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प्राथमिक और माध्यमिक कक्षाओं में पढ़ रहे डिग्री कालेज के छात्र
Updated Mon, 30 Jul 2018 11:29 PM IST
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बागेश्वर। सरकार ने तुष्टिकरण की खातिर जगह-जगह पर महाविद्यालय तो खोल दिए, लेकिन शिक्षकों और संसाधनों की कमी की ओर ध्यान नहीं दिया। नतीजन जिले में उच्च शिक्षा पटरी से उतरी हुई है। गागरीगोल महाविद्यालय प्राइमरी स्कूल में संचालित हो रहा है तो तीन अन्य डिग्री कालेज इंटर कालेज के भवनों में संचालित हो रहे हैं। सैकड़ों विद्यार्थी माध्यमिक और प्राथमिक विद्यालयों के कक्षा कक्षों में जैसे तैसे पढ़ने को मजबूर हैं। भेड़-बकरियों की तरह इक्का दुक्का कमरों में उच्च शिक्षा की कक्षाएं चल रही हैं। पेयजल, शौचालय और बैठने की पर्याप्त जगह, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, कंप्यूटर, इंटरनेट जैसी बुनियादी सुविधाओं की किल्लत है।
जिले में बागेश्वर डिग्री कालेज सबसे पुराना उच्च शिक्षा केंद्र है। सरकार ने कपकोट, गरुड़, कांडा, बनलेख में नए महाविद्यालय खोले हैं। कपकोट डिग्री कालेज वर्ष 2005 से असों इंटर कालेज में चल रहा है। यहां बीएम में 10 विषयों की पढ़ाई ही होती है। गुजरे 13 सालों बाद भी कालेज का अपना भवन नहीं बन सका है और न ही स्नातकोत्तर का दर्जा मिला है। शिक्षकों के अधिकांश पदों पर टोटा है। 273 विद्यार्थी शिक्षकों की कमी जरुरी संसाधनों की किल्लत के बीच पढ़ रहे हैं। शौचालय और शुद्ध पेयजल की किल्लत है। कांडा डिग्री कालेज वर्ष 2006 से इंटर कालेज में चल रहा है। 14 सालों बाद भी कालेज का अपना भवन नहीं बन सका है। कालेज तक जाने के लिए सड़क नहीं है। विद्यार्थियों को रोज कई किमी पैदल चलना पड़ता है। शिक्षकों के 36 पदों में से 25 पद रिक्त हैं। 250 छात्र दो नियमित और चार नितांत अस्थाई शिक्षकों के भरोसे पढ़ रहे हैं।
कालेज में स्नातक के कुछ विषयों की ही पढ़ाई होती है। शौचालय और शुद्ध पेयजल की किल्लत है। 2015 में खुला बनलेख डिग्री कालेज इंटर कालेज भवन में दो कमरों में चल रहा है। कालेज भवन के लिए जमीन तो तलाश ली गई है, लेकिन निर्माण शुरू नहीं हुआ है। शिक्षकों के छह पदों में से तीन खाली हैं। 93 विद्यार्थी जैसे तैसे दो कमरों में पढ़ रहे हैं। कालेज आने जाने के लिए रोज एक किमी पैदल चलना पड़ता है। शौचालय और शुद्ध पेयजल की किल्लत है। गरुड़ डिग्री कालेज के लिए तो सालों बाद भी जमीन नहीं तलाशी गई है। आज भी डिग्री कालेज गागरीगोल प्राथमिक विद्यालय में चल रहा है। विद्यालय तक सड़क नहीं है। पैदल चलना पड़ता है। 350 से अधिक विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा देने की जिम्मेदारी पांच नियमित और पांच नितांत अस्थाई शिक्षकों पर है। कालेज में स्नातक के कुछ विषयों की ही पढ़ाई होती है। शौचालय और शुद्ध पेयजल की किल्लत है।
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संसाधनों को जूझते बागेश्वर कालेज पर बढ़ा दबाव
बागेश्वर। जिले के इन चार डिग्री कालेज की बदहाली के बीच बागेश्वर डिग्री कालेज पर दबाव बढ़ रहा है। यहां क्षमता से दो गुना अधिक विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। जिले के अन्य कालेज की समस्याओं के कारण बागेश्वर डिग्री कालेज में छात्र संख्या बढ़ती जा रही है। पिछले साल कालेज की छात्र संख्या 2417 थी, जो इस बार बढ़कर 2500 से अधिक हो सकती है। नतीजन कालेज में सभी छात्रों को बैठने की जगह तक नहीं है। सालों बाद भी कालेज में ओवरहेड टैंक नहीं बन सका। शिक्षकों के 38 पदों में से 25 खाली हैं। ढाई हजार से अधिक छात्रों को उच्च शिक्षा देने की जिम्मेदारी 13 नियमित और सात अस्थाई शिक्षकों पर है। आधुनिक प्रयोगशाला का अभाव है। पुस्तकालय में एक भी स्टाफ नहीं है। कालेज में नए पद सृजित करने और नए भवन का प्रस्ताव फाइलों में कैद है।
कोट....
सरकार उच्च शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने की दिशा में काम कर रही है। निर्माणाधीन कालेज भवनों के काम में तेजी लाने को कहा गया है। भवन निर्माण के लिए भूमि की सरगर्मी से तलाश की जा रही है। नए भवन के निर्माण के लिए बजट के साथ ही शिक्षकों का बंदोबस्त भी किया जा रहा है।
डॉ धन सिंह रावत, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री, उत्तराखंड
महाविद्यालय पद विद्यार्थियों का दबाव बढ़ता जा रहा है। प्राध्यापकों के नए पद सृजित करने के साथ ही रिक्त पदों पर नियुक्ति का प्रस्ताव निदेशालय को भेजा गया है। कालेज भवन के विस्तार का प्रस्ताव भी भेजा जा चुका है। सालों इंतजार के बाद भी कालेज में पेयजल व्यवस्था नहीं बन पाई है।
डॉ एससी पंत, प्राचार्य, बीडी पांडे स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बागेश्वर
जिले में बागेश्वर डिग्री कालेज सबसे पुराना उच्च शिक्षा केंद्र है। सरकार ने कपकोट, गरुड़, कांडा, बनलेख में नए महाविद्यालय खोले हैं। कपकोट डिग्री कालेज वर्ष 2005 से असों इंटर कालेज में चल रहा है। यहां बीएम में 10 विषयों की पढ़ाई ही होती है। गुजरे 13 सालों बाद भी कालेज का अपना भवन नहीं बन सका है और न ही स्नातकोत्तर का दर्जा मिला है। शिक्षकों के अधिकांश पदों पर टोटा है। 273 विद्यार्थी शिक्षकों की कमी जरुरी संसाधनों की किल्लत के बीच पढ़ रहे हैं। शौचालय और शुद्ध पेयजल की किल्लत है। कांडा डिग्री कालेज वर्ष 2006 से इंटर कालेज में चल रहा है। 14 सालों बाद भी कालेज का अपना भवन नहीं बन सका है। कालेज तक जाने के लिए सड़क नहीं है। विद्यार्थियों को रोज कई किमी पैदल चलना पड़ता है। शिक्षकों के 36 पदों में से 25 पद रिक्त हैं। 250 छात्र दो नियमित और चार नितांत अस्थाई शिक्षकों के भरोसे पढ़ रहे हैं।
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कालेज में स्नातक के कुछ विषयों की ही पढ़ाई होती है। शौचालय और शुद्ध पेयजल की किल्लत है। 2015 में खुला बनलेख डिग्री कालेज इंटर कालेज भवन में दो कमरों में चल रहा है। कालेज भवन के लिए जमीन तो तलाश ली गई है, लेकिन निर्माण शुरू नहीं हुआ है। शिक्षकों के छह पदों में से तीन खाली हैं। 93 विद्यार्थी जैसे तैसे दो कमरों में पढ़ रहे हैं। कालेज आने जाने के लिए रोज एक किमी पैदल चलना पड़ता है। शौचालय और शुद्ध पेयजल की किल्लत है। गरुड़ डिग्री कालेज के लिए तो सालों बाद भी जमीन नहीं तलाशी गई है। आज भी डिग्री कालेज गागरीगोल प्राथमिक विद्यालय में चल रहा है। विद्यालय तक सड़क नहीं है। पैदल चलना पड़ता है। 350 से अधिक विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा देने की जिम्मेदारी पांच नियमित और पांच नितांत अस्थाई शिक्षकों पर है। कालेज में स्नातक के कुछ विषयों की ही पढ़ाई होती है। शौचालय और शुद्ध पेयजल की किल्लत है।
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संसाधनों को जूझते बागेश्वर कालेज पर बढ़ा दबाव
बागेश्वर। जिले के इन चार डिग्री कालेज की बदहाली के बीच बागेश्वर डिग्री कालेज पर दबाव बढ़ रहा है। यहां क्षमता से दो गुना अधिक विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। जिले के अन्य कालेज की समस्याओं के कारण बागेश्वर डिग्री कालेज में छात्र संख्या बढ़ती जा रही है। पिछले साल कालेज की छात्र संख्या 2417 थी, जो इस बार बढ़कर 2500 से अधिक हो सकती है। नतीजन कालेज में सभी छात्रों को बैठने की जगह तक नहीं है। सालों बाद भी कालेज में ओवरहेड टैंक नहीं बन सका। शिक्षकों के 38 पदों में से 25 खाली हैं। ढाई हजार से अधिक छात्रों को उच्च शिक्षा देने की जिम्मेदारी 13 नियमित और सात अस्थाई शिक्षकों पर है। आधुनिक प्रयोगशाला का अभाव है। पुस्तकालय में एक भी स्टाफ नहीं है। कालेज में नए पद सृजित करने और नए भवन का प्रस्ताव फाइलों में कैद है।
कोट....
सरकार उच्च शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने की दिशा में काम कर रही है। निर्माणाधीन कालेज भवनों के काम में तेजी लाने को कहा गया है। भवन निर्माण के लिए भूमि की सरगर्मी से तलाश की जा रही है। नए भवन के निर्माण के लिए बजट के साथ ही शिक्षकों का बंदोबस्त भी किया जा रहा है।
डॉ धन सिंह रावत, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री, उत्तराखंड
महाविद्यालय पद विद्यार्थियों का दबाव बढ़ता जा रहा है। प्राध्यापकों के नए पद सृजित करने के साथ ही रिक्त पदों पर नियुक्ति का प्रस्ताव निदेशालय को भेजा गया है। कालेज भवन के विस्तार का प्रस्ताव भी भेजा जा चुका है। सालों इंतजार के बाद भी कालेज में पेयजल व्यवस्था नहीं बन पाई है।
डॉ एससी पंत, प्राचार्य, बीडी पांडे स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बागेश्वर