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नरगोली गांव कागजों में ओडीएफ पर खुले में शौच करने से नहीं मिली मुक्ति

Mon, 17 Dec 2018 11:30 PM IST
Updated Mon, 17 Dec 2018 11:30 PM IST
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नरगोली गांव कागजों में ओडीएफ पर खुले में शौच करने से नहीं मिली मुक्ति
बागेश्वर। सरकार ने बागेश्वर ब्लॉक के सुदूरवर्ती नरगोली गांव को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) तो घोषित कर दिया है लेकिन जमीनी हकीकत तो कुछ और ही बयां कर रही हैं। गांव में आज भी दो दर्जन से अधिक परिवारों के पास शौचालय है ही नहीं। शौचालय विहीन परिवार खुले में शौच को मजबूर हैं। कुछ ने घर के आंगन में टांट पट्टी की सहायता से शौचालय बना रखे हैं तो कुछ के शौचालय वर्षों से अधूरे ही पड़े हैं।
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नरगोली गांव में कई परिवारों के पास शौचालय नहीं हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार शौचालयविहीन परिवारों को शौचालय उपलब्ध करा दिए गए हैं। स्वजल परियोजना के डाटा इंट्री आप्रेटर ध्यान चंद्र लोहनी ने बताया कि 2012 के सर्वे के आधार पर नरगोली में कुल 115 परिवार थे, जिनमें से 110 परिवारों के पास शौचालय थे। शौचालयविहीन तीन परिवारों को स्वजल और दो को मनरेेगा से शौचालय उपलब्ध कराए थे। उसके बाद जो बढ़े परिवारों की सूची ग्राम पंचायतों से मांगी गई लेकिन निर्धारित समय के भीतर सूची नहीं आई जिसमें नरगोली गांव भी शामिल है। शासन के निर्देश पर जब भी नया सर्वे होगा नरगोली गांव को भी शामिल किया जाएगा।
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पार्वती देवी कहतीं हैं कि 2012 में तत्कालीन ग्राम प्रधान ने एक बोरा सीमेंट, शौचालय सीट और एक पाइप दिया था। रुपये नहीं होने से पक्का शौचालय नहीं बना सकी। कच्चा टिन लगाकर अस्थाई शौचालय बनाया जो अब बदतर हो चुका है। खुले में शौच जाने की मजबूरी है।
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देव राम बताते हैं कि शौचालय की मांग को लेकर पहले ब्लॉक, फिर स्वजल से गुजारिश की लेकिन शौचालय नहीं मिल सका। उनका परिवार शौच के लिए खुले में जाता है।

गीता देवी कहती हैं कि सरकार ने गांव को ओडीएफ कैसे कर दिया यह तो उन्हें नहीं मालूम। कई अन्य परिवार हैं जिनके पास शौचालय नहीं है। मजबूरी में ग्रामीणों को खुले में जाना पड़ रहा है। इससे बीमारी फैलने की आशंका है।

संतोष कुमार का कहना है कि 2011-12 में तत्कालीन ग्राम प्रधान के कहने पर शौचालय का गड्ढा खोदा। धनराशि के बदले चार फिट लंबा टिन का टुुकड़ा मिला। उसने खुद ही अस्थाई शौचालय बनाया जिसकी हालत अब काफी बुरी हो चुकी है। शौचालय की मांग कई बार कर दी है लेकिन कोई सुन नहीं रहा है।


वर्ष 2012 की गणना के आधार पर स्वजल ने चिह्ति तीन और मनरेगा से दो शौचालय विहीन परिवारों को शौचालय उपलब्ध हुए मगर उसके बाद कई परिवार बढ़े हैं। करीब दो दर्जन लोगों के लिए शौचालय की मांग की गई है। - अनिल रौतेला, ग्राम प्रधान नरगोली।
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