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जिले के कई गांवों में बंदरों का आतंक बढ़ने से लोग परेशान
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बागेश्वर। जिले के कई गांवों में बंदरों का आतंक बढ़ गया है। बंदर घरों में घुसकर खाने का सामान उठा ले जाने के साथ ही खेतों में बोई गई सब्जियों को नष्ट कर दे रहे हैं। बंदरों के आतंक के चलते किसानों को बीज का लागत मूल्य भी नहीं मिल रहा है। इससे कई किसानों ने सब्जी उगाना छोड़ दिया है।
जिले के बिलौना, मजियाखेत, कफलखेत, त्यूनरा के अलावा तहसील रोड में बंदरों के झुंड घूम रहे हैं। वह इतने निडर हो गए हैं कि वह लोगों के घरों में घुसकर खाने का सामान उठा ले जा रहे हैं। साथ ही घरोें की छतों में सूखाने के लिए डाले गए कपड़ों को फाड़ कर नष्ट कर दे रहे हैं। ग्रामीणों ने इन दिनों खेतों में लौकी, कद्दू, ककड़ी, प्याज आदि उगाया है लेकिन पलक झपकते ही बंदर सब्जी को नष्ट कर दे रहे हैं। बंदरों के आतंक से परेशान होकर कई काश्तकारों ने सब्जी उगाना ही छोड़ दिया है।
बिलौना निवासी काश्तकार जगत सिंह ने बताया कि खेतों में इन दिनों में मूली, लौकी, भिंडी, तुरई आदि की सब्जी उगाई है। बंदर सब्जी को चट कर दे रहे हैं। जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है। इसी गांव के किसान गोकुल चंद्र ने बताया कि बाजार से महंगा बीज लाकर सब्जी उत्पादन करते हैं लेकिन बंदरों द्वारा सब्जी को नुकसान पहुंचाने से काश्तकारों को बीज का लागत मूल्य भी नहीं मिल रहा है।
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जिले के बिलौना, मजियाखेत, कफलखेत, त्यूनरा के अलावा तहसील रोड में बंदरों के झुंड घूम रहे हैं। वह इतने निडर हो गए हैं कि वह लोगों के घरों में घुसकर खाने का सामान उठा ले जा रहे हैं। साथ ही घरोें की छतों में सूखाने के लिए डाले गए कपड़ों को फाड़ कर नष्ट कर दे रहे हैं। ग्रामीणों ने इन दिनों खेतों में लौकी, कद्दू, ककड़ी, प्याज आदि उगाया है लेकिन पलक झपकते ही बंदर सब्जी को नष्ट कर दे रहे हैं। बंदरों के आतंक से परेशान होकर कई काश्तकारों ने सब्जी उगाना ही छोड़ दिया है।
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बिलौना निवासी काश्तकार जगत सिंह ने बताया कि खेतों में इन दिनों में मूली, लौकी, भिंडी, तुरई आदि की सब्जी उगाई है। बंदर सब्जी को चट कर दे रहे हैं। जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है। इसी गांव के किसान गोकुल चंद्र ने बताया कि बाजार से महंगा बीज लाकर सब्जी उत्पादन करते हैं लेकिन बंदरों द्वारा सब्जी को नुकसान पहुंचाने से काश्तकारों को बीज का लागत मूल्य भी नहीं मिल रहा है।
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