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वीएल बेबी कार्न-2 और वीएल धान-158 का लोकार्पण
अमर उजाला ब्यूरो अल्मोड़ा।
Updated Tue, 04 Jul 2017 11:57 PM IST
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वीपीकेएस संस्थान के स्थापना पर वीएल धान और बीएल कार्न का लोकापर्ण करते अतिथि
- फोटो : amar ujala
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वर्ष भर की उपलब्धियों के बीच विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान का 94वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर संस्थान द्वारा विकसित प्रजातियां वीएल बेबी कार्न-2 और वीएल धान-158 का लोकार्पण किया गया। शोध कार्य मिलकर करने का निर्णय लेते हुए समारोह में वीपीकेएस संस्थान और जीबी पंत पर्यावरण संस्थान कोसी कटारमल के बीच करार भी किया गया।
संस्थान के कुंदन हाउस में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जीबी पंत पर्यावरण संस्थान कोसी कटारमल के निदेशक डा. पीपी ध्यानी ने पर्वतीय क्षेत्रों में उत्पादकता में होने वाली कमी, जंगली जानवरों से नुकसान, चारे की कमी और बंजर भूमि को लेकर चिंता जाहिर की। उन्होंने पर्वतीय कृषि नीति तैयार करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कृषि आधारित संस्थानों को मिलकर कार्य करने के साथ ही वैज्ञानिकों से शोध कार्य में गुणवत्ता लाने को कहा।
संस्थान के निदेशक डा. अरुणव पटनायक ने संस्थान के संस्थापक प्रो. बोसी सेन को श्रद्धांजलि देते हुए वर्षभर की उपलब्धियों की जानकारी दी। इस अवसर पर वीपीकेएस और जीबी पंत पर्यावरण संस्थान के बीच शोध कार्यों को मिलकर करने के लिए करार भी किया गया। डा. पटनायक ने बताया कि करार के बाद दोनों संस्थानों के वैज्ञानिक और शोध कार्य कर रहे शोधार्थी पर्वतीय क्षेत्र की समस्याओं, कृषि क्षेत्र में शोध आदि पर मिलकर काम किया जा सकेगा।
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स्थापना दिवस के अवसर पर संस्थान द्वारा विकसित केंद्रीय मक्का वीएल बेबीकार्न-2 और वीएल धान 158 का लोकार्पण भी किया गया। समारोह के अध्यक्ष रामकृष्ण मिशन के स्वामी सोमदेवानंद ने वैज्ञानिक कृषि को बढ़ावा देने का आह्वान किया, जबकि विशिष्ट अतिथि पूर्व निदेशक डा. जेसी भट्ट और डा. एसडी दूबे ने संस्थान द्वारा किए जा रहे शोध कार्यों की प्रशंसा की। संचालन डा. रेनू जेठी, कुशाग्रा ने किया। डा. जेके बिष्ट ने धन्यवाद प्रस्ताव दिया।इस अवसर पर डा. लक्ष्मीकांत, डा. निर्मल चंद्रा, मुख्य कृषि अधिकारी प्रियंका सिंह, उद्यान अधिकारी भावना जोशी, मोहन चंद्र कांडपाल समेत संस्थान के वैज्ञानिक और किसान मौजूद थे।
अधिसूचित प्रजातियों में वीपीकेएस देश में दूसरे नंबर पर
अल्मोड़ा। वीपीकेएस संस्थान के निदेशक डा. अरुणव पटनायक ने संस्थान की उपलब्धि बताते हुए बताया कि देश भर में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सभी संस्थानों के बीच 2011 से 2017 तक अधिसूचित प्रजातियों में वीपीकेएस संस्थान की सर्वाधिक 28 प्रजातियां अधिसूचित हुई हैं जो कि देशभर के संस्थानों में दूसरे नंबर पर है। पहले स्थान पर भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली है।
प्रगतिशील किसान और कर्मचारी सम्मानित
अल्मोड़ा। वीपीकेएस के स्थापना दिवस पर प्रगतिशील किसानों लक्ष्मी देवी, चंद्र वल्लभ पांडे समेत मेधावी छात्रों, कर्मचारियों को संस्थान के निदेशक डा. अरुणव पटनायक और अतिथियों ने सम्मानित किया। संस्थान के कर्मचारियों डा. वीएस मीणा, बहादुर राम, डा. अनुराधा भारतीय, मेदनी प्रताप सिंह, हरीश चंद्र जोशी, आनंद सिंह अधिकारी और सुरेंद्र सिंह ग्वाल को उत्कृष्ट कार्य के लिए और एनसी बेलवाल, पनराम को सराहनीय सेवा के लिए और डा. शेर सिंह, डा. एनके हेड़ाऊ, दिनेश चंद्र मिश्र को विशिष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया।
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संस्थान के कुंदन हाउस में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जीबी पंत पर्यावरण संस्थान कोसी कटारमल के निदेशक डा. पीपी ध्यानी ने पर्वतीय क्षेत्रों में उत्पादकता में होने वाली कमी, जंगली जानवरों से नुकसान, चारे की कमी और बंजर भूमि को लेकर चिंता जाहिर की। उन्होंने पर्वतीय कृषि नीति तैयार करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कृषि आधारित संस्थानों को मिलकर कार्य करने के साथ ही वैज्ञानिकों से शोध कार्य में गुणवत्ता लाने को कहा।
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संस्थान के निदेशक डा. अरुणव पटनायक ने संस्थान के संस्थापक प्रो. बोसी सेन को श्रद्धांजलि देते हुए वर्षभर की उपलब्धियों की जानकारी दी। इस अवसर पर वीपीकेएस और जीबी पंत पर्यावरण संस्थान के बीच शोध कार्यों को मिलकर करने के लिए करार भी किया गया। डा. पटनायक ने बताया कि करार के बाद दोनों संस्थानों के वैज्ञानिक और शोध कार्य कर रहे शोधार्थी पर्वतीय क्षेत्र की समस्याओं, कृषि क्षेत्र में शोध आदि पर मिलकर काम किया जा सकेगा।
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स्थापना दिवस के अवसर पर संस्थान द्वारा विकसित केंद्रीय मक्का वीएल बेबीकार्न-2 और वीएल धान 158 का लोकार्पण भी किया गया। समारोह के अध्यक्ष रामकृष्ण मिशन के स्वामी सोमदेवानंद ने वैज्ञानिक कृषि को बढ़ावा देने का आह्वान किया, जबकि विशिष्ट अतिथि पूर्व निदेशक डा. जेसी भट्ट और डा. एसडी दूबे ने संस्थान द्वारा किए जा रहे शोध कार्यों की प्रशंसा की। संचालन डा. रेनू जेठी, कुशाग्रा ने किया। डा. जेके बिष्ट ने धन्यवाद प्रस्ताव दिया।इस अवसर पर डा. लक्ष्मीकांत, डा. निर्मल चंद्रा, मुख्य कृषि अधिकारी प्रियंका सिंह, उद्यान अधिकारी भावना जोशी, मोहन चंद्र कांडपाल समेत संस्थान के वैज्ञानिक और किसान मौजूद थे।
अधिसूचित प्रजातियों में वीपीकेएस देश में दूसरे नंबर पर
अल्मोड़ा। वीपीकेएस संस्थान के निदेशक डा. अरुणव पटनायक ने संस्थान की उपलब्धि बताते हुए बताया कि देश भर में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सभी संस्थानों के बीच 2011 से 2017 तक अधिसूचित प्रजातियों में वीपीकेएस संस्थान की सर्वाधिक 28 प्रजातियां अधिसूचित हुई हैं जो कि देशभर के संस्थानों में दूसरे नंबर पर है। पहले स्थान पर भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली है।
प्रगतिशील किसान और कर्मचारी सम्मानित
अल्मोड़ा। वीपीकेएस के स्थापना दिवस पर प्रगतिशील किसानों लक्ष्मी देवी, चंद्र वल्लभ पांडे समेत मेधावी छात्रों, कर्मचारियों को संस्थान के निदेशक डा. अरुणव पटनायक और अतिथियों ने सम्मानित किया। संस्थान के कर्मचारियों डा. वीएस मीणा, बहादुर राम, डा. अनुराधा भारतीय, मेदनी प्रताप सिंह, हरीश चंद्र जोशी, आनंद सिंह अधिकारी और सुरेंद्र सिंह ग्वाल को उत्कृष्ट कार्य के लिए और एनसी बेलवाल, पनराम को सराहनीय सेवा के लिए और डा. शेर सिंह, डा. एनके हेड़ाऊ, दिनेश चंद्र मिश्र को विशिष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया।