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‘केवल पहाड़ नहीं सभ्यता, संस्कृति और रीति-रिवाज भी है हिमालय’

Sat, 09 Sep 2017 10:34 PM IST
अल्मोड़ा़, अमर उजाला ब्यूरो
अल्मोड़ा़, अमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 09 Sep 2017 10:34 PM IST
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'There is no mountain, civilization, culture and custom also is Himalaya'
हिमालय बचाने की शपथ दिलाते प्रभारी मंत्री डॉ. धन सिंह रावत। - फोटो : अमर उजाला

देश के आर्थिक और सामाजिक उत्थान में हिमालय के उपकारों को हम नजरअंदाज करते गए हैं, जिस पर गहन चिंतन और मंथन करने की जरूरत है। हिमालय केवल बर्फ का पहाड़ नहीं बल्कि यह सभ्यता के साथ ही संस्कृति, संस्कार, रीति-रिवाज और परंपरा है।  हिमालय दिवस पर उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डा. धनसिंह रावत ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि हिमालय को बचाने में प्रदेश के एक दर्जन गांवों का विशेष योगदान रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार ने नदियों को बचाने की जिम्मेदारी अब जिलाधिकारियों को दी है।  

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 विकास भवन में हिमालय दिवस पर आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए मुख्य अतिथि डा. धन सिंह रावत ने कहा कि हिमालय की विशालता को समझना ही हिमालय विकास का संदेश है और यह संदेश सभी देशों और राज्यों के लिए है। हिमालय अनंतकाल से मानवता को नाना रूपों में सुख-समृद्धि बांटता आ रहा है, लेकिन हमने इसे नजरअंदाज किया है। उन्होंने कहा कि हिमालय को बचाने के लिए मातृ भूमि और मातृ भाषा का भी हमें सम्मान करना होगा तभी इस अभियान में हम सफल हो पाएंगे। उन्होंने बताया कि अभियान के तहत अब नदियों को बचाने की जिम्मेदार प्रदेश सरकार ने जिलाधिकारियों को दी है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार दो अक्तूबर से किसानों की आय को दोगुनी और वीर चंद्र गढ़वाली की 125वीं जयंती पर छोटे किसानों को बहुउद्देश्यीय ऋण देने की शुरुआत कर रही है। उन्होंने बताया कि हिमालय को बचाने में कुटी, गुंजी, मुनस्यारी, नीति और माणा, आराकोट, भटवाड़ी समेत एक दर्जन गांवों ने काफी काम किया है। प्रदेश सरकार जल्द ही प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हिमालयी राज्यों के मुख्यमंत्रियों का सेमिनार आयोजित करेगी।  
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उन्होंने सभी को हिमालय बचाओ संकल्प के लिए शपथ भी दिलाई। इस मौके पर उन्होंने वीपीकेएस के फोल्डर का भी विमोचन किया। उन्होंने अमन संस्था के कार्यों की भी सराहना की। विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान ने हिमालय बचाने के लिए सामूहिक जिम्मेदारी से काम करने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि कोसी नदी को बचाने के लिए कोसी प्राधिकरण बनाने के लिए प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने पर्यटन, पशुपालन, कृषि, मत्स्य और उद्यानीकरण पर ध्यान देने पर भी जोर दिया। कार्यक्रम में जिलाधिकारी ईवा आशीष, पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी, वैज्ञानिक डा. डीएस रावत, प्रो.जेएस रावत, मुख्य कृषि अधिकारी प्रियंका सिंह, हरीश जोशी, हीरा सिंह बिष्ट, मोहन डंगवाल, गजेंद्र पाठक, गोपाल गुरुरानी ने भी विचार रखे। इस मौके पर सीडीओ डा. जेएस नागन्याल, भाजपा जिलाध्यक्ष ललित लटवाल, युवा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष कुंदन लटवाल, सूरज सिराड़ी, रमेश बहुगुणा, चंदन लाल टम्टा, गिरीश मल्होत्रा, धर्मेंद बिष्ट, सीएमओ डा. निशा पांडे, एसडीएम विवेक रॉय, अवधेश कुमार समेत आकिारी मौजूद थे। संचालन डीडीओ मो. असलम ने किया।  

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