{"_id":"5a13059a4f1c1b8d698bcb09","slug":"91511196058-bageshwar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"चंदवंश की मूर्तियों को उनके मूल स्थान पर स्थापित करने की मांग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चंदवंश की मूर्तियों को उनके मूल स्थान पर स्थापित करने की मांग
Updated Mon, 20 Nov 2017 10:10 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बागेश्वर। चंदवंश शासनकाल में बैजनाथ और तैलीहाट में निर्मित मंदिरों और शिवालयों की मूर्तियां एक कमरे में लंबे से बंद पड़ी हैं। इन मूर्तियों को अब उनके मूल स्थानों पर पुनर्स्थापित करने की मांग उठने लगी है। सवाल संगठन के रमेश पांडे कृषक ने डीएम को सौंपे मुख्यमंत्री के नाम के ज्ञापन में इन दुर्लभ मूर्तियों को मंदिरों के मूल स्थान पर पुनर्स्थापित करने की मांग की है।
उन्होंने सीएम से विधि विधान के साथ बंद पड़ी पूजा शुरू कराने की मांग की है। डीएम को सौंपे पत्र में सवाल संगठन के कृषक ने कहा है कि उत्तर प्रदेश के शासन के दौरान पुरातन संपदाओं के संरक्षण के नाम पर कई अति महत्वपूर्ण प्राचीन मंदिरों की मूर्तियों को पुरातन संग्रहालयों में कैद कर दिया था। तब की सरकार के इस कृत्य के बाद जहां बैजनाथ शिवालय समूह की पूर्ण आभा प्रभावित हो गई, वहीं तल्लीहाट के लक्ष्मी नारायण और राक्षस ताल के मंदिरों की प्राचीन मूर्तियां हटाकर पूजा को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया। इन मंदिरों की पूर्ण आभा तभी संभव है जब मंदिरों में उनकी मूर्तियां विराजमान हों। उन्होंने सीएम से कहा है कि खंडित मूर्तियों के लिए संग्रहालय अवश्य बनाया जाए, लेकिन संपूर्ण आभा वाली मूर्तियों को उनके मूल स्थान पर शीघ्र स्थापित किया जाए।
विज्ञापन
उन्होंने सीएम से विधि विधान के साथ बंद पड़ी पूजा शुरू कराने की मांग की है। डीएम को सौंपे पत्र में सवाल संगठन के कृषक ने कहा है कि उत्तर प्रदेश के शासन के दौरान पुरातन संपदाओं के संरक्षण के नाम पर कई अति महत्वपूर्ण प्राचीन मंदिरों की मूर्तियों को पुरातन संग्रहालयों में कैद कर दिया था। तब की सरकार के इस कृत्य के बाद जहां बैजनाथ शिवालय समूह की पूर्ण आभा प्रभावित हो गई, वहीं तल्लीहाट के लक्ष्मी नारायण और राक्षस ताल के मंदिरों की प्राचीन मूर्तियां हटाकर पूजा को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया। इन मंदिरों की पूर्ण आभा तभी संभव है जब मंदिरों में उनकी मूर्तियां विराजमान हों। उन्होंने सीएम से कहा है कि खंडित मूर्तियों के लिए संग्रहालय अवश्य बनाया जाए, लेकिन संपूर्ण आभा वाली मूर्तियों को उनके मूल स्थान पर शीघ्र स्थापित किया जाए।
विज्ञापन