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Almora News: चीड़ के पिरूल से कोयला बनाने के तरीके बताए गए
Tue, 21 Mar 2023 11:15 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Tue, 21 Mar 2023 11:15 PM IST
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गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान कोसी-कटारमल में हुई कार्यशाला में मौजूद विश
- फोटो : गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान कोसी-कटारमल में हुई कार्यशाला में मौजूद विशेषज्ञ। संवाद
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अल्मोड़ा। उत्तराखंड विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद की ओर से गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान कोसी-कटारमल में जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए पिरूल से कोयला बनाने के तरीके बताए गए। वक्ताओं ने कहा कि पिरूल से कोयला तैयार कर ग्रामीण अपनी आजीविका में सुधार कर सकते हैं।
मुख्य वक्ता डॉ. रवींद्र जोशी ने पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली से संबंधित जानकारी दी। संस्थान के निदेशक प्रो. सुनील नौटियाल ने घरेलू कार्बन फुटप्रिंट्स कम करने के लिए ऊर्जा संवर्धन के उपाय बताए। उत्तराखंड विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद देहरादून के डॉ. संतोष रावत ने परिषद के विज्ञान और शोध-विकास कार्यक्रमों के बारे में बताया।
परियोजना निदेशक और सामाजिक-आर्थिक विकास केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. हर्षित पंत जुगरान ने पिरूल से कोयला, कागज और सजावटी वस्तुएं बनाने की जानकारी दी। वसुंधरा समिति के निदेशक हिमांशु जोशी ने ग्रामीण क्षेत्रों के लिए पर्यावरण अनुकूल जैव अपशिष्ट निस्तारण पर जोर दिया। वहां श्रीनगर के उच्च स्तरीय पादप कार्यिकी शोध केंद्र के डॉ. विजयकांत पुरोहित, डॉ. मनमोहन रावत, एसएसजे अल्मोड़ा विवि के वनस्पति विज्ञान विभाग के डॉ. बलवंत कुमार आदि मौजूद रहे।
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मुख्य वक्ता डॉ. रवींद्र जोशी ने पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली से संबंधित जानकारी दी। संस्थान के निदेशक प्रो. सुनील नौटियाल ने घरेलू कार्बन फुटप्रिंट्स कम करने के लिए ऊर्जा संवर्धन के उपाय बताए। उत्तराखंड विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद देहरादून के डॉ. संतोष रावत ने परिषद के विज्ञान और शोध-विकास कार्यक्रमों के बारे में बताया।
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परियोजना निदेशक और सामाजिक-आर्थिक विकास केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. हर्षित पंत जुगरान ने पिरूल से कोयला, कागज और सजावटी वस्तुएं बनाने की जानकारी दी। वसुंधरा समिति के निदेशक हिमांशु जोशी ने ग्रामीण क्षेत्रों के लिए पर्यावरण अनुकूल जैव अपशिष्ट निस्तारण पर जोर दिया। वहां श्रीनगर के उच्च स्तरीय पादप कार्यिकी शोध केंद्र के डॉ. विजयकांत पुरोहित, डॉ. मनमोहन रावत, एसएसजे अल्मोड़ा विवि के वनस्पति विज्ञान विभाग के डॉ. बलवंत कुमार आदि मौजूद रहे।
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