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लाटू देवता को ओलावृष्टि से फसलों की रक्षा करने में सिद्धि प्राप्त है
Updated Sat, 14 Apr 2018 11:12 PM IST
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कपकोट (बागेश्वर)। ग्राम पंचायत कपकोट के धौलांणी की मनोरम पहाड़ी पर स्थित श्री श्री 1008 लाटू देवता को ओलावृष्टि से फसलों की रक्षा करने की सिद्धि प्राप्त है। बैशाख महीने की दो गते को मंदिर में मेला लगता है। इस दिन श्रद्धालु मंदिर में नए अनाज का प्रसाद बनाकर लाटू, भगवती माता और बाण देवता को भोग लगाते हैं। मंदिर की मटकी में नागों के पीने के लिए दूध रखा जाता है।
ग्राम पंचायत कपकोट में पहले लाटू देवता का छोटा सा मंदिर था। 90 के दशक में जन सहयोग से मंदिर का भव्य निर्माण हुआ। लोगों का कहना है लाटू देवता किसानों की फसल को ओलावृष्टि से बचाते हैं। ओलावृष्टि होने पर मंदिर के पुजारी लाटू देवता को पुकारते हैं उनकी पूजा करके ओलावृष्टि शांत हो जाती है। जब अधिकतर क्षेत्रों में भीषण ओलावृष्टि होती है तब मंदिर से जुड़े कपकोट, उत्तरौड़ा, गैनाड़, गैरखेत, पोलिंग, चीराबगड़, कन्यूटी और परमटी आदि गांवों में हल्के वजन की ओलावृष्टि होती है।
इससे फसलों को नुकसान न के बराबर होता है। ग्रामीण इसे लाटू देवता की ही महिमा मानते हैं। रबी की फसल तैयार होने पर हर साल मंदिर में दो गते बैशाख के दिन क्षेत्र का सुप्रसिद्ध स्याल्दे बिखोती का मेला लगता है। इस बार मेला 15 अप्रैल को लग रहा है। दिनभर मंदिर में पूजा पाठ होते हैं। श्रद्धालु अपनी मनौती पूरी होने पर घंटी, शंख के अलावा पूजा के काम आने वाले बर्तन अर्पित करते हैं। मंदिर में क्षेत्र की सुख शांति के लिए सामूहिक रूप से गोदान होता है। भंडारे में बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं। मंदिर के ऊंचाई होने पर यहां से पतित पावनी सरयू, शिखर और चिरपतकोट की मनोरम पहाड़ी समेत नगर पंचायत क्षेत्र के लहलहाते खेतों का नयनाभिराम होता है। मंदिर में उपाध्याय परिवार बतौर पुजारी नियुक्त हैं जबकि सिलकानी और आंणू के जोशी पूजा पाठ करते हैं।
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ग्राम पंचायत कपकोट में पहले लाटू देवता का छोटा सा मंदिर था। 90 के दशक में जन सहयोग से मंदिर का भव्य निर्माण हुआ। लोगों का कहना है लाटू देवता किसानों की फसल को ओलावृष्टि से बचाते हैं। ओलावृष्टि होने पर मंदिर के पुजारी लाटू देवता को पुकारते हैं उनकी पूजा करके ओलावृष्टि शांत हो जाती है। जब अधिकतर क्षेत्रों में भीषण ओलावृष्टि होती है तब मंदिर से जुड़े कपकोट, उत्तरौड़ा, गैनाड़, गैरखेत, पोलिंग, चीराबगड़, कन्यूटी और परमटी आदि गांवों में हल्के वजन की ओलावृष्टि होती है।
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इससे फसलों को नुकसान न के बराबर होता है। ग्रामीण इसे लाटू देवता की ही महिमा मानते हैं। रबी की फसल तैयार होने पर हर साल मंदिर में दो गते बैशाख के दिन क्षेत्र का सुप्रसिद्ध स्याल्दे बिखोती का मेला लगता है। इस बार मेला 15 अप्रैल को लग रहा है। दिनभर मंदिर में पूजा पाठ होते हैं। श्रद्धालु अपनी मनौती पूरी होने पर घंटी, शंख के अलावा पूजा के काम आने वाले बर्तन अर्पित करते हैं। मंदिर में क्षेत्र की सुख शांति के लिए सामूहिक रूप से गोदान होता है। भंडारे में बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करते हैं। मंदिर के ऊंचाई होने पर यहां से पतित पावनी सरयू, शिखर और चिरपतकोट की मनोरम पहाड़ी समेत नगर पंचायत क्षेत्र के लहलहाते खेतों का नयनाभिराम होता है। मंदिर में उपाध्याय परिवार बतौर पुजारी नियुक्त हैं जबकि सिलकानी और आंणू के जोशी पूजा पाठ करते हैं।
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