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तीन की मौत, 51 हायर सेंटर रेफर
अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर।
Updated Sat, 01 Dec 2018 11:40 PM IST
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बागेश्वर जिला अस्पताल में पीड़ितों का हालचाल जानते रास सदस्य प्रदीप टम्टा।
- फोटो : अमर उजाला
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कपकोट के विवाह समारोह में शुक्रवार को तीन सौ से अधिक लोग फूड प्वाइजनिंग का शिकार हुए। इनमें से दो बच्चों और एक महिला समेत तीन की शनिवार को मौत हो गई जबकि गंभीर हालत में 51 को हायर सेंटर रेफर कर दिया गया है। इनमें से नौ को चॉपर से हल्द्वानी ले जाया गया है।
250 से अधिक पीड़ित बागेश्वर जिला अस्पताल के साथ ही बेड़ीनाग, कपकोट, कांडा अस्पताल में भर्ती हैं। अकेले बेड़ीनाग में ही डेढ़ सौ से अधिक पीड़ित भर्ती हैं जबकि 48 की हालत में सुधार के बाद रिलीव कर दिया गया है।
बेरीनाग अस्पताल में हालत बिगड़ने पर शनिवार सुबह पीयूष (5) पुत्र देव सिंह की मौत हो गई। इसके कुछ देर बाद 10 वर्षीय मीनाक्षी की हल्द्वानी ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई जबकि 60 वर्षीय नंदी देवी ने सुशीला तिवारी अस्पताल में दम तोड़ा। आपदा कंट्रोल रूम के मुताबिक बेरीनाग में 152 मरीज भर्ती हुए।
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इसमें 30 लोगों को 108 एंबुलेंस की मदद से हायर सेंटर रेफर किया गया। इसके बाद नौ पीड़ितों को चॉपर से हल्द्वानी भेजा गया। अभी 100 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं। जिला अस्पताल में 38 मरीज भर्ती हुए। इसमें 10 मरीजों को हायर सेंटर रेफर किया गया। सीएचसी कांडा में भर्ती 55 पीड़ितों में से दो पीड़ितों को जिला अस्पताल रेफर किया गया है।
कपकोट में 49 में से सात को जिला अस्पताल रेफर किया गया जबकि सात को बागेश्वर के लिए रेफर किया गया। 38 को डिस्चार्ज किया गया जबकि चार पीड़ित भर्ती हैं। इधर, बास्ती मेें स्वास्थ्य विभाग ने कैंप लगाकर 70 पीड़ितों का इलाज किया।
दूसरे दिन भी पीड़ितों के अस्पताल भर्ती होने का सिलसिला चलता रहा। मौके पर रेस्क्यू के लिए एसडीआरएफ के साथ ही विभिन्न विभागों की टीमाें को तैनात किया गया है। प्रभारी जिलाधिकारी नरेंद्र सिंह भंडारी ने बताया कि बास्ती गांव की घटना की जांच कराई जा रही है।
बास्ती गांव में मवेशियों को पानी पिलाने वाला तक नहीं
बास्ती गांव की अधिसंख्य आबादी अस्पताल और बिस्तर पर होने के चलते वहां मवेशियों को पानी देने वाला तक नहीं है। पूरे गांव में मरघट की सुनसानी और उदासी छाई है। बास्ती गांव के अधिसंख्य ग्रामीण अस्पतालों में भर्ती हैं। पीड़ितों का गांव के कैंप में भी इलाज चल रहा है।
मवेशियों की देखरेख और चारा-पानी देने के लिए अधिकांश घरों में कोई सदस्य भी नहीं बचा। इस बीच गांव के मवेशियों के लिए चारा-पानी देने का समस्या खड़ी है। शनिवार को दिनभर गांव के मवेशी चारे-पानी के लिए परेशान रहे। जैसे-तैसे कुछ ग्रामीणों ने मवेशियों के लिए चारे-पानी की व्यवस्था की।
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250 से अधिक पीड़ित बागेश्वर जिला अस्पताल के साथ ही बेड़ीनाग, कपकोट, कांडा अस्पताल में भर्ती हैं। अकेले बेड़ीनाग में ही डेढ़ सौ से अधिक पीड़ित भर्ती हैं जबकि 48 की हालत में सुधार के बाद रिलीव कर दिया गया है।
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बेरीनाग अस्पताल में हालत बिगड़ने पर शनिवार सुबह पीयूष (5) पुत्र देव सिंह की मौत हो गई। इसके कुछ देर बाद 10 वर्षीय मीनाक्षी की हल्द्वानी ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई जबकि 60 वर्षीय नंदी देवी ने सुशीला तिवारी अस्पताल में दम तोड़ा। आपदा कंट्रोल रूम के मुताबिक बेरीनाग में 152 मरीज भर्ती हुए।
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इसमें 30 लोगों को 108 एंबुलेंस की मदद से हायर सेंटर रेफर किया गया। इसके बाद नौ पीड़ितों को चॉपर से हल्द्वानी भेजा गया। अभी 100 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं। जिला अस्पताल में 38 मरीज भर्ती हुए। इसमें 10 मरीजों को हायर सेंटर रेफर किया गया। सीएचसी कांडा में भर्ती 55 पीड़ितों में से दो पीड़ितों को जिला अस्पताल रेफर किया गया है।
कपकोट में 49 में से सात को जिला अस्पताल रेफर किया गया जबकि सात को बागेश्वर के लिए रेफर किया गया। 38 को डिस्चार्ज किया गया जबकि चार पीड़ित भर्ती हैं। इधर, बास्ती मेें स्वास्थ्य विभाग ने कैंप लगाकर 70 पीड़ितों का इलाज किया।
दूसरे दिन भी पीड़ितों के अस्पताल भर्ती होने का सिलसिला चलता रहा। मौके पर रेस्क्यू के लिए एसडीआरएफ के साथ ही विभिन्न विभागों की टीमाें को तैनात किया गया है। प्रभारी जिलाधिकारी नरेंद्र सिंह भंडारी ने बताया कि बास्ती गांव की घटना की जांच कराई जा रही है।
बास्ती गांव में मवेशियों को पानी पिलाने वाला तक नहीं
बास्ती गांव की अधिसंख्य आबादी अस्पताल और बिस्तर पर होने के चलते वहां मवेशियों को पानी देने वाला तक नहीं है। पूरे गांव में मरघट की सुनसानी और उदासी छाई है। बास्ती गांव के अधिसंख्य ग्रामीण अस्पतालों में भर्ती हैं। पीड़ितों का गांव के कैंप में भी इलाज चल रहा है।
मवेशियों की देखरेख और चारा-पानी देने के लिए अधिकांश घरों में कोई सदस्य भी नहीं बचा। इस बीच गांव के मवेशियों के लिए चारा-पानी देने का समस्या खड़ी है। शनिवार को दिनभर गांव के मवेशी चारे-पानी के लिए परेशान रहे। जैसे-तैसे कुछ ग्रामीणों ने मवेशियों के लिए चारे-पानी की व्यवस्था की।