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विश्व पर्यटन दिवस आज: उपेक्षा का दंश झेल रही उत्तराखंड की काशी, पुराना है इतिहास; जानिए क्या कहते हैं लोग

Fri, 27 Sep 2024 11:14 AM IST
हीरा मेहरा हेमंत बिष्ट, संवाद
हेमंत बिष्ट, संवाद Published by: हीरा मेहरा Updated Fri, 27 Sep 2024 11:14 AM IST
सार

द्वाराहाट से 10 किमी दूर स्थित उत्तराखंड की काशी नाम से विख्यात प्राचीन विमांडेश्वर महादेव मंदिर उपेक्षा का दंश झेल रहा है। इस मंदिर में लोगों की अपार आस्था है लेकिन रखरखाव के अभाव में अब यह मंदिर जीर्ण-शीर्ण स्थिति में है।

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Vimandeshwar Mandir: Kashi of Uttarakhand is suffering the brunt of neglect
विमांडेश्वर महादेव मंदिर में रखीं मुर्तियां - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मंदिरों की नगरी के नाम से मशहूर द्वाराहाट से 10 किमी दूर स्थित उत्तराखंड की काशी नाम से विख्यात प्राचीन विमांडेश्वर महादेव मंदिर उपेक्षा का दंश झेल रहा है। इस मंदिर में लोगों की अपार आस्था है लेकिन रखरखाव के अभाव में अब यह मंदिर जीर्ण-शीर्ण स्थिति में है। क्षेत्र के लोग मंदिर को मानस माला खंड में शामिल कर इसके कायाकल्प करने की मांग कर रहे हैं।

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पुराना है इतिहास
श्री विमांडेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास बहुत पुराना है। इतिहासकारों मानते हैं कि इस मंदिर की स्थापना कत्यूरी राजाओं की ओर से करीब 900 वर्ष पूर्व सन् 1100 के आसपास कराई गई होगी। यायावर लेखक राहुल सांकृत्यायन ने मंदिर का निर्माण काल 10वीं से 12वीं शताब्दी के मध्य किया जाना बताया है। वर्तमान समय में रखरखाव नहीं होने से मंदिर जीर्णशीर्ण हो चुका है। मंदिर आसपास के 15 से अधिक गांवों में रहने वाले हजारों लोगों के साथ ही दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। इस समय मंदिर के अंदर रखी मूर्तियां खतरे की जद में हैं।

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रिस्कन नदी घाटी के इस स्थल को मुक्तिधाम भी कहते हैं, जहां हर साल हजारों साधु और लोग ध्यान और दर्शन के लिए पहुंचते थे। यहीं पर नंदिनी और सुरभि नदियों का संगम होता है। इसमें स्नान करने के साथ ही पितरों का तर्पण करने की भी मान्यता है। इस तीर्थ की मान्यता हरिद्वार के बराबर बताई गई है। 

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मंदिर में अलग-अलग कलाकृतियों की मूर्तियां
इस मंदिर में काल भैरव, भगवान शिव, भगवान गणेश, सीता, राम आदि देवों की मूर्तियां हैं। मंदिर के बाहर से कपिला गौमाता का शिलापट आकर्षण का केंद्र है। इस मंदिर में चार वेदों का यज्ञ भी जनकल्याण के लिए किया गया था।

पुस्तकालय भी बन गया इतिहास
ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार यहां पहले मंदिर के अंदर धामिक और राजाओं के शासन काल की कई पुस्तकें रखी गई थीं। इनका उपयोग राजा और प्रजा दिन-रात करते थे। लेकिन अब पुस्तकालय नाम मात्र का ही रह गया है।

क्या कहते हैं लोग
उत्तराखंड की काशी नाम से विख्यात विमांडेश्वर शिव मंदिर श्रद्धालुओं की अगाध श्रद्धा का केंद्र है। यहां पितरों का तर्पण भी किया जाता है। लेकिन अब धीरे -धीरे ये धरोहर विलुप्त होने के कगार पर है।-दीवान सिंह मेहता, सामाजिक कार्यकर्ता।

विमांडेश्वर महादेव मंदिर लाखों लोगों की आस्था का केंद्र है। लेकिन मंदिर जीर्णशीर्ण होने से धामिक कार्यों में मुश्किल होती है। इसका जीर्णोद्धार किया जाना बेहद जरूरी है।


-पंडित गोपाल दत्त जोशी, पुजारी विमांडेश्वर महादेव, द्वाराहाट।

मंदिर समिति के आवेदन के बाद विभाग की ओर से स्थलीय निरीक्षण किया जायेगा। इसके बाद ही आगे कि कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ.चंद्र सिंह चौहान, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी, अल्मोड़ा।

मंदिर तक ऐसे पहुंचे
इस पौराणिक मंदिर तक पहुंच भी आसान है। अल्मोड़ा से होते हुए दौलाघट कुंवाली होते हुए द्वाराहाट पहुंचा जा सकता है। यहां से दस किलोमीटर दूर मंदिर है जहां तक पक्की सड़क है। निजी वाहनों के साथ ही प्राइवेट टैक्सियों से भी पहुंचा जा सकता है। पहले यहां रोडवेज की बसें भी चलती थी केमू की बस अभी भी जाती है। यहां तक पहुंचने के लिए रानीखेत और रामनगर क्षेत्र से भी रास्ते हैं।

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