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हजारों लोग बने स्याल्दे बिखोती मेले के गवाह
Tue, 16 Apr 2019 12:10 AM IST
दीपक नेगी
अमर उजाला ब्यूरो द्वाराहाट (अल्मोड़ा)।
अमर उजाला ब्यूरो द्वाराहाट (अल्मोड़ा)।
Published by: दीपक नेगी
Updated Tue, 16 Apr 2019 12:10 AM IST
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्याल्दे मेला स्थल पर मेलार्थियों की इस तरह से उमड़ी रही भीड़।
- फोटो : अमर उजाला
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ऐतिहासिक स्याल्दे बिखोती के मुख्य मेले में आल और गरख धड़े के सैकड़ों लोगों ने 18 जोड़े नगाड़े-निशानों के साथ ओड़ा भेंटने की रस्म निभाई। हजारों मेलार्थी इस पल के गवाह रहे। घटगाड़ से ग्रामीण ढोल-नगाड़ों, निशानों के साथ श्रंकार नृत्य करते हुए मेला स्थल तक पहुंचे।
इसके बाद झोड़ा गायन का सिलसिला चला। च्याल ब्वारी दिल्ली न्है गीं घर में रैगीं बुढ़ सहित कई पारंपरिक झोड़ों का गायन हुआ।
सबसे पहले ऑल धड़े के ग्रामीणों ने ओड़ा भेंटने की रस्म निभाई। ऑल धड़े में बिजेपुर, भौंरा, डढोली, मल्ली मिरई, तल्ली मिरई, किरोली और पिनोली गांव के ग्रामीण शामिल थे। इसके बाद देर शाम गरख धड़े के लोग भी ढोल-नगाड़ों और निशानों के साथ लाठियां लहराते हुए मेला स्थल पहुंचे। उन्होंने भी ओड़ा भेंटने की रस्म निभाई। गरख दल में सलना, बसेरा, असगोली, मल्ली असगोली, तल्ली धन्यारी, बूंगा, कुई, बेढुली, सिमलगांव, नैंणी, बनोली के ग्रामीण शामिल रहे। दोनों धड़ों के लोग 18 जोड़े नगाड़े-निशानों के साथ पहुंचे थे। इससे पूर्व घटगाड़ से श्रंकार नृत्य करते हुए ग्रामीण मेला स्थल पर पहुंचे। इसके बाद झोड़ा गायन का सिलसिला चला। युवाओं के साथ ही बुजुर्गों में भी खासा जोश देखा गया। शांति व्यवस्था के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा।
इस मौके पर विधायक महेश नेगी, पूर्व विधायक मदन बिष्ट, पुष्पेश त्रिपाठी, नगर पंचायत अध्यक्ष मुकुल शाह, पीसी तिवारी, दिनेश तिवारी, हेम रावत, उदय किरौला, टीका राम उपाध्याय, मेला सचिव नारायण रावत आदि मौजूद थे।
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पहाड़का दाज्यू न पियो शराबा...
द्वाराहाट। स्याल्दे के मुख्य मेले में झोड़ा गायन की धूम मची रही। बुजुर्गों के साथ ही युवाओं में भी खासा उत्साह देखा गया। ग्रामीणों ने जंगली जानवरों के आतंक पर उत्तराखंड राज्य बणी बे खालि है गिना गौं, बाघ बनारा बोई रई हम कथा हां जों गाया। शराब पर गौंनू गौंनू में शराब पुजिगे पांणिक हैगे पट्ट, जंगलों बै बनार एगिना, खेती पाति है गे पट्ट, पुलावामा शहीदों को समर्पित झोड़ा पुलवामा शहीदो तुमर दगा हम, तुम चलाओ गोई बारूदा हम चलुलो बम जैसे झोड़े भी गाए गए। पहाड़का दाज्यू न पियो शराबा, लाल लाल थैली नाम गुलाबा।
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इसके बाद झोड़ा गायन का सिलसिला चला। च्याल ब्वारी दिल्ली न्है गीं घर में रैगीं बुढ़ सहित कई पारंपरिक झोड़ों का गायन हुआ।
सबसे पहले ऑल धड़े के ग्रामीणों ने ओड़ा भेंटने की रस्म निभाई। ऑल धड़े में बिजेपुर, भौंरा, डढोली, मल्ली मिरई, तल्ली मिरई, किरोली और पिनोली गांव के ग्रामीण शामिल थे। इसके बाद देर शाम गरख धड़े के लोग भी ढोल-नगाड़ों और निशानों के साथ लाठियां लहराते हुए मेला स्थल पहुंचे। उन्होंने भी ओड़ा भेंटने की रस्म निभाई। गरख दल में सलना, बसेरा, असगोली, मल्ली असगोली, तल्ली धन्यारी, बूंगा, कुई, बेढुली, सिमलगांव, नैंणी, बनोली के ग्रामीण शामिल रहे। दोनों धड़ों के लोग 18 जोड़े नगाड़े-निशानों के साथ पहुंचे थे। इससे पूर्व घटगाड़ से श्रंकार नृत्य करते हुए ग्रामीण मेला स्थल पर पहुंचे। इसके बाद झोड़ा गायन का सिलसिला चला। युवाओं के साथ ही बुजुर्गों में भी खासा जोश देखा गया। शांति व्यवस्था के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा।
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इस मौके पर विधायक महेश नेगी, पूर्व विधायक मदन बिष्ट, पुष्पेश त्रिपाठी, नगर पंचायत अध्यक्ष मुकुल शाह, पीसी तिवारी, दिनेश तिवारी, हेम रावत, उदय किरौला, टीका राम उपाध्याय, मेला सचिव नारायण रावत आदि मौजूद थे।
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पहाड़का दाज्यू न पियो शराबा...
द्वाराहाट। स्याल्दे के मुख्य मेले में झोड़ा गायन की धूम मची रही। बुजुर्गों के साथ ही युवाओं में भी खासा उत्साह देखा गया। ग्रामीणों ने जंगली जानवरों के आतंक पर उत्तराखंड राज्य बणी बे खालि है गिना गौं, बाघ बनारा बोई रई हम कथा हां जों गाया। शराब पर गौंनू गौंनू में शराब पुजिगे पांणिक हैगे पट्ट, जंगलों बै बनार एगिना, खेती पाति है गे पट्ट, पुलावामा शहीदों को समर्पित झोड़ा पुलवामा शहीदो तुमर दगा हम, तुम चलाओ गोई बारूदा हम चलुलो बम जैसे झोड़े भी गाए गए। पहाड़का दाज्यू न पियो शराबा, लाल लाल थैली नाम गुलाबा।