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जून में वनाग्नि की 18 घटनाएं, 21 हेक्टेयर जंगल खाक
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बागेश्वर के धूराफाट के जंगल में लगी आग। विज्ञप्ति
- फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। जिले में वनों के जलने का सिलसिला जारी है। कपकोट के कालीधार, गरुड़ के गढ़खेत और काफलीगैर के धूराफाट क्षेत्र में जंगल धधक रहे हैं। जून में वनाग्नि की 18 घटनाओं में 21.16 हेक्टेयर जंगल जलकर जल चुका है। 63,480 रुपये का नुकसान हुआ है। वहीं, इस साल के फायर सीजन में वनाग्नि की 165 घटनाओं में 236 हेक्टेयर जंगल जल गया है और 7,15,490 रुपये का नुकसान हुआ है।
जिले में जंगलों के जलने की शुरुआत मार्च के अंतिम सप्ताह में हुई थी। होली के बाद वनों के जलने का सिलसिला शुरू हुआ था और अप्रैल के पूरे महीने चला। जिला मुख्यालय सहित सभी तहसील क्षेत्रों के जंगल आग की भेंट चढ़ गए। हालांकि मई में मौसम मेहरबान रहा और लगातार हो रही बारिश के चलते वनाग्नि की छिटपुट घटनाएं ही हुई। जून में मौसम सामान्य हुआ तो जंगलों की आग फिर भड़क उठी। एक जून से जंगलों में आग लगने की शुरुआत हुई थी, जो अब तक जारी है। जून में जिला मुख्यालय के खबडोली, नीलेश्वर, छतीना, मनकोट सहित कांडा के धपोली, घिंघारतोला, कपकोट के कालीधार, गोलना, गरुड़ के गढ़खेत रेंज और काफलीगैर के धूराफाट क्षेत्र में जंगल आग की चपेट में आकर नष्ट हो चुके हैं। बृहस्पतिवार को भी गढ़खेत रेंज और धूराफाट क्षेत्र के वनों में आग लगी। वहीं कपकोट के कालीधार में बुधवार को आग लगी थी।
जंगल की आग से वनों के समीप रहने वाले लोगों को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आग के आबादी तक आने का खतरा बना रहता है। वहीं, चारा पत्ती के जलकर नष्ट होने से पशुपालकों की मुश्किलें भी बढ़ रही है। आग लगने से नगरीय और घाटी वाले क्षेत्रों में फिर से धुआं फैलने लगा है। भीषण गर्मी के बीच धुआं बढ़ने से बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।
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जिले में अधिकांश स्थानों पर लोग घास के लिए जंगल जला रहे हैं। कुछ स्थानों पर अराजक तत्व भी वनों को आग के हवाले कर रहे हैं। विभागीय कर्मचारी लगातार आग को काबू पाने में जुटे हैं। लोगों को वनों की सुरक्षा करने और आग न लगाने के लिए जागरूक भी किया जा रहा है।
हिमांशु बागरी, डीएफओ बागेश्वर
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जिले में जंगलों के जलने की शुरुआत मार्च के अंतिम सप्ताह में हुई थी। होली के बाद वनों के जलने का सिलसिला शुरू हुआ था और अप्रैल के पूरे महीने चला। जिला मुख्यालय सहित सभी तहसील क्षेत्रों के जंगल आग की भेंट चढ़ गए। हालांकि मई में मौसम मेहरबान रहा और लगातार हो रही बारिश के चलते वनाग्नि की छिटपुट घटनाएं ही हुई। जून में मौसम सामान्य हुआ तो जंगलों की आग फिर भड़क उठी। एक जून से जंगलों में आग लगने की शुरुआत हुई थी, जो अब तक जारी है। जून में जिला मुख्यालय के खबडोली, नीलेश्वर, छतीना, मनकोट सहित कांडा के धपोली, घिंघारतोला, कपकोट के कालीधार, गोलना, गरुड़ के गढ़खेत रेंज और काफलीगैर के धूराफाट क्षेत्र में जंगल आग की चपेट में आकर नष्ट हो चुके हैं। बृहस्पतिवार को भी गढ़खेत रेंज और धूराफाट क्षेत्र के वनों में आग लगी। वहीं कपकोट के कालीधार में बुधवार को आग लगी थी।
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जंगल की आग से वनों के समीप रहने वाले लोगों को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आग के आबादी तक आने का खतरा बना रहता है। वहीं, चारा पत्ती के जलकर नष्ट होने से पशुपालकों की मुश्किलें भी बढ़ रही है। आग लगने से नगरीय और घाटी वाले क्षेत्रों में फिर से धुआं फैलने लगा है। भीषण गर्मी के बीच धुआं बढ़ने से बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।
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जिले में अधिकांश स्थानों पर लोग घास के लिए जंगल जला रहे हैं। कुछ स्थानों पर अराजक तत्व भी वनों को आग के हवाले कर रहे हैं। विभागीय कर्मचारी लगातार आग को काबू पाने में जुटे हैं। लोगों को वनों की सुरक्षा करने और आग न लगाने के लिए जागरूक भी किया जा रहा है।
हिमांशु बागरी, डीएफओ बागेश्वर