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राजकीय अतिरिक्त पीएचसी पोथिंग बदहाली के कगार पर
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कपकोट (बागेश्वर)। अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (एपीएचसी) पोथिंग बदहाली की कगार पहुुंच गया है। इस अस्पताल को एक फार्मासिस्ट के भरोसे छोड़ दिया गया है। इस कारण ग्रामीणों को दस किमी दूर तहसील मुख्यालय जाना पड़ रहा है।
सीएचसी कपकोट से पीपीपी मोड हटने के बाद व्यवस्था के तहत यहां के डॉक्टर, वार्डब्वॉय को मई में सीएचसी कपकोट में शिफ्ट कर दिया था जबकि चौकीदार, पर्यावरणमित्र पहले से ही नहीं हैं। अस्पताल में एक्सरे, अल्ट्रासाउंड मशीन, मल, मूत्र, ब्लड की जांच के कोई इंतजाम नहीं हैं। इस कारण ग्रामीणों को तहसील मुख्यालय पर स्थित सीएचसी में जाना पड़ता है। जहां आने-जाने में काफी समय और पैसे की बर्बादी हो रही है। पहले अस्पताल में प्रतिदिन 40-50 रोगी आते थे, अब डॉक्टर न होने से यह संख्या घटकर 10-15 हो गई। ग्राम प्रधान चंपा देवी, बीडीसी सदस्य शोभा देवी ने बताया कि अस्पताल की समस्याओं को लेकर आंदोलन करने के बावजूद सुनवाई नहीं हो सकी है। अस्पताल में चहारदीवारी न होने से कई बार लावारिस जानवर परिसर में घुस आते हैं। बिजली का मीटर भी न होने से असली व्यय भार का पता नहीं चल पाता। इसी गांव के किनारे भाजपा जिलाध्यक्ष शेर सिंह गढ़िया बताते हैं कि पोथिंग समेत जिले के अन्य अस्पतालों की व्यवस्था सुधारने के लिए शासन को पत्र लिखा है। जल्द ही समस्याओं के समाधान की उम्मीद है।
फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहा अस्पताल
स्टाफ के अभाव में बदहाली के कगार पर पहुंचा एपीएचसी पोथिंग
-अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पोथिंग में कार्यरत डॉक्टर को सीएचसी कपकोट में महज अस्थायी तौर पर कुछ समय के लिए बुलाया गया है। डॉक्टरों की तैनाती होते ही वह पूर्ण रूप से पोथिंग चले जाएंगे। अस्पताल की अन्य समस्याओं को लेेकर सीएमओ को पत्र भेजा है।
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-बीएस रावत, प्रभारी चिकित्साधिकारी सीएचसी कपकोट।
अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पोथिंग की समस्याएं संज्ञान में हैं। समस्याओं के समाधान के प्रयास विभागीय स्तर पर चल रहे हैं।
- डॉ. जेसी मंडल, सीएमओ बागेश्वर।
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सीएचसी कपकोट से पीपीपी मोड हटने के बाद व्यवस्था के तहत यहां के डॉक्टर, वार्डब्वॉय को मई में सीएचसी कपकोट में शिफ्ट कर दिया था जबकि चौकीदार, पर्यावरणमित्र पहले से ही नहीं हैं। अस्पताल में एक्सरे, अल्ट्रासाउंड मशीन, मल, मूत्र, ब्लड की जांच के कोई इंतजाम नहीं हैं। इस कारण ग्रामीणों को तहसील मुख्यालय पर स्थित सीएचसी में जाना पड़ता है। जहां आने-जाने में काफी समय और पैसे की बर्बादी हो रही है। पहले अस्पताल में प्रतिदिन 40-50 रोगी आते थे, अब डॉक्टर न होने से यह संख्या घटकर 10-15 हो गई। ग्राम प्रधान चंपा देवी, बीडीसी सदस्य शोभा देवी ने बताया कि अस्पताल की समस्याओं को लेकर आंदोलन करने के बावजूद सुनवाई नहीं हो सकी है। अस्पताल में चहारदीवारी न होने से कई बार लावारिस जानवर परिसर में घुस आते हैं। बिजली का मीटर भी न होने से असली व्यय भार का पता नहीं चल पाता। इसी गांव के किनारे भाजपा जिलाध्यक्ष शेर सिंह गढ़िया बताते हैं कि पोथिंग समेत जिले के अन्य अस्पतालों की व्यवस्था सुधारने के लिए शासन को पत्र लिखा है। जल्द ही समस्याओं के समाधान की उम्मीद है।
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फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहा अस्पताल
स्टाफ के अभाव में बदहाली के कगार पर पहुंचा एपीएचसी पोथिंग
-अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पोथिंग में कार्यरत डॉक्टर को सीएचसी कपकोट में महज अस्थायी तौर पर कुछ समय के लिए बुलाया गया है। डॉक्टरों की तैनाती होते ही वह पूर्ण रूप से पोथिंग चले जाएंगे। अस्पताल की अन्य समस्याओं को लेेकर सीएमओ को पत्र भेजा है।
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-बीएस रावत, प्रभारी चिकित्साधिकारी सीएचसी कपकोट।
अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पोथिंग की समस्याएं संज्ञान में हैं। समस्याओं के समाधान के प्रयास विभागीय स्तर पर चल रहे हैं।
- डॉ. जेसी मंडल, सीएमओ बागेश्वर।