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चौड़ास्थल को अलग ब्लाक बनाने की हसरत नहीं हो सकी पूरी
Updated Tue, 08 May 2018 10:44 PM IST
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बागेश्वर। कपकोट ब्लॉक के उच्च हिमालयी क्षेत्र के गांवों को मिलाकर चौड़ास्थल के नाम से अलग ब्लॉक बनाने की क्षेत्र के लोगों की हसरत पूरी नहीं हो सकी है। विकास से कोसों दूर बोराचक, कुंवारी, झूनी जैसे गांव सड़क से नहीं जुड़ सके हैं। इस कारण बोरबलड़ा, कुंवारी के ग्रामीण दूसरे दिन तहसील मुख्यालय पहुंचने को मजबूर हैं।
कपकोट से करीब 35 किमी की दूरी पर सरयू, पिंडरघाटी के 32 गांवों को मिलाकर चौड़ास्थल में अलग ब्लॉक बनाने की मांग काफी पुरानी है। जिला तो वर्ष 1997 में बन गया लेकिन ब्लॉक की मांग को किसी भी सरकार ने तवज्जो नहीं दी। वर्ष 2011 में इस क्षेत्र की आबादी 30 हजार से भी अधिक थी। मुनार-सोंग-बदियाकोट-बाछम सड़क की हालत खराब है। सोंग-लोहारखेत हल्का वाहन मार्ग जानलेवा बना है। गांवों में पैदल चलने के लिए पगडंडियां भी ढंग की नहीं हैं। बरसात में बाढ़, भूस्खलन और जाड़ों में बर्फबारी से यह क्षेत्र दो-तीन महीने के लिए तहसील मुख्यालय से कटा रहता है। इसी कारण यहां फील्डकर्मी रहना ही नहीं चाहते। अधिकारी भी नहीं आ पाते। इस कारण ग्रामीणों को विकास योजनाओं की जानकारी कम रहती है जबकि इस क्षेत्र में आलू, राजमा, चौलाई की फसल खूब होती है, लेकिन इनकी वाजिब कीमत नहीं मिल पाती। विपणन की ठोस व्यवस्था न होने से अब लोग रिंगाल, ऊन के कारोबार से हटने लगे हैं। यहां विश्व प्रसिद्ध पिंडारी, सुंदरढुंगा, कफनी ग्लेशियर समेत सदानीरा सरयू, पिंडर, शंभू नदी का उद्गमस्थल होने के बावजूद पर्यटन सुविधाओं का भी अभाव है। बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण क्षेत्र से कई परिवार पलायन कर कपकोट, भराड़ी, बागेश्वर, अल्मोड़ा, हल्द्वानी, दिल्ली चले गए हैं। चौड़ास्थल को शीघ्र ब्लॉक बनाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष विक्रम दानू, मल्ला दानपुर विकास संघर्ष समिति के अध्यक्ष स्वरूप सिंह कर्म्याल ने कहा कि चौड़ास्थल को ब्लॉक का दर्जा दिलाने के लिए फिर से आंदोलन किया जाएगा।
बोरबलड़ा, कुंवारी के ग्रामीण दूसरे दिन पहुंचते हैं तहसील मुख्यालय
बोराचक, कुंवारी, झूनी आदि गांव सड़क से नहीं जुड़ सके
विकास, रोजगार की समस्या से गांवों से बढ़ रहा पलायन
-इन गांवों को मिलाकर अलग ब्लॉक बनाने की है मांग
कुंवारी, बोरबलड़ा, बदियाकोट, कालो, किलपारा, सोराग, बाछम, खाती, कर्मी, दोबाड़, बघर, ढोक्टीगांव, डौला, तीख, उगियां, झूनी, खल्झूनी, मिकिला, खल्पट्टा, पतियासार, सूपी, रिखाड़ी, हरकोट, धुरकोट, सुडिंग, चौड़ा, पेठी, घुरड़िया, सलिंग, शुमगढ़, लाहुर, गांसी।
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-राज्य में जब भी ब्लॉकों का पुनर्गठन होगा, उसमें इस जिले के प्रस्तावित ब्लॉकों को भी शामिल कराया जाएगा। कहा कि सरकार हर गांव का समानता के आधार पर विकास कर रही है।
- बलवंत भौर्याल
विधायक, विधानसभा क्षेत्र कपकोट।
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कपकोट से करीब 35 किमी की दूरी पर सरयू, पिंडरघाटी के 32 गांवों को मिलाकर चौड़ास्थल में अलग ब्लॉक बनाने की मांग काफी पुरानी है। जिला तो वर्ष 1997 में बन गया लेकिन ब्लॉक की मांग को किसी भी सरकार ने तवज्जो नहीं दी। वर्ष 2011 में इस क्षेत्र की आबादी 30 हजार से भी अधिक थी। मुनार-सोंग-बदियाकोट-बाछम सड़क की हालत खराब है। सोंग-लोहारखेत हल्का वाहन मार्ग जानलेवा बना है। गांवों में पैदल चलने के लिए पगडंडियां भी ढंग की नहीं हैं। बरसात में बाढ़, भूस्खलन और जाड़ों में बर्फबारी से यह क्षेत्र दो-तीन महीने के लिए तहसील मुख्यालय से कटा रहता है। इसी कारण यहां फील्डकर्मी रहना ही नहीं चाहते। अधिकारी भी नहीं आ पाते। इस कारण ग्रामीणों को विकास योजनाओं की जानकारी कम रहती है जबकि इस क्षेत्र में आलू, राजमा, चौलाई की फसल खूब होती है, लेकिन इनकी वाजिब कीमत नहीं मिल पाती। विपणन की ठोस व्यवस्था न होने से अब लोग रिंगाल, ऊन के कारोबार से हटने लगे हैं। यहां विश्व प्रसिद्ध पिंडारी, सुंदरढुंगा, कफनी ग्लेशियर समेत सदानीरा सरयू, पिंडर, शंभू नदी का उद्गमस्थल होने के बावजूद पर्यटन सुविधाओं का भी अभाव है। बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण क्षेत्र से कई परिवार पलायन कर कपकोट, भराड़ी, बागेश्वर, अल्मोड़ा, हल्द्वानी, दिल्ली चले गए हैं। चौड़ास्थल को शीघ्र ब्लॉक बनाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष विक्रम दानू, मल्ला दानपुर विकास संघर्ष समिति के अध्यक्ष स्वरूप सिंह कर्म्याल ने कहा कि चौड़ास्थल को ब्लॉक का दर्जा दिलाने के लिए फिर से आंदोलन किया जाएगा।
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बोरबलड़ा, कुंवारी के ग्रामीण दूसरे दिन पहुंचते हैं तहसील मुख्यालय
बोराचक, कुंवारी, झूनी आदि गांव सड़क से नहीं जुड़ सके
विकास, रोजगार की समस्या से गांवों से बढ़ रहा पलायन
-इन गांवों को मिलाकर अलग ब्लॉक बनाने की है मांग
कुंवारी, बोरबलड़ा, बदियाकोट, कालो, किलपारा, सोराग, बाछम, खाती, कर्मी, दोबाड़, बघर, ढोक्टीगांव, डौला, तीख, उगियां, झूनी, खल्झूनी, मिकिला, खल्पट्टा, पतियासार, सूपी, रिखाड़ी, हरकोट, धुरकोट, सुडिंग, चौड़ा, पेठी, घुरड़िया, सलिंग, शुमगढ़, लाहुर, गांसी।
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-राज्य में जब भी ब्लॉकों का पुनर्गठन होगा, उसमें इस जिले के प्रस्तावित ब्लॉकों को भी शामिल कराया जाएगा। कहा कि सरकार हर गांव का समानता के आधार पर विकास कर रही है।
- बलवंत भौर्याल
विधायक, विधानसभा क्षेत्र कपकोट।