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Almora News: जब 26 साल का हो जाऊंगा तो तिरंगे में लिपटकर आऊंगा
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संवाद न्यूज एजेंसी
अल्मोड़ा। शहीद लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी के पिता प्रमोद नाथ गोस्वामी ने अपने बेटे से जुड़ीं भावुक यादें साझा कीं। उन्होंने बताया कि बीरेश्वर बचपन से ही सेना में जाने का सपना देखता था और देश सेवा के लिए हमेशा समर्पित रहता था।
पिता के अनुसार जब बीरेश्वर कक्षा 9 में पढ़ता था, तभी उसने अपने फेसबुक पर एक भावुक पोस्ट लिखी थी कि जब मैं 26 साल का हो जाऊंगा तो तिरंगे में लिपटकर आऊंगा। उसकी यह बात आज सच्चाई बन गई।
प्रमोद नाथ गोस्वामी ने बताया कि उनका बेटा बेहद अनुशासित और सादगीपूर्ण जीवन जीता था। वह फिजूलखर्ची के सख्त खिलाफ था और अक्सर कहता था कि पापा फिजूल खर्च करने से अच्छा है किसी गरीब बच्चे की फीस भर दी जाए। बताया कि उनका बेटा काफी जांबाज अफसर था इसीलिए उसने असम रेजीमेंट का चयन किया।
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उन्होंने बताया कि असम रेजीमेंट का एक स्लोगन है तगड़ा रहो। उनका बेटा जब भी छुट्टियों में घर आता था तो उनसे कहता था पापा तगड़ा रहो।
इस दौरान बेटे को याद कर वह भावुक हो गए और उनके आंखों से आंसू छलक पड़े। उन्होंने यह भी बताया कि बीरेश्वर की पदोन्नति कैप्टन के पद पर दो दिन बाद होने वाली थी लेकिन उससे पहले ही वह देश की सेवा करते हुए शहीद हो गए।
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अल्मोड़ा। शहीद लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी के पिता प्रमोद नाथ गोस्वामी ने अपने बेटे से जुड़ीं भावुक यादें साझा कीं। उन्होंने बताया कि बीरेश्वर बचपन से ही सेना में जाने का सपना देखता था और देश सेवा के लिए हमेशा समर्पित रहता था।
पिता के अनुसार जब बीरेश्वर कक्षा 9 में पढ़ता था, तभी उसने अपने फेसबुक पर एक भावुक पोस्ट लिखी थी कि जब मैं 26 साल का हो जाऊंगा तो तिरंगे में लिपटकर आऊंगा। उसकी यह बात आज सच्चाई बन गई।
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प्रमोद नाथ गोस्वामी ने बताया कि उनका बेटा बेहद अनुशासित और सादगीपूर्ण जीवन जीता था। वह फिजूलखर्ची के सख्त खिलाफ था और अक्सर कहता था कि पापा फिजूल खर्च करने से अच्छा है किसी गरीब बच्चे की फीस भर दी जाए। बताया कि उनका बेटा काफी जांबाज अफसर था इसीलिए उसने असम रेजीमेंट का चयन किया।
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उन्होंने बताया कि असम रेजीमेंट का एक स्लोगन है तगड़ा रहो। उनका बेटा जब भी छुट्टियों में घर आता था तो उनसे कहता था पापा तगड़ा रहो।
इस दौरान बेटे को याद कर वह भावुक हो गए और उनके आंखों से आंसू छलक पड़े। उन्होंने यह भी बताया कि बीरेश्वर की पदोन्नति कैप्टन के पद पर दो दिन बाद होने वाली थी लेकिन उससे पहले ही वह देश की सेवा करते हुए शहीद हो गए।