{"_id":"62e2d75847568a55a815ceb3","slug":"thirst-quenched-when-the-nephew-took-the-campaign-of-the-kathayat-brothers-to-the-point-almora-news-hld470613240","type":"story","status":"publish","title_hn":"कठायत बंधुओ की मुहीम को भतीजे ने मुकाम तक पहुंचाया तो बुझी प्यास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कठायत बंधुओ की मुहीम को भतीजे ने मुकाम तक पहुंचाया तो बुझी प्यास
विज्ञापन
गगास घाटी अंतर्गत बग्वालीपोखर के थामण में पुनर्जीवित किया गया नौला।
- फोटो : ALMORA
चौखुटिया (अल्मोड़ा)। गगास घाटी स्थित बग्वालीपोखर के थामण गांव के ग्रामीणों की मेहनत रंग लाई और सालों से बंद नौला ग्रामीणों की प्यास बुझाने लगा है। नौले को पुनर्जीवित करने का जो बीड़ा दो भाईयों खेमसिंह और किशन सिंह कठायत ने उठाया उसे उनके भतीजे गणेश कठायत ने जन सहभगिता से अंजाम तक पहुंचाने में योगदान किया। थामण गांव नौला फाउंडेशन के स्वयं सेवकों के लिए सफल प्रयोगशाला बन गया।
थामण गांव में पानी की किल्लत के चलते गांव से पलायन आम बात हो गई थी। गांव के लोग पेयजल के लिए स्वजल की योजना पर निर्भर रहते थे। गर्मियों में वह भी नसीब नही होता था। लोग गगास नदी पर निर्भर थे। गांव की पेयजल की समस्या के समाधान के लिए नौलों को पुनर्जीवित करने में जुटी नौला फाउंडेशन के स्वयं सेवकों ने ग्रामीणों से संपर्क कर गांव में बैठक की।
गांव के खेमसिंह और किशनसिंह ने लोगों को एकजुट कर अभियान शुरू करने की पहल की। जिसे उनके भतीजे गणेश कठायत ने मुकाम तक पहुंचाने में विशेष योगदान दिया। अभियान में भूपिंदर बिष्ट, नारायण सिंह, जैत सिंह, बहादुर सिंह, रेनु देवी, कमला, ललिता, बिमला देवी के नेतृत्व में पूरा गांव अभियान में जुट गया। जुलाई 2018 में नौले के ऊपरी हिस्से में 700 पौधे लगाने के साथ ही चाल खाल बनाने शुरू किए। परिणाम स्वरूप नौला लोगों की प्यास बुझाने लगा। इस सफलता से जहां ग्रामीणों की पेयजल की एक बड़ी समस्या से छुटकारा मिल गया, वहीं नौला फाउंडेशन के लिए थामण गांव एक सफल प्रयोगशाला साबित हुआ। इस सफलता से उत्साहित फाउंडेशन ने गगास घाटी और खीरो गंगा से जुड़े गावों में भी अपने अभियान को गति दी है।
विज्ञापन
इनसेट
सड़क न होना भी है बड़ी समस्या
गगास घाटी का थामण गांव बग्वालीपोखर से करीब दो किमी पैदल दूर है। गांव तक पहुंचने के लिए पांच सौ मीटर की खड़ी चढ़ाई चढ़नी होती है। गांव में सड़क सुविधा न होना भी गांव से पलायन का कारण बताया गया है। गांव से सूर्योदय व सूर्योस्त का नजारा भी बहुत अच्छा लगता है। 2021 की जनगणना के अनुसार गांव की जनसंख्या 258 है।
इनसेट
नौले को पुनर्जीवित करने में विशेष योगदान देने वाले गणेश कठायत बताते हैं कि उनके गांव का नौला कई सालों से सूख चुका था। बरसात में कुछ दिन पानी रहता था जो कुछ ही दिनों में सूख जाता था। नौला फाउंडेशन के सहयोग से ग्रामीणों ने नौले को पुनर्जीवित किया है। पेयजल योजनाएं बनने के बाद लोगों का नौलों की तरफ ध्यान न देना भी नौलों की दुर्गति का कारण रहा है।
इनसेट
प्रदेश में कुल सोलह हजार नौले और धारे हैं। इनमें से सोलह सौ का चिन्हीकरण किया गया है। चार नौलों को पुनर्जीवित किया गया है। चार सौ से ज्यादा नौलों के संरक्षण पर कार्य हो रहा है। बिभांडेश्वर में सुरभि और नंदिनी नदी पर बने बैराज पर बहुत गाज और कचरा भरा था। लोगों के सहयोग से उसकी सफाई की। हमारा हर कार्य जन सहभागिता से हो रहा है।
- बिशन सिंह बनेशी, संस्थापक अध्यक्ष
विज्ञापन
थामण गांव में पानी की किल्लत के चलते गांव से पलायन आम बात हो गई थी। गांव के लोग पेयजल के लिए स्वजल की योजना पर निर्भर रहते थे। गर्मियों में वह भी नसीब नही होता था। लोग गगास नदी पर निर्भर थे। गांव की पेयजल की समस्या के समाधान के लिए नौलों को पुनर्जीवित करने में जुटी नौला फाउंडेशन के स्वयं सेवकों ने ग्रामीणों से संपर्क कर गांव में बैठक की।
विज्ञापन
गांव के खेमसिंह और किशनसिंह ने लोगों को एकजुट कर अभियान शुरू करने की पहल की। जिसे उनके भतीजे गणेश कठायत ने मुकाम तक पहुंचाने में विशेष योगदान दिया। अभियान में भूपिंदर बिष्ट, नारायण सिंह, जैत सिंह, बहादुर सिंह, रेनु देवी, कमला, ललिता, बिमला देवी के नेतृत्व में पूरा गांव अभियान में जुट गया। जुलाई 2018 में नौले के ऊपरी हिस्से में 700 पौधे लगाने के साथ ही चाल खाल बनाने शुरू किए। परिणाम स्वरूप नौला लोगों की प्यास बुझाने लगा। इस सफलता से जहां ग्रामीणों की पेयजल की एक बड़ी समस्या से छुटकारा मिल गया, वहीं नौला फाउंडेशन के लिए थामण गांव एक सफल प्रयोगशाला साबित हुआ। इस सफलता से उत्साहित फाउंडेशन ने गगास घाटी और खीरो गंगा से जुड़े गावों में भी अपने अभियान को गति दी है।
विज्ञापन
इनसेट
सड़क न होना भी है बड़ी समस्या
गगास घाटी का थामण गांव बग्वालीपोखर से करीब दो किमी पैदल दूर है। गांव तक पहुंचने के लिए पांच सौ मीटर की खड़ी चढ़ाई चढ़नी होती है। गांव में सड़क सुविधा न होना भी गांव से पलायन का कारण बताया गया है। गांव से सूर्योदय व सूर्योस्त का नजारा भी बहुत अच्छा लगता है। 2021 की जनगणना के अनुसार गांव की जनसंख्या 258 है।
इनसेट
नौले को पुनर्जीवित करने में विशेष योगदान देने वाले गणेश कठायत बताते हैं कि उनके गांव का नौला कई सालों से सूख चुका था। बरसात में कुछ दिन पानी रहता था जो कुछ ही दिनों में सूख जाता था। नौला फाउंडेशन के सहयोग से ग्रामीणों ने नौले को पुनर्जीवित किया है। पेयजल योजनाएं बनने के बाद लोगों का नौलों की तरफ ध्यान न देना भी नौलों की दुर्गति का कारण रहा है।
इनसेट
प्रदेश में कुल सोलह हजार नौले और धारे हैं। इनमें से सोलह सौ का चिन्हीकरण किया गया है। चार नौलों को पुनर्जीवित किया गया है। चार सौ से ज्यादा नौलों के संरक्षण पर कार्य हो रहा है। बिभांडेश्वर में सुरभि और नंदिनी नदी पर बने बैराज पर बहुत गाज और कचरा भरा था। लोगों के सहयोग से उसकी सफाई की। हमारा हर कार्य जन सहभागिता से हो रहा है।
- बिशन सिंह बनेशी, संस्थापक अध्यक्ष