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राम, सीता जन्म के साथ कपकोट में रामलीला मंचन शुरू
Updated Tue, 23 Oct 2018 12:50 AM IST
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कपकोट (बागेश्वर)। श्री रामलीला कमेटी की ओर से रामलीला का मंचन शुरू हो गया है। रामलीला के पहले दिन राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और सीता जन्म के दृश्य का मंचन किया गया।
रविवार शाम रामलीला का शुुुभारंभ मुख्य अतिथि वरिष्ठ कलाकार लक्ष्मी दत्त कांडपाल ने किया। पहले दिन सूत्रधार नटी संवाद में सूत्रधार ने वर्षा विगत शरद ऋतु आई..., रावण, कुंभकरण और विभीषण द्वारा तपस्या करने, नारद की सलाह पर रावण द्वारा कैलाश पर्वत को उठाने और शिवजी के रावण को श्राप देने के देने, रावण दूतों द्वारा ऋषि मुनियों की तपस्या में खलल डालने, मुनियों द्वारा दूतों को कर के रूप में अपने खून से भरे घड़े को देने, रावण द्वारा दूतों को घड़े को जनकपुरी में गाढ़ने, जनक द्वारा हल चलाने पर सीता जी का जन्म होने के दृश्य का मंचन किया गया। ब्रह्मा की भूमिका गिरीश जोशी, दशरथ की पूरन पांडे, जनक की खीम सिंह मेहता, रावण की बलवंत कपकोटी, कुंभकर्ण की बहादुर कपकोटी और विभीषण की भूमिका राकेश पांडे ने निभाई। कमेटी के अध्यक्ष गणेेश कपकोटी ने सभी का स्वागत किया। संचालन गणेश चंद्र उपाध्याय ने किया। इस मौके पर त्रिलोक कपकोटी, मोहन कपकोटी, निदेशक आनंद बल्लभ पांडे, प्रकाश कांडपाल, व्यवस्थापक राजू कपकोटी, बीडीसी सदस्य तारा कपकोटी, चंद्र सिंह कपकोटी, नरेंद्र कपकोटी, दीवान मेहता, पूरन पांडे, दयाल जोशी, हरीश कपकोटी, महेंद्र मेहता और प्रकाश बिष्ट आदि मौजूद थे।
रविवार शाम रामलीला का शुुुभारंभ मुख्य अतिथि वरिष्ठ कलाकार लक्ष्मी दत्त कांडपाल ने किया। पहले दिन सूत्रधार नटी संवाद में सूत्रधार ने वर्षा विगत शरद ऋतु आई..., रावण, कुंभकरण और विभीषण द्वारा तपस्या करने, नारद की सलाह पर रावण द्वारा कैलाश पर्वत को उठाने और शिवजी के रावण को श्राप देने के देने, रावण दूतों द्वारा ऋषि मुनियों की तपस्या में खलल डालने, मुनियों द्वारा दूतों को कर के रूप में अपने खून से भरे घड़े को देने, रावण द्वारा दूतों को घड़े को जनकपुरी में गाढ़ने, जनक द्वारा हल चलाने पर सीता जी का जन्म होने के दृश्य का मंचन किया गया। ब्रह्मा की भूमिका गिरीश जोशी, दशरथ की पूरन पांडे, जनक की खीम सिंह मेहता, रावण की बलवंत कपकोटी, कुंभकर्ण की बहादुर कपकोटी और विभीषण की भूमिका राकेश पांडे ने निभाई। कमेटी के अध्यक्ष गणेेश कपकोटी ने सभी का स्वागत किया। संचालन गणेश चंद्र उपाध्याय ने किया। इस मौके पर त्रिलोक कपकोटी, मोहन कपकोटी, निदेशक आनंद बल्लभ पांडे, प्रकाश कांडपाल, व्यवस्थापक राजू कपकोटी, बीडीसी सदस्य तारा कपकोटी, चंद्र सिंह कपकोटी, नरेंद्र कपकोटी, दीवान मेहता, पूरन पांडे, दयाल जोशी, हरीश कपकोटी, महेंद्र मेहता और प्रकाश बिष्ट आदि मौजूद थे।
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