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सिंचाई नहर ध्वस्त होने से 200 नाली भूमि बंजर होने की कगार पर
Updated Mon, 05 Feb 2018 10:20 PM IST
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बागेश्वर। वर्षाकाल में ध्वस्त भनारतोली गांव की सिंचाई नहर में अभी तक सुधार नहीं किया गया है। इसके चलते 200 नाली कृषि भूमि बंजर होने की कगार पर है। ग्रामीणों ने सिंचाई नहर का शीघ्र सुधार नहीं करने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
घटगाड़ के क्षेत्र पंचायत सदस्य हेम चंद्र जोशी के नेतृत्व में डीएम को सौंपे ज्ञापन में ग्रामीणों ने कहा कि भनारतोली गांव में बौट गधेरे से ककड़ा-सेरा तक सिंचाई नहर है। लगभग डेढ़ किमी लंबी यह नहर 2017 में आपदा काल में क्षतिग्रस्त हो गई थी। तब से नहर का सुधार नहीं किया गया है। कई बार श्रमदान से नहर को दुरुस्त करने के बाद भी सभी खेतों को सिंचाई की सुविधा नहीं मिल पा रही है। सिंचाई नहीं होने से फसलों और सब्जी का उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है। दो सौ से अधिक नाली कृषि भूमि बंजर होने की स्थिति में है।
सिंचाई सुविधा का अभाव होने से खेती पर निर्भर किसान परेशान हैं। क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन से सिंचाई नहर को दुरुस्त करने के लिए संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देशित करने की मांग की। ज्ञापन में कहा गया है कि यदि शीघ्र नहर का सुधार नहीं किया गया तो उन्हें आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा। ज्ञापन सौंपने वालों में पूर्व प्रधान भैरव दत्त जोशी, कुंदन सिंह, घनश्याम पाठक आदि शामिल थे।
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घटगाड़ के क्षेत्र पंचायत सदस्य हेम चंद्र जोशी के नेतृत्व में डीएम को सौंपे ज्ञापन में ग्रामीणों ने कहा कि भनारतोली गांव में बौट गधेरे से ककड़ा-सेरा तक सिंचाई नहर है। लगभग डेढ़ किमी लंबी यह नहर 2017 में आपदा काल में क्षतिग्रस्त हो गई थी। तब से नहर का सुधार नहीं किया गया है। कई बार श्रमदान से नहर को दुरुस्त करने के बाद भी सभी खेतों को सिंचाई की सुविधा नहीं मिल पा रही है। सिंचाई नहीं होने से फसलों और सब्जी का उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है। दो सौ से अधिक नाली कृषि भूमि बंजर होने की स्थिति में है।
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सिंचाई सुविधा का अभाव होने से खेती पर निर्भर किसान परेशान हैं। क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन से सिंचाई नहर को दुरुस्त करने के लिए संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देशित करने की मांग की। ज्ञापन में कहा गया है कि यदि शीघ्र नहर का सुधार नहीं किया गया तो उन्हें आंदोलन के लिए बाध्य होना पड़ेगा। ज्ञापन सौंपने वालों में पूर्व प्रधान भैरव दत्त जोशी, कुंदन सिंह, घनश्याम पाठक आदि शामिल थे।
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