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Almora News: तो क्या पांडवखोली को देखने के लिए विदेशी पर्यटकों से उधार लेनी होंगी नजरें
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पांडवखोली से सूर्यास्त का नजारा। फाइल फोटो
- फोटो : RANIKHET
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। समुद्रतल से 8800 फुट की ऊंचाई पर स्थित स्वर्गपुरी पांडवखोली में विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं लेकिन अपने इसकी सुध नहीं ले रहे हैं। शासन प्रशासन की नजरें इस दिव्य स्थल पर नहीं पड़ रही हैं। बेरुखी के चलते ही इसे आध्यात्मिक और धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित नहीं किया जा सका है।
रानीखेत से 60 किमी की दूरी पर स्थित पांडवखोली के लिए द्वाराहाट से कुकूछीना जाना पड़ता है। कूकूछीना से साढ़े तीन किमी की खड़ी चढ़ाई पार करने के बाद पांडवखोली जैसे दिव्य और एकांत स्थल के दर्शन होते हैं। पांडवखोली से हिमालय और सूर्योदय, सूर्यास्त के विहंगम दृश्य दिखाई देते हैं। इसी के चलते यहां देशी-विदेशी पर्यटक खिंचे चले आते हैं और कई दिन तक यहां ध्यान लगाते हैं।
आश्रम के मुख्य कार्यकर्ता हरीश साह का कहना है कि मंदिर में चहारदीवारी और कूकूछीना से रोपवे लगाने की मांग आज तक पूरी नहीं हो सकी है।
महाभारत काल से जुड़ा है इतिहास
बताते हैं कि महाभारत काल में जब पांडवों को अज्ञातवास हुआ था, तब पांचों पांडव अपनी पत्नी द्रौपदी के साथ इसी स्थल पर रहे थे। यहां पर बुग्यालनुमा स्थल है। कहा जाता है कि इसी स्थल पर भीम आराम करते थे। इसे भीम की गुदड़ी कहा जाता है। हजारों साल बाद ब्रह्मलीन महंत बलवंत गिरि महाराज की नजर इस स्थल पर पड़ी तो उन्होंने इसके विकास के लिए प्रयास किए। भव्य मंदिर का निर्माण कराया। अब पथ भ्रमण संघ ने लोगों के सहयोग से यहां आश्रम बना दिया है, ध्यान मठ केंद्र बन गया है। टावरनुमा मठ में ध्यान लगाया जाता है।
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पांडवखोली में भंडारा तीन दिसंबर को
द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक स्थली स्वर्गपुरी पांडवखोली में श्री श्री 1008 महंत बलवंतगिरी महाराज नागा बाबा की पुण्यतिथि पर वृहद भंडारा तीन दिसंबर को होगा। आयोजन समिति अध्यक्ष हरीश साह ने बताया कि महिलाओं और बच्चों के खेल संपन्न होंगे। दो दिसंबर को नित्य पूजा, गणेश पूजा, रुद्री पाठ, रात्रि आठ बजे से भजन कीर्तन होंगे। कार्यक्रम भीम की खातड़ी मैदान में संपन्न होंगे।
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रानीखेत से 60 किमी की दूरी पर स्थित पांडवखोली के लिए द्वाराहाट से कुकूछीना जाना पड़ता है। कूकूछीना से साढ़े तीन किमी की खड़ी चढ़ाई पार करने के बाद पांडवखोली जैसे दिव्य और एकांत स्थल के दर्शन होते हैं। पांडवखोली से हिमालय और सूर्योदय, सूर्यास्त के विहंगम दृश्य दिखाई देते हैं। इसी के चलते यहां देशी-विदेशी पर्यटक खिंचे चले आते हैं और कई दिन तक यहां ध्यान लगाते हैं।
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आश्रम के मुख्य कार्यकर्ता हरीश साह का कहना है कि मंदिर में चहारदीवारी और कूकूछीना से रोपवे लगाने की मांग आज तक पूरी नहीं हो सकी है।
महाभारत काल से जुड़ा है इतिहास
बताते हैं कि महाभारत काल में जब पांडवों को अज्ञातवास हुआ था, तब पांचों पांडव अपनी पत्नी द्रौपदी के साथ इसी स्थल पर रहे थे। यहां पर बुग्यालनुमा स्थल है। कहा जाता है कि इसी स्थल पर भीम आराम करते थे। इसे भीम की गुदड़ी कहा जाता है। हजारों साल बाद ब्रह्मलीन महंत बलवंत गिरि महाराज की नजर इस स्थल पर पड़ी तो उन्होंने इसके विकास के लिए प्रयास किए। भव्य मंदिर का निर्माण कराया। अब पथ भ्रमण संघ ने लोगों के सहयोग से यहां आश्रम बना दिया है, ध्यान मठ केंद्र बन गया है। टावरनुमा मठ में ध्यान लगाया जाता है।
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पांडवखोली में भंडारा तीन दिसंबर को
द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक स्थली स्वर्गपुरी पांडवखोली में श्री श्री 1008 महंत बलवंतगिरी महाराज नागा बाबा की पुण्यतिथि पर वृहद भंडारा तीन दिसंबर को होगा। आयोजन समिति अध्यक्ष हरीश साह ने बताया कि महिलाओं और बच्चों के खेल संपन्न होंगे। दो दिसंबर को नित्य पूजा, गणेश पूजा, रुद्री पाठ, रात्रि आठ बजे से भजन कीर्तन होंगे। कार्यक्रम भीम की खातड़ी मैदान में संपन्न होंगे।