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बाघ का खौफ: तीन स्कूलों में पढ़ाई ठप, आधे रास्ते से लौटे शिक्षक
Fri, 07 Aug 2026 11:24 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Fri, 07 Aug 2026 11:24 PM IST
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मौलेखाल(अल्मोड़ा)। सल्ट विकासखंड के बौरड़ा क्षेत्र में बाघ की लगातार बढ़ती गतिविधियों का असर अब शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ने लगा है। बाघ के भय के चलते तीन स्कूलों में शिक्षण कार्य ठप रहा। शुक्रवार की सुबह भी क्षेत्र में बाघ दिखने के बाद एहतियातन शनिवार को भी क्षेत्र के स्कूल बंद रहेंगे।
बीते बृहस्पतिवार को राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय घजीरा में अभिभावकों की बैठक के बाद तय किया गया था कि खतरा टलने तक क्षेत्र के सभी बच्चों की पढ़ाई राजकीय प्राथमिक विद्यालय बौरड़ा में कराई जाएगी। हालांकि उसी शाम करीब चार बजे बाघ बौरड़ा के गधेरे में धमक गया। इससे प्राथमिक विद्यालय घजीरा, राजकीय प्राथमिक विद्यालय बौरड़ा और राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय घजीरा में पढ़ाई ठप रही। शुक्रवार सुबह शिक्षक कुमेरिया से करीब साढ़े चार किलोमीटर पैदल चलकर विद्यालय के लिए निकले थे, लेकिन रास्ते में उन्हें बाघ दिखने के बाद स्कूल में बच्चों के नहीं आने की सूचना मिली। जिस रास्ते से शिक्षकों को गुजरना था, वहां भी बाघ दिखने का खतरा था। शिक्षकों ने सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए आधे रास्ते से ही वापस लौटने का निर्णय लिया।
राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय घजीरा के प्रधानाध्यापक दीनबंधु उपाध्याय ने बताया कि स्कूल पहुंचने का पूरा रास्ता जंगल, घनी झाड़ियों और नाले से होकर गुजरता है। क्षेत्र में किराये पर रहने की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है तथा छोटी-छोटी आवश्यकताओं के लिए भी साढ़े चार किलोमीटर दूर सड़क मार्ग तक जाना पड़ता है। ऐसे में लगातार बाघ की मौजूदगी के कारण विद्यालय आना-जाना बेहद जोखिम भरा हो गया है।
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कोट
बाघ दिखने की सूचना मिलते ही विभाग की टीम को गांव भेज दिया गया था। ट्रेंकुलाइज टीम ने भी पोजीशन संभाल रखी है। रेस्क्यू अभियान के दौरान ग्रामीणों और वनकर्मियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। टीम गांव के आसपास लगातार गश्त कर स्थिति पर नजर बनाए हुए है। -हेमा कर्नाटक, वन क्षेत्राधिकारी, मोहान
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बीते बृहस्पतिवार को राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय घजीरा में अभिभावकों की बैठक के बाद तय किया गया था कि खतरा टलने तक क्षेत्र के सभी बच्चों की पढ़ाई राजकीय प्राथमिक विद्यालय बौरड़ा में कराई जाएगी। हालांकि उसी शाम करीब चार बजे बाघ बौरड़ा के गधेरे में धमक गया। इससे प्राथमिक विद्यालय घजीरा, राजकीय प्राथमिक विद्यालय बौरड़ा और राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय घजीरा में पढ़ाई ठप रही। शुक्रवार सुबह शिक्षक कुमेरिया से करीब साढ़े चार किलोमीटर पैदल चलकर विद्यालय के लिए निकले थे, लेकिन रास्ते में उन्हें बाघ दिखने के बाद स्कूल में बच्चों के नहीं आने की सूचना मिली। जिस रास्ते से शिक्षकों को गुजरना था, वहां भी बाघ दिखने का खतरा था। शिक्षकों ने सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए आधे रास्ते से ही वापस लौटने का निर्णय लिया।
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राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय घजीरा के प्रधानाध्यापक दीनबंधु उपाध्याय ने बताया कि स्कूल पहुंचने का पूरा रास्ता जंगल, घनी झाड़ियों और नाले से होकर गुजरता है। क्षेत्र में किराये पर रहने की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है तथा छोटी-छोटी आवश्यकताओं के लिए भी साढ़े चार किलोमीटर दूर सड़क मार्ग तक जाना पड़ता है। ऐसे में लगातार बाघ की मौजूदगी के कारण विद्यालय आना-जाना बेहद जोखिम भरा हो गया है।
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बाघ दिखने की सूचना मिलते ही विभाग की टीम को गांव भेज दिया गया था। ट्रेंकुलाइज टीम ने भी पोजीशन संभाल रखी है। रेस्क्यू अभियान के दौरान ग्रामीणों और वनकर्मियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। टीम गांव के आसपास लगातार गश्त कर स्थिति पर नजर बनाए हुए है। -हेमा कर्नाटक, वन क्षेत्राधिकारी, मोहान