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जिले में भंडारण की कोई व्यवस्था नहीं
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अल्मोड़ा में उपज के भंडारण की कोई व्यवस्था नहीं
कोल्ड स्टोर नहीं होने से औने पौने दाम में फल-सब्जी बेचने को मजबूर किसान
संवाद न्यूज एजेंसी
अल्मोड़ा। आय बढ़ाने के लिए जिले के सैकड़ों किसान करीब चार हजार 625 हेक्टेयर में आलू, प्याज और हरी सब्जियों की खेती करते हैं। सब्जी और नकदी फसलों की अच्छी पैदावार होने के बावजूद कोल्ड स्टोर के अभाव में हर साल हजारों क्विंटल सब्जियां सड़कर नष्ट हो जाती हैं। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है।
एक ओर जहां सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई योजनाएं चला रही हैं, वहीं दूसरी ओर प्याज, आलू, हरी सब्जियां समेत फल आदि की सुरक्षा को लेकर अब तक जिले में एक भी कोल्ड स्टोर नहीं बनाया गया है। उचित रख-रखाव के अभाव में हर साल हजारों क्विंटल सब्जी और फल नष्ट हो जाते हैं। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है।
नहीं मिल पाता है लागत मूल्य
कोल्ड स्टोर नहीं होने के कारण किसान औने पौने दामों में फल और सब्जी बेचने को मजबूर हैं। ऐसी स्थिति में उन्हें फसल का लागत मूल्य नहीं मिल पाता है। कई बार किसान सब्जी उत्पादन के लिए बैंकों से ऋण लेते हैं लेकिन उत्पादित सब्जी और फल का उचित लागत मूल्य नहीं मिलने के कारण उन्हें ऋण चुकाने में काफी दिक्कतें होती हैं।
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यहां होता है फल और सब्जियों का उत्पादन
जिले के जैंती तहसील क्षेत्र के लमगड़ा, ठाठ, कल्टानी, जलना, पौधार, गड़ापानी, छड़ौजा, बेडचूला, पजैना, ज्वारनेडी, कुटौली खांकर, सिल्पड़, मोतियापाथर, नाटाडोल, भांगादियोली, मेरगांव, डोल, शहरफाटक, गजार, पूनागढ़, डामर, चौखुटिया, चायखान आदि क्षेत्र में आलू, सेब, नाशपाती और जैंती, कांडे, भट्यूड़ा, बकस्वाड़, सेल्टाचापड़, स्योड़ा, उड्यारी, दाड़िमी, कुंज, बांजधार, बिनौला, भाबू, बिराड़ आदि क्षेत्रों में नींबू, माल्टा, नाशपाती, केला, अनार, दाड़िम, संतरा, आडू, खुमानी, अंगूर आदि का बहुतायत में उत्पादन होता है।
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एक मात्र कोल्ड स्टोर में भी वर्षों से हैं ताले
अल्मोड़ा। जिला मुख्यालय के निकट हवालबाग में 1992 में एक कोल्ड स्टोर का निर्माण किया गया लेकिन पहले इसकी गुणवत्ता को लेकर काफी सवाल उठते रहे। इसके बाद उद्यान विभाग ने इस कोल्ड स्टोर को एक निजी संस्था को सौंपा। यह संस्था भी घोटाले में फंस गई। बाद में इस पर ताले पड़ गए और यह आज तक बंद पड़ा है। जिले में दूसरा कोई कोल्ड स्टोर नहीं है। मुख्य उद्यान अधिकारी टीएन पांडे ने बताया कि जिले के मटेना में कई साल पहले कोल्ड स्टोर बना था जो अब बंद पड़ा है, फिलहाल कोई अन्य कोल्ड स्टोरेज बनाने का प्रस्ताव नहीं है।
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क्षेत्र में न कोल्ड स्टोर है और न ही कोई स्थानीय मंडी है। किसान उपज को हल्द्वानी, रामनगर में स्थित मंडियों में ले जाते हैं। इतनी दूर स्थित मंडियों तक फल, सब्जी आदि पहुंचाने का भाड़ा ही इतना अधिक हो जाता है कि काश्तकारों को मुनाफा काफी कम मिलता है। कोल्ड स्टोर की व्यवस्था होनी चाहिए ताकि किसानों को लाभ मिल सके। - तेज सिंह, किसान चौकुना
फोटो- (26एएलएम06पी)
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जैंती तहसील क्षेत्र में आलू, प्याज, गडरी, कद्दू समेत विभिन्न प्रकार की सब्जियों की पैदावार होती है। स्थानीय स्तर पर सब्जियों के उत्पादन के भंडारण की कोई व्यवस्था नहीं है। इस कारण किसान औने पौने दामों में उत्पादित अनाज, फल बेचने को मजबूर हैं। कई बार किसानों को बीज का लागत मूल्य भी नहीं मिल पाता है। - रणजीत सिंह धानक, काश्तकार जैंती
फोटो- (26एएलएम07पी)
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कोल्ड स्टोर नहीं होने से औने पौने दाम में फल-सब्जी बेचने को मजबूर किसान
संवाद न्यूज एजेंसी
अल्मोड़ा। आय बढ़ाने के लिए जिले के सैकड़ों किसान करीब चार हजार 625 हेक्टेयर में आलू, प्याज और हरी सब्जियों की खेती करते हैं। सब्जी और नकदी फसलों की अच्छी पैदावार होने के बावजूद कोल्ड स्टोर के अभाव में हर साल हजारों क्विंटल सब्जियां सड़कर नष्ट हो जाती हैं। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है।
एक ओर जहां सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई योजनाएं चला रही हैं, वहीं दूसरी ओर प्याज, आलू, हरी सब्जियां समेत फल आदि की सुरक्षा को लेकर अब तक जिले में एक भी कोल्ड स्टोर नहीं बनाया गया है। उचित रख-रखाव के अभाव में हर साल हजारों क्विंटल सब्जी और फल नष्ट हो जाते हैं। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है।
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नहीं मिल पाता है लागत मूल्य
कोल्ड स्टोर नहीं होने के कारण किसान औने पौने दामों में फल और सब्जी बेचने को मजबूर हैं। ऐसी स्थिति में उन्हें फसल का लागत मूल्य नहीं मिल पाता है। कई बार किसान सब्जी उत्पादन के लिए बैंकों से ऋण लेते हैं लेकिन उत्पादित सब्जी और फल का उचित लागत मूल्य नहीं मिलने के कारण उन्हें ऋण चुकाने में काफी दिक्कतें होती हैं।
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यहां होता है फल और सब्जियों का उत्पादन
जिले के जैंती तहसील क्षेत्र के लमगड़ा, ठाठ, कल्टानी, जलना, पौधार, गड़ापानी, छड़ौजा, बेडचूला, पजैना, ज्वारनेडी, कुटौली खांकर, सिल्पड़, मोतियापाथर, नाटाडोल, भांगादियोली, मेरगांव, डोल, शहरफाटक, गजार, पूनागढ़, डामर, चौखुटिया, चायखान आदि क्षेत्र में आलू, सेब, नाशपाती और जैंती, कांडे, भट्यूड़ा, बकस्वाड़, सेल्टाचापड़, स्योड़ा, उड्यारी, दाड़िमी, कुंज, बांजधार, बिनौला, भाबू, बिराड़ आदि क्षेत्रों में नींबू, माल्टा, नाशपाती, केला, अनार, दाड़िम, संतरा, आडू, खुमानी, अंगूर आदि का बहुतायत में उत्पादन होता है।
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एक मात्र कोल्ड स्टोर में भी वर्षों से हैं ताले
अल्मोड़ा। जिला मुख्यालय के निकट हवालबाग में 1992 में एक कोल्ड स्टोर का निर्माण किया गया लेकिन पहले इसकी गुणवत्ता को लेकर काफी सवाल उठते रहे। इसके बाद उद्यान विभाग ने इस कोल्ड स्टोर को एक निजी संस्था को सौंपा। यह संस्था भी घोटाले में फंस गई। बाद में इस पर ताले पड़ गए और यह आज तक बंद पड़ा है। जिले में दूसरा कोई कोल्ड स्टोर नहीं है। मुख्य उद्यान अधिकारी टीएन पांडे ने बताया कि जिले के मटेना में कई साल पहले कोल्ड स्टोर बना था जो अब बंद पड़ा है, फिलहाल कोई अन्य कोल्ड स्टोरेज बनाने का प्रस्ताव नहीं है।
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क्षेत्र में न कोल्ड स्टोर है और न ही कोई स्थानीय मंडी है। किसान उपज को हल्द्वानी, रामनगर में स्थित मंडियों में ले जाते हैं। इतनी दूर स्थित मंडियों तक फल, सब्जी आदि पहुंचाने का भाड़ा ही इतना अधिक हो जाता है कि काश्तकारों को मुनाफा काफी कम मिलता है। कोल्ड स्टोर की व्यवस्था होनी चाहिए ताकि किसानों को लाभ मिल सके। - तेज सिंह, किसान चौकुना
फोटो- (26एएलएम06पी)
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जैंती तहसील क्षेत्र में आलू, प्याज, गडरी, कद्दू समेत विभिन्न प्रकार की सब्जियों की पैदावार होती है। स्थानीय स्तर पर सब्जियों के उत्पादन के भंडारण की कोई व्यवस्था नहीं है। इस कारण किसान औने पौने दामों में उत्पादित अनाज, फल बेचने को मजबूर हैं। कई बार किसानों को बीज का लागत मूल्य भी नहीं मिल पाता है। - रणजीत सिंह धानक, काश्तकार जैंती
फोटो- (26एएलएम07पी)