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शासकीय उपेक्षा का दंश झेल रहा है संस्कृत महाविद्यालय कमेड़ीदेवी

Tue, 19 Jun 2018 11:49 PM IST
Updated Tue, 19 Jun 2018 11:49 PM IST
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शासकीय उपेक्षा का दंश झेल रहा है संस्कृत महाविद्यालय कमेड़ीदेवी
बागेश्वर। संस्कृत भाषा को देवताओं की वाणी और भाषाओं की जननी भी कहा जाता है। इस प्राचीन भाषा के महत्व के कारण इसे राज्य की दूसरी भाषा का दर्जा देने के प्रयास जारी है। बावजूद इसके कमेड़ीदेवी में जिले का एकमात्र नारायण संस्कृत महाविद्यालय शासकीय उपेक्षा का दंश झेल रहा है। महाविद्यालय में एक शिक्षक को छोड़ प्राचार्य तक के सारे पद खाली पड़े हैं। वर्षों पूर्व बने भवन की हालत खस्ता हो गई है। चहारदीवारी नहीं होने से परिसर में लावारिस जानवरों का जमघट लगा रहता है।
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जिला मुख्यालय से करीब 40 किमी दूर कमेड़ीदेवी में आजादी से पूर्व 1939 में संस्कृत महाविद्यालय की स्थापना हुई थी। महाविद्यालय को पूर्व मध्यमा की मान्यता संस्कृत शिक्षा परिषद देहरादून जबकि शास्त्री की मान्यता उत्तराखंड संस्कृत महाविद्यालय हरिद्वार से मिली है। इस महाविद्यालय ने अनेक रत्न दिए हैं। पूर्व, उत्तर मध्यमा और शास्त्री की डिग्री लेकर अनगिनत लोग रोजगार प्राप्त कर चुके हैं।
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एक दशक पहले यहां छात्र संख्या अच्छी-खासी थी। खस्ताहाल होने से छात्र संख्या घटकर 35 रह गई है। प्रबंधकीय व्यवस्था के तहत चल रहे महाविद्यालय की शुरू से ही उपेक्षा हुई है। महाविद्यालय में एकमात्र पूर्णकालिक शिक्षक हैं वही प्राचार्य पद का प्रभार संभाले हैं। शिक्षकों के चार और स्थाई पदों में से प्रबंधन ने नाममात्र के वेतन पर दो शिक्षक तैनात किए हैं। लिपिक और चतुर्थ श्रेणी के पद अरसे से खाली हैं।
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पांच नाली भूमि में वर्षों पूर्व निर्मित भवनों की हालत खस्ता हो चुकी है। भवन में बिजली और पानी की कोई सुविधा नहीं है। शौचालय भी केवल एक ही है। कमेड़ीदेवी-मलसूना सड़क से परिसर की सुरक्षा को खतरा बना है लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं है। समस्याओं का समाधान न होने से लोगों में रोष है। उन्होंने महाविद्यालय में जरूरी सुविधाएं मौजूद कराने की मांग की है।


कुुलपति का निरीक्षण भी नहीं आया काम
उत्तराखंड संस्कृत महाविद्यालय हरिद्वार के कुलपति पीयूषकांत दीक्षित ने तीन महीने पहले महाविद्यालय का निरीक्षण किया था। वह महाविद्यालय की एक-एक समस्या का आकलन कर ले गए थे। लोगों को आशा थी कि कुलपति के निरीक्षण से महाविद्यालय की शीघ्र कायाकल्प होगी लेकिन समस्याएं जस की तस हैं। प्रबंधक कमल भौर्याल ने बताया कि उन्होंने शासन-प्रशासन, विधायक को पत्र भेजे हैं। समस्याओं के समाधान की आशा है।

मैंने संस्कृत महाविद्यालय का पिछले दिनों भ्रमण किया है। समस्याओं का आकलन किया है। समाधान में पूरा सहयोग करूंगा।
- बलवंत भौर्याल, विधायक विधानसभा क्षेत्र कपकोट।
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