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20 साल बाद भी सात खाद्यान्न गोदामों के भवन नहीं बन सके
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बागेश्वर। जिला पूर्ति विभाग की हालत काफी खराब है। उत्तराखंड राज्य बनने के 20 साल बाद भी सरकारी खाद्यान्न गोदामों के अपने भवन नहीं बन सके हैं। जिले में 16 खाद्यान्न गोदामों में से सात गोदाम किराये के भवनों में चल रहे हैं। इसके अलावा क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी, खाद्य निरीक्षक के कई पद रिक्त हैं। इन हालातों में विभाग की स्थिति लगातार खराब हो रही है।
जिला पूर्ति विभाग के जिले में 16 राजकीय खाद्यान्न गोदाम है। इन गोदामों में से हरसीला, भराड़ी, लीती, बडिय़ाकोट, कर्मी, तलाई, बासम कुल सात खाद्यान्न गोदाम आज भी किराये के भवनों में चल रहे हैं। किराये के इन भवनों में काफी सीलन रहती है। बरसात के दिनों में गेहूं, चीनी, चावल आदि कई बार खराब हो जाता है। इससे विभाग को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है। सीलन युक्त खाद्यान्न स्वास्थ्य के लिए काफी घातक माना जाता है। जिला पूर्ति विभाग में स्टाफ की भारी कमी बनी हुई है। जिला पूर्ति विभाग में खाद्य निरीक्षकों के कुल 20 पद स्वीकृत हैं। जिसमें से 16 पद खाली चल रहे हैं। इसके अलावा क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी (एआरओ) के तीन पद स्वीकृत हैं। जिसमें से दो पद खाली चल रहे हैं।
एक खाद्य निरीक्षक के हवाले हैं दो से चार गोदाम =
जिला पूर्ति विभाग में खाद्य निरीक्षकों की भारी कमी बनी हुई है। इस कारण कामकाज पर असर पड़ रहा है। हालात यह है कि एक खाद्य निरीक्षक के हवाले दो से चार खाद्यान्न गोदाम हैं। खाद्य निरीक्षकों के पास एक से अधिक गोदामों का कार्यभार होने से उनमें असंतोष है। खाद्य निरीक्षकों की कमी के कारण गोदामों का नियमित निरीक्षण भी नहीं हो पा रहा है।
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कोट
जिले में सात खाद्यान्न गोदाम किराये में भवनों में संचालित किए जा रहे हैं। भवन निर्माण के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। खाद्य निरीक्षक, क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी के खाली पदों पर नियुक्ति शासन स्तर से होती है। लोकसभा चुनाव आचार संहिता हटने के बाद इन पदों पर नियुक्ति होने की उम्मीद है।
अरुण कुमार वर्मा, जिला पूर्ति अधिकारी बागेश्वर।
जिला पूर्ति विभाग के जिले में 16 राजकीय खाद्यान्न गोदाम है। इन गोदामों में से हरसीला, भराड़ी, लीती, बडिय़ाकोट, कर्मी, तलाई, बासम कुल सात खाद्यान्न गोदाम आज भी किराये के भवनों में चल रहे हैं। किराये के इन भवनों में काफी सीलन रहती है। बरसात के दिनों में गेहूं, चीनी, चावल आदि कई बार खराब हो जाता है। इससे विभाग को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है। सीलन युक्त खाद्यान्न स्वास्थ्य के लिए काफी घातक माना जाता है। जिला पूर्ति विभाग में स्टाफ की भारी कमी बनी हुई है। जिला पूर्ति विभाग में खाद्य निरीक्षकों के कुल 20 पद स्वीकृत हैं। जिसमें से 16 पद खाली चल रहे हैं। इसके अलावा क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी (एआरओ) के तीन पद स्वीकृत हैं। जिसमें से दो पद खाली चल रहे हैं।
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एक खाद्य निरीक्षक के हवाले हैं दो से चार गोदाम =
जिला पूर्ति विभाग में खाद्य निरीक्षकों की भारी कमी बनी हुई है। इस कारण कामकाज पर असर पड़ रहा है। हालात यह है कि एक खाद्य निरीक्षक के हवाले दो से चार खाद्यान्न गोदाम हैं। खाद्य निरीक्षकों के पास एक से अधिक गोदामों का कार्यभार होने से उनमें असंतोष है। खाद्य निरीक्षकों की कमी के कारण गोदामों का नियमित निरीक्षण भी नहीं हो पा रहा है।
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कोट
जिले में सात खाद्यान्न गोदाम किराये में भवनों में संचालित किए जा रहे हैं। भवन निर्माण के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। खाद्य निरीक्षक, क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी के खाली पदों पर नियुक्ति शासन स्तर से होती है। लोकसभा चुनाव आचार संहिता हटने के बाद इन पदों पर नियुक्ति होने की उम्मीद है।
अरुण कुमार वर्मा, जिला पूर्ति अधिकारी बागेश्वर।