नुकसान हुआ है। उद्यमी बलवंत सिंह दानू, शेर राम, मोहन सिंह टाकुली, करम सिंह तथा भवान सिंह दानू का कहना है कि सड़क उनकी जरूरत है लेकिन इसके निर्माण से रिंगाल को क्षति हुई है। इससे उनका कारोबार खासा प्रभावित हो गया है। इधर प्रभारी वनाधिकारी आरसी शर्मा ने बताया कि रिंगाल के संरक्षण को गत वर्ष ग्रामीणों को रिंगाल के 10 हजार पौध नि:शुल्क दिए गए। जबकि विभाग ने कई स्थानों पर पौधरोपण किया। इस बार 50 हेक्टेयर में रिंगाल के पौधरोपण का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए कपकोट तथा बैजनाथ रेंज के अंतर्गत नर्सरी तैयार की जा रही है।

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