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बेकाबू जंगल की आग पहुंची जंता गांव तक, घास के 30 लुट्टे राख, एक महिला झुलसी
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जंता गांव में घास के लुट्टो में सुलगती आग। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : RANIKHET
रानीखेत (अल्मोड़ा)। ताड़ीखेत विकासखंड के सुदूरवर्ती कोसी नदी के जंगल से सुलगी आग जंता गांव तक पहुंच गई। दो घंटे के अंतराल में आबादी क्षेत्र तक पहुंची आग ने ग्रामीणों के बनाए घास के 30 लुट्टे और लकड़ियों के 25 ढेर राख कर दिए। लुट्टे बचाने की कोशिश में लगी एक महिला आंशिक रूप से झुलस गई। वहीं धुएं के गुबार के कारण दो महिलाएं बेहोश हो गईं। उन्हें ग्रामीण पानी छिड़क कर होश में लाए और झुलसी महिला का घरेलू इलाज किया। ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना के बावजूद न तो वन विभाग और न ही प्रशासन से कोई अधिकारी मौके पर पहुंचा।
घटना मंगलवार देर शाम की है। बताया जा रहा है कि कोसी नदी के जंगल में आग सुलगी थी। दो घंटे में आग जंता गांव तक पहुंच गई। इससे ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। लाखों की वन संपदा राख हो गई। प्रधान महेंद्र रावत ने बताया कि ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत के बाद खुद ही आग पर काबू पाया। वहीं लुट्टे बचाने के प्रयास में हेमा देवी आग की चपेट में आ गई थीं। उनके कुछ बाल जल गए। जबकि रेखा देवी और गीता देवी बेहोश हुई थीं। उन्होंने कहा कि जंगलों में लगातार आग लग रही है लेकिन वन विभाग ठोस कदम नहीं उठा रहा। इस मामले में वन विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन संपर्क नहीं हो पाया।
ग्रामीणों के सामने पशुओं के लिए चारे का संकट
रानीखेत। घास के लुट्टे और तीन से चार किमी का जंगल राख होने के बाद ग्रामीणों के सामने पशुओं के लिए चारे का प्रबंध करने का संकट है।
ग्राम प्रधान महेंद्र रावत ने बताया कि नंदन सिंह, खीम सिंह, जीवन सिंह, पान सिंह, चंद्र सिंह, कुंवर सिंह, महेंद्र सिंह, महेश सिंह, रमा देवी, हेमा देवी, गीता देवी, रेखा देवी सहित तमाम लोगों के घास के लुट्टे राख हो गए हैं। अब चारे का प्रबंध करने में परेशानी हो रही है।
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प्रधान से बात हो गई थी। बृहस्पतिवार की सुबह गांव जाकर निरीक्षण कर नुकसान का जायजा लिया जाएगा। इसके बाद मुआवजे के लिए आगे की कार्रवाई की जाएगी। - कुंदन सिंह कनवाल, राजस्व उप निरीक्षक, काकड़ीघाट।
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घटना मंगलवार देर शाम की है। बताया जा रहा है कि कोसी नदी के जंगल में आग सुलगी थी। दो घंटे में आग जंता गांव तक पहुंच गई। इससे ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। लाखों की वन संपदा राख हो गई। प्रधान महेंद्र रावत ने बताया कि ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत के बाद खुद ही आग पर काबू पाया। वहीं लुट्टे बचाने के प्रयास में हेमा देवी आग की चपेट में आ गई थीं। उनके कुछ बाल जल गए। जबकि रेखा देवी और गीता देवी बेहोश हुई थीं। उन्होंने कहा कि जंगलों में लगातार आग लग रही है लेकिन वन विभाग ठोस कदम नहीं उठा रहा। इस मामले में वन विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन संपर्क नहीं हो पाया।
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ग्रामीणों के सामने पशुओं के लिए चारे का संकट
रानीखेत। घास के लुट्टे और तीन से चार किमी का जंगल राख होने के बाद ग्रामीणों के सामने पशुओं के लिए चारे का प्रबंध करने का संकट है।
ग्राम प्रधान महेंद्र रावत ने बताया कि नंदन सिंह, खीम सिंह, जीवन सिंह, पान सिंह, चंद्र सिंह, कुंवर सिंह, महेंद्र सिंह, महेश सिंह, रमा देवी, हेमा देवी, गीता देवी, रेखा देवी सहित तमाम लोगों के घास के लुट्टे राख हो गए हैं। अब चारे का प्रबंध करने में परेशानी हो रही है।
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प्रधान से बात हो गई थी। बृहस्पतिवार की सुबह गांव जाकर निरीक्षण कर नुकसान का जायजा लिया जाएगा। इसके बाद मुआवजे के लिए आगे की कार्रवाई की जाएगी। - कुंदन सिंह कनवाल, राजस्व उप निरीक्षक, काकड़ीघाट।